फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   ram gopal compare savitri with mera naam joker

राजकपूर कपड़े बदलते दिखा सकते हैं तो मैं क्यों नहीं?

Thu, 09 Oct 2014 02:56 PM IST
Updated Thu, 09 Oct 2014 02:56 PM IST
विज्ञापन
ram gopal compare savitri with mera naam joker

राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘सावित्री’ के पोस्टरों और उसके बाद आए उनके  प्रेसनोट को लेकर खूब हंगामा मचा हुआ है। उन्होंने इस बवाल को थामने के लिए विरोधी संगठनों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है।

विज्ञापन


आपको यह बात तो याद ही होगी कि हाल ही में राम गोपाल वर्मा के फिल्म सावित्री के पोस्टर पर विवाद हुआ था। जिसमें उन्होंने अपने रुख का विस्तार से स्पष्टीकरण दिया है और कहा है कि राजकपूर ने ‘मेरा नाम जोकर में जो दिखाया, मैंने भी वैसा दिखाया तो क्या यह गुनाह हो गया...?
विज्ञापन

ये लिखा है पत्र में

ram gopal compare savitri with mera naam joker

मेरी फिल्म सावित्री/श्रीदेवी के पोस्टरों को अश्लील कहा जा रहा है। लेकिन मैं इससे हरगिज सहमत नहीं हूं। मैं बताना चाहता हूं कि मेरी यह फिल्म एक किशोर मन पर आधारित फिल्म है, जिसमें एक किशोर अपने से बड़ी एक महिला की ओर आकर्षित होता है।

मेरा मानना है कि ऐसे विषयों पर पहले भी फिल्में बन चुकी हैं तो मेरी फिल्म का विरोध क्यों..? मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि राजकूपर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में भी यह विषय था... जिसमें राज कपूर जी ने दर्शाया था कि कैसे एक किशोर छात्र का मन अपनी जवां, खूबसूरत मैडम पर डोल जाता है और वो उससे प्यार करने लगता है। इस फिल्म में राज कपूर ने काफी बोल्ड सीन दर्शाए थे।

मेरा नाम जोकर पर विवाद क्यों नहीं?

ram gopal compare savitri with mera naam joker

देश में ही नहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी हमने ऐसे विषयों पर आधारित फिल्में देखी हैं, जिन्होंने खूब वाहवाही लूटी। इटली की फिल्म मालेना, ऑस्कर विजेता फ्रेंच फिल्म सिनेमा पाराडिसो, अमेरिकन फिल्म समर ऑफ 42, थुरुपु पदामारा आदि फिल्मों में भी ऐसे ही विषय प्रस्तुत किए गए। इन  फिल्मों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ना केवल प्रशंसा लूटी बल्कि अकेडमी अवार्ड भी बटोरे।

अगर मेरा नाम जोकर की विषयवस्तु को लेकर आप कोई विवाद उत्पन्न नहीं करते तो मेरी फिल्म को लेकर ऐसा क्यों...? मैंने भी अपनी फिल्म में एक किशोर लड़के का मन दिखाया है, जो अपने से बड़ी एक महिला पर आसक्त है, वह उसे जवां, और खूबसूरत लगती है। वह उसे निहारता है। यह तो बहुत ही स्वाभाविक है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा करके मैने कुछ गलत किया है या कुछ गलत दिखाया है। मैं यह कहना चाहता हूं कि मैंने ऐसा करके कोई गुनाह नहीं किया है।

विज्ञापन

मेरे पोस्टर पर विवाद क्यों?

ram gopal compare savitri with mera naam joker

अब मैं सीधे पाइंट पर आता हूं। हाल ही में जब मैंने अपनी आगामी फिल्म ‘सावित्री’ के पोस्टर जारी किए तो कुछ संगठनों ने इसे लेकर बवाल मचा दिया। उसके बाद मैंने अपना पहला प्रेस नोट जारी किया तो फिर से इन संगठनों ने बिना उसे समझे-बूझे आंदोलन शुरू कर दिया है। इसलिए मैं उन गुमराह संगठनों को अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक और प्रेस नोट को जारी कर रहा हूं।

मैं उन्हें अपना पाइंट ऑफ व्यू यानी अपना रुख समझाना चाहता हूं। मैं एक बार फिर बताना चाहता हूं कि बचपन में मैं भी अपनी एक टीचर की ओर आकर्षित हुआ था। उनका नाम सरस्वती था। हाल ही में मैंने जब उन्हें अपनी यह बात बताई तो वे मुस्कुराईं क्योंकि वे इस इस सामान्य ज्ञान को समझती हैं कि किशोरावस्‍था में इस तरह से आकर्षित होने बहुत स्वभाविक है।

पोस्टर को गलत तरह से देखा गया

ram gopal compare savitri with mera naam joker

मनोवैज्ञानिक भी इसे सामान्य प्रक्रिया मानते हैं। और जब मेरी मैम को यह जानकर कोई प्रोब्लम नहीं है तो दूसरे लोगों को यह जानकर प्रोब्लम क्यों हो रही है?

मुझे लगता है कि लोग फिल्म की कहानी में अपनी ही कल्पनाएं जोड़ बैठे हैं और पोस्टर में जिस औरत को लड़का निहार रहा है, उसे वह एक शिक्षक के रूप में देख रहे हैं और यही बात उन्हें बर्दाश्त नहीं हो रही।

मैंने अपने पहले प्रेस नोट में यह साफ कर दिया था कि मेरा अपनी टीचर के प्रति मोह एक निजी अनुभव था और जिसे मैंने सिर्फ फिल्म के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने के लिए किया था। कुछ लोगों को मेरे शीर्षक ‘सावित्री’ पर आपत्ति है। उनका कहना है कि सावित्री नाम क्यों रखा क्योंकि शास्‍त्रों में उन्हें पतिव्रता माना गया है।

तो बाकी नामी वाली पतिव्रता नहीं?

ram gopal compare savitri with mera naam joker

इसका मलतब यह हुआ कि दूसरे नामों की महिलाएं पतिव्रता नहीं होतीं। मुझे उन लोगों की ऐसी संकीर्ण सोच पर शर्म आ रही है। हैदराबाद के बाल अधिकार संगठन ने मुझे इसलिए नोटिस भेजा है कि पोस्टर में एक महिला टीचर को मैंने दिखाया है।

मैं एक बार सबको स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मेरी इस फिल्म में ना तो किसी महिला टीचर की कहानी है और न ही पोस्टर में दिखाई जा रही महिला टीचर है। मेरी फिल्म में आज के दौर की जीवनशैली दिखाई गई है। मैं इन सभी लोगों को अंधा और दिमागहीन मानता हूं जो पोस्टर को देखकर ही उसे मुद्दा बना बैठे हैं और असली कहानी को जानने की धीरज उनमें नहीं है।

मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं अपने प्रचार के लिए ऐसे सस्ते हथकंडे नहीं अपनाता हूं और ना ही गंदे एवं सस्ते विषयों का छूता हूं। अंत में यही कहना चाहता हूं कि धीरज रखिए, फिल्‍म को पर्दे पर आने दीजिए और तब बतलाइगा कि उसमें क्या खराबी है। 

आपका
रामगोपाल वर्मा

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed