Rahul Dev: राहुल देव ने बताई साउथ फिल्मों के सुपरहिट होने की वजह, कहा- रियल लाइफ से अगल होते हैं एक्शन सीन्स
अभिनेता राहुल देव ने साउथ इंडस्ट्री और बॉलीवुड फिल्मों की तुलना करते हुए बताया है कि साउथ की फिल्में सुपरहिट क्यों होती हैं।
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अभिनेता राहुल देव बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री की फिल्मों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर चुके हैं। हाल ही में वह सारा अली खान की फिल्म 'गैसलाइट' में नजर आए, जिसे ओटीटी प्लेटफॉर्म हॉटस्टार पर रिलीज किया गया है। 'गैसलाइट' में राहुल देव की भूमिका और अदाकारी को दर्शकों ने सराहा। इस बीच अब हाल ही में दिए इंटरव्यू के दौरान राहुल ने साउथ और बॉलीवुड फिल्मों की तुलना की है।
अच्छे रोल की तलाश में राहुल
साउथ फिल्मों के बारे में बात करते हुए राहुल देव ने कहा कि साउथ की फिल्मों को 70 और 80 के दशक के तर्ज पर ही बनाया जा रहा है। इन फिल्मों में लगभग एक ही तरह की कहानियों पर बात की जाती है। उनके डायलॉग्स भी जीवन से बड़े होते हैं। ऐसी फिल्मों में एक्टर्स का एक्शन सीक्वेंस देखने में मजा आता है, जो रियल लाइफ से एकदम अलग होते हैं। साउथ इंडस्ट्री के पास कहानी सुनाने का एक तरीका है और लोग इसे समझते हैं। एक ही तरह की कहानी होने के बावजूद साउथ की फिल्में अच्छा प्रदर्शन करती हैं, क्योंकि फिल्म की कहानी इस तरह से बयां की जाती है कि दर्शक मोहित हो जाते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि मेरे पास भी ऐसे रोल आएंगे।
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बॉलीवुड में नहीं मिला मनचाहा रोल
इसके अलावा राहुल देव ने बॉलीवुड में अपने करियर के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में दमदार पर्सनालिटी और अच्छी एक्टिंग स्किल होने के बाद भी उन्हें अच्छे रोल नहीं मिले। बॉलीवुड ने उन्हें कम आंका और उन्हें अच्छी भूमिकाएं निभाने के लिए नहीं दीं। अभिनेता ने कहा कि उन्हें बॉलीवुड में और भी अच्छे रोल मिल सकते थे क्योंकि वह डिजर्व करते हैं।
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राहुल ने अपने अभिनय करियर के बारे में बात करते हुए कहा कि आज के दौर में स्किल के हिसाब से ओटीटी पर अच्छी फिल्में और वेब सीरीज बन रही हैं। मैं एक एजुकेटेड फैमिली से हूं और चीजों को समझता हूं तो जब भी मुझे ऐसी कोई फिल्में देखनी होती हैं तो मैं ऐसे में अपने दिमाग को साइड में रख देता हूं। रियल लाइफ और रील लाइफ के एक्शन सीन्स में जमीन आसमान का अंतर होता है, लेकिन लोग ऐसे कमर्शियल फिल्में देखना पसंद करते हैं। हम कौन हैं यह निर्णय लेने वाले कि क्या सही है और क्या गलत। क्रिएटिविटी का कोई दायरा नहीं होता। रचनात्मकता किसी भी तरह से व्यक्त की जा सकती है।
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