Prem Adib: आठ बार निभाया भगवान राम का किरदार, महात्मा गांधी भी उनकी फिल्म देखने से खुद को रोक न सके
Prem Adib: प्रेम अदीब का योगदान भारतीय सिनेमा में अतुलनीय है। भगवान राम के किरदार ने उन्हें न केवल पर्दे पर, बल्कि दर्शकों के दिलों में भी अमर बना दिया।
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प्रेम अदीब हिंदी सिनेमा के एक ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने अपने अभिनय से लोगों के दिलों में एक अलग छाप छोड़ी। उनका अभिनय इस कदर प्रभावशाली था कि उन्हें सिर्फ पर्दे पर नहीं, बल्कि असल जीवन में भी लोग पूजने लगे थे। भगवान राम का किरदार बड़े पर्दे पर निभाकर उन्होंने देखते ही देखते ऐसी लोकप्रियता हासिल कर ली कि लोग उनके पोस्टर घरों में लगाने लगे थे।
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प्रेम अदीब का जन्म 10 अगस्त 1916 को कश्मीर में हुआ था। फिल्मों में कदम रखने के उनके सपने ने उन्हें अभिनय की दुनिया में खींच लाया। हालांकि, इसके लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। प्रेम के घरवाले नहीं चाहते थे कि वह अभिनय की दुनिया में कदम रखे। इसी वजह से उन्होंने अपना घर ही छोड़ दिया। अभिनेता बनने के लिए उन्होंने कोलकाता से लेकर लाहौर तक काफी संघर्ष किया। अंत में वह मुंबई पहुंचे। यहां साल 1936 में उनकी किस्मत का सितारा चमका और उन्हें एक फिल्म रोमांटिक इंडिया मिल गई। इसके बाद वह धीरे-धीरे फिल्मों में छोटे-मोटे किरदारों में नजर आने लगे। 1938 में 'निराला हिंदुस्तानी' में उन्हें पहली बार मुख्य अभिनेता के रूप में फिल्म मिली, लेकिन 1940 के दशक में उनका करियर असल में चमका।
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साल 1942 में फिल्म भरत मिलाप में भगवान राम का किरदार निभाकर प्रेम अदीब ने अपनी पहचान बनाई। इसके बाद फिल्म राम राज्य (1943) में उन्होंने राम के रूप में जो भूमिका निभाई, उसने उन्हें एक स्टार बना दिया। इस फिल्म में उनके अभिनय को इतना पसंद किया गया कि लोगों ने उन्हें भगवान राम के रूप में पूजना शुरू कर दिया। घरों में उनके पोस्टर और कैलेंडर लगाए गए और लोग उनकी आरती उतारने लगे। उनकी यह छवि इतनी गहरी बैठी कि लोग उन्हें केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक धार्मिक प्रतीक मानने लगे थे।
फिल्म 'राम राज्य' की सफलता ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि यह फिल्म महात्मा गांधी ने देखी गई थी। उन्होंने प्रेम अदीब के अभिनय को सराहा भी था। यह फिल्म काफी ज्यादा सफल रही थी और 108 हफ्तों तक चली। यह एकमात्र फिल्म थी जिसे महात्मा गांधी ने देखा था।
प्रेम अदीब और शोभना समर्थ की जोड़ी को राम और सीता के रूप में दर्शकों ने बेहद पसंद किया। दोनों ने कुल 13 फिल्मों में एक साथ काम किया। इन फिल्मों में उनके अभिनय को शानदार प्रतिक्रियाएं मिली। प्रेम अदीब ने अपनी सफलता को भली-भांति समझा और 1950 के दशक में पौराणिक फिल्मों में लगातार काम करना जारी रखा। इस दौरान उन्होंने लगभग 28 फिल्मों में अभिनय किया, जो सभी पौराणिक विषयों पर आधारित थीं। उन्होंने कुल आठ बार भगवान राम का किरदार निभाया।
प्रेम अदीब का जीवन सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं था। वे एक गायक और निर्देशक भी थे। फिल्म इंडस्ट्री में उनका योगदान काफी महत्वपूर्ण था। उन्होंने 26 गाने भी गाए, जो दर्शकों को बहुत पसंद आए। हालांकि, 1959 में ब्रेन हेमरेज के कारण उनका निधन हो गया।