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ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज पर सख्ती, सरकार ने दिए दिशा निर्देश

Thu, 25 Feb 2021 02:42 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Thu, 25 Feb 2021 02:42 PM IST
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Prakash Javadekar Addressing a press conference on Digital Media Ethics Code OTT Guidelines
प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : ANI

ओटीटी प्लेटफॉर्म (ओवर द टॉप) पर दिखाई जाने वाली सामग्री को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने ओटीटी के लिए बनाए गए नियमों पर विस्तृत चर्चा की।

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प्रकाश जावड़ेकर ने कहा जिस तरह फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड हैं, टीवी के लिए अलग काउंसिल बना है उसी तरह ओटीटी के लिए भी नियम लाए जा रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने नए नियम लागू करने पर विचार किया है।
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ओटीटी प्लेटफॉर्म के पास किसी तरह का कोई बंधन नहीं है। इसलिए तमाम आपत्तिजनक सामाग्रियां बिना किसी रोक टोक के दिखाई जाती हैं। इसी के मद्दे नजर सरकार को ये लगता है कि सभी लोगों को कुछ नियमों का पालन करना होगा। 
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जावड़ेकर ने बताया, दोनों सदनों को मिलाकर ओटीटी पर 50 सवाल पूछे गए। दिल्ली चेन्नई और मुंबई से ओटीटी से संबंधित लोगों को बुलाकर इस मामले में खूब चर्चा हुई।पहली मीटिंग में सेल्फ रेगुलेशन पर बात हुई लेकिन इसपर किसी ने अमल नहीं किया दूसरी बार हुई मीटिंग में 100 दिनों का समय दिया गया। इसके बाद हमने तय किया कि एक ऐसा संस्थागत तंत्र होना चाहिए जो ओटीटी पर प्रसारित होने वाली सामाग्रियों पर नजर रख सके।
 

  • ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर दिशा-निर्देश कहते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीष या इस क्षेत्र के किसी विशेषज्ञ की अध्यक्षता में एक निकाय बनाया जाए। ये निकाय शिकायतों की सुनवाई करेगा और उन पर आए फैसले मानेगा। यह वैसे ही होगा जैसे टीवी पर गलत जानकारी प्रसारित होने पर चैनल खेद जताते हैं। ऐसा करने के लिए उनसे सरकार नहीं कहती है। 
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया को यह जानकारी देनी होगी कि उन्हें जानकारी कहां से मिलती है। इसके साथ ही शिकायतों को निपटाने के लिए एक व्यवस्था बनानी होगी। इसके तहत शिकायत का हल करने के लिए अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी, उसकी संपर्क जानकारी देनी होगी और तय समय में समस्या का समाधान करना होगा। अभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतों के हल के लिए बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को अपना कंटेंट पांच श्रेणियों में विभाजित करना होगा। ये पांच श्रेणियां U (सबके लिए), U/A 7+ (सात वर्ष के अधिक आयु वालों के लिए), U/A 13+ (13 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए), U/A 16+ (16 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए) और A (वयस्क) हैं। U/A 13+ से ऊपर की श्रेणी के लिए पैरेंटल लॉक की सुविधा देनी होगी, ताकि बच्चों को इससे दूर रखा जा सके और जो कंटेंट जिसके लिए उचित है वही उस कंटेंट को देख सके।
  • इसके साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिससे यह पता लगाया जा सके कि यूजर की उम्र वयस्क किसी श्रेणी का कंटेंट देखने लायक है या नहीं। दिशा-निर्देशों में इसके लिए सरकार ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से वेरिफिकेशन मैकेनिज्म तैयार करने के लिए कहा है। मतलब अगर किसी की आयु कम है और वह ऊपर की श्रेणी का कंटेंट देखना चाहता है, तो यह व्यवस्था बनने के बाद संभव नहीं होगा। अभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है।
 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भारत में व्यापार करें उनका स्वागत है, लेकिन यह भी सच है कि सोशल मीडिया पर अभद्रता भी परोसी जा रही है।

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