{"_id":"5bf6cc34bdec2241585f2e0f","slug":"movie-review-of-emraan-hashmi-film-tigers","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनहित में जारी: दहाड़ नहीं म्याऊं है इमरान हाशमी की ‘टाइगर्स’","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
जनहित में जारी: दहाड़ नहीं म्याऊं है इमरान हाशमी की ‘टाइगर्स’
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 22 Nov 2018 09:03 PM IST
विज्ञापन
Emraan Hashmi
- फोटो : social media
2001 में रिलीज़ हुई लगान तो याद होगी, शायद ये याद न हो कि ऑस्कर्स में विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के मुकाबले में नो मैन्स लैंड ने इसे हराकर खिताब जीत लिया था। इस फिल्म के निर्देशक डेनिस टेनोविक की फिल्म टाइगर्स ज़ी5 ओटीटी पर रिलीज़ हुई है। एक तरफ ऑस्कर और दूसरी तरफ चार साल से रिलीज़ का इंतज़ार करती एक फिल्म जो अंत में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो सकी।
दिक्कत ये नहीं है कि इमरान का बॉक्स ऑफिस पर सोलो हीरो के तौर रुतबा खत्म है या फिर एक पाकिस्तानी सेल्समैन की सच्ची कहानी पर बनी फिल्म को खरीदने वाले नहीं है। दिक्कत ये है कि ये फिल्म दर्शकों से जुड़ नहीं पाती। मल्टीनेशनल कंपनियों के मकड़जाल में उलझी इंसानियत के तार सुलझाती टाइगर्स की मेकिंग कमर्शियल सिनेमा जैसी है भी नहीं। नायक अयान दूध का पाउडर बनाने वाली बड़ी कंपनी में काम करता है और दुनिया को बताना चाहता है कि कैसे एक कंपनी का का लालच करोड़ों बच्चों की जान का दुश्मन बन गया है।
डेनिस टेनोविक ने जो कथ्य चुना है वह हीरो के दर्द से जुड़ने नहीं देता। कभी वकील तो कभी उस पर फिल्म बनाने वाले उसके दावों पर सवाल उठाते रहते हैं। वह कहता है कि मुझे समझने के लिए पहले मेरे परिवार को समझना होगा, लेकिन समझने को कोई तैयार नहीं है।
विज्ञापन
चार साल पहले हिंदी सिनेमा के टॉप 10 नायकों में शुमार रहे इमरान हाशमी की ये फिल्म अगर तब रिलीज होती तो विषय भी सामयिक रहता और कलाकारों का करिश्मा भी। कलाकार तो अपना काम कर गए लेकिन ऑस्कर जीतना आसान है, दर्शकों का दिल जीतना उतना आसान नहीं।
विज्ञापन
दिक्कत ये नहीं है कि इमरान का बॉक्स ऑफिस पर सोलो हीरो के तौर रुतबा खत्म है या फिर एक पाकिस्तानी सेल्समैन की सच्ची कहानी पर बनी फिल्म को खरीदने वाले नहीं है। दिक्कत ये है कि ये फिल्म दर्शकों से जुड़ नहीं पाती। मल्टीनेशनल कंपनियों के मकड़जाल में उलझी इंसानियत के तार सुलझाती टाइगर्स की मेकिंग कमर्शियल सिनेमा जैसी है भी नहीं। नायक अयान दूध का पाउडर बनाने वाली बड़ी कंपनी में काम करता है और दुनिया को बताना चाहता है कि कैसे एक कंपनी का का लालच करोड़ों बच्चों की जान का दुश्मन बन गया है।
विज्ञापन
डेनिस टेनोविक ने जो कथ्य चुना है वह हीरो के दर्द से जुड़ने नहीं देता। कभी वकील तो कभी उस पर फिल्म बनाने वाले उसके दावों पर सवाल उठाते रहते हैं। वह कहता है कि मुझे समझने के लिए पहले मेरे परिवार को समझना होगा, लेकिन समझने को कोई तैयार नहीं है।
विज्ञापन
चार साल पहले हिंदी सिनेमा के टॉप 10 नायकों में शुमार रहे इमरान हाशमी की ये फिल्म अगर तब रिलीज होती तो विषय भी सामयिक रहता और कलाकारों का करिश्मा भी। कलाकार तो अपना काम कर गए लेकिन ऑस्कर जीतना आसान है, दर्शकों का दिल जीतना उतना आसान नहीं।