{"_id":"e02eebe351a46370f1da0d6f27e329b6","slug":"more-than-one-hindi-films-create-against-rape","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेप के खिलाफ बन रहीं हैं हिंदी में कई फिल्में","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
रेप के खिलाफ बन रहीं हैं हिंदी में कई फिल्में
अमर उजाला मुंबई/ब्यूरो
Updated Fri, 07 Mar 2014 04:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलात्कार की घटनाओं के खिलाफ बॉलीवुड उठ खड़ा हुआ है। इसका असर फिल्मों में भी दिखने जा रहा है।
विज्ञापन
महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को लेकर बॉलीवुड कितना सीरियस है इसका अंदाजा यूं लगाया जा सकता है कि इस मुद्दे पर जल्द ही एक के बाद एक फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। लेखक-निर्देशक संजय छैल ‘किल द रेपिस्ट’ नाम की फिल्म लेकर आ रहे हैं। ये ऐसी लड़की की कहानी है जो रेपिस्ट से बदला लेने के लिए उसे मारने की कोशिशों में जुटी है।
नवोदित फिल्मकार तरुण चोपड़ा भी रेप के मुद्दे पर फिल्म बना रहे हैं। फिल्म का नाम है ‘डब्ल्यू’। यह रेप की शिकार तीन आधुनिक युवतियों के संघर्ष की कहानी है। फिल्म अगले शुक्रवार को रिलीज के लिए तैयार है।
विज्ञापन
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हो चुके फिल्म निर्माता और निर्देशक पैन नलिन की आने वाली फिल्म का नाम है ‘एंग्री इंडियन गॉडेसेज’। इसमें सारा जेन डियाज, संध्या मृदुल और अनुष्का मनचंदा जैसी मंजे हुई अभिनेत्रियां हैं। इस फिल्म की कहानी सात महिलाओं के इर्द गिर्द घूमती है। पैन नलिन के अनुसार ‘ये फिल्म पुरजोर तरीके से महिलाओं के मुद्दों की बात करती है साथ ही उनसे सकारात्मक तरीके से पेश आती है।’
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि पहले भी बॉलीवुड ने बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के खिलाफ आवाज बुलंद की है। निर्देशक राजकुमार संतोषी की फिल्म ‘दामिनी’ (1993) ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी।
साल 2000 में आई जग मूंदड़ा की फिल्म ‘बवंडर’ को भी दर्शकों-समीक्षकों ने खासा सराहा था। इस फिल्म में नंदिता दास ने बलात्कार पीड़िता भंवरी देवी का किरदार निभाया था।
ऐश्वर्या राय ने निर्देशक सतीश कौशिक की फिल्म ‘हमारा दिल आपके पास है’ में एक रेप पीड़िता का अभिनय किया था। मशहूर निर्माता निर्देशक बी.आर.चोपड़ा की फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ (1980) भी इस विषय पर बनने वाली चर्चित फिल्मों में से एक है।