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बाजीराव मस्तानीः जिन खूबियों पर मिले अवार्ड, उन्हीं में रह गईं खामियां

Sat, 16 Jan 2016 07:20 PM IST
Updated Sat, 16 Jan 2016 07:20 PM IST
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Mistakes in Bajirao Mastani

फिल्मफेयर अवार्ड 2016 में फिल्म बाजीराव मस्तानी को आठ श्रेणियों में अवार्ड मिले। लेकिन ‌इस फिल्म में आठ से ज्यादा खामियां हैं। बाजीराव मस्तानी को लेकर पहला अवार्ड रणवीर ‌सिंह को मिला है, मुख्य भूमिका में सबसे उम्दा अभिनय के लिए। लेकिन फिल्म में वह कई मौकों पर बाजीराव पेशवा श्रीमंत बाजीराव बल्लाल भट होने के बजाय रणवीर ‌सिंह ही दिखते हैं। रणवीर सिंह अपने निराले अंदाज में बैठते-उठते, बात करते और डांस करते नजर आते हैं।

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वह ज्यादातर दृश्यों में रंगीन मिजाज प्रेमी की तरह दिखे हैं और पेशवा वाली बात अपने भीतर नहीं ला पाए हैं। रणवीर बैंड बाजा बारात, लेडीज वर्सेज रिक्की बहल, गोलियों की रासलीलाः राम-लीला, गुंडे और किल दिल जैसी फिल्मों के अपने रोमांटिक किरदारों से बाहर नहीं आ पाए हैं। बोलने का अंदाज बदला है, ले‌किन संवाद अदायगी पुरानी फिल्मों की तरह ही है।
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उल्लेखनीय है कि हिंदुस्तान के मुगलकालीन वर्चस्व वाले इतिहास में मराठों के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पेशवा श्रीमंत बाजीराव बल्लाल भट (1700 से 1740) ने अपने जीवनकाल में 40 से अधिक युद्ध लड़े और एक भी नहीं हारा। रणवीर सिंह एक ऐसे सूरमा के किरदार में रंगीन ‌मिजाजी वाले पक्ष पर अधिक आश्रित नजर आते हैं।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूम‌ि पर बनी फिल्म आशुतोष गोवारिकर की जोधा-अकबर अगर आपको याद हो, तो उसमें मुख्य भूमिका में रितिक रोशन थे। रितिक इडंस्ट्री में उम्दा डांस करने वाले अभिनेताओं में एक हैं। इसके बावजूद पूरी फिल्म में आशुतोष इस प्रलोभन से बचते हैं। रितिक के चलने, उठने, बैठने का अंदाज, कहीं नहीं लगता वह रितिक रोशन हैं, वह हर सीन में जलालुद्दीन अकबर ही दिखते हैं।

हर मोड़ पर किरदारों को स्‍थापित करने में जूझती नजर आती है फिल्म

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बाजीराव मस्तानी को दूसरा अवार्ड मिला है, सर्वश्रेष्ठ फिल्म का। जबकि पूरी फिल्म अपने किरदारों को स्‍थापित करने के लिए जूझती नजर आती है। निर्देशक बार-बार जताने की कोशिश करते हैं, रणवीर सिंह एक योद्धा हैं। लेकिन वो योद्धा नजर नहीं आते। दीपिका को प्यार की प्रतिमूर्ति दिखाया गया है, जो अपना राजपाट छोड़कर बाजीराव के पास आ जाती है।

लेकिन दीपिका के किरदार में कहीं ये प्यार नजर नहीं आता। दीपिका हमेशा यह जताने की कोशिश करते नजर आती हैं कि उन्हें बाजीराव से बहुत प्यार है। लेकिन फिल्म को देखते वक्त किसी दृश्य में दीपिका का ये प्यार दर्शकों को जोड़ नहीं पाता। प्रियंका ने अपने किरदार में पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन फिल्म में बार-बार उन्हें दीपिका के किरदार से कमतर दिखाने की कोशिश की गई है।

दीपिका को मजबूत दिखाने की कोशिश की गई तो वह पूरी फिल्‍म में कमजोर-कमजोर दिखती हैं। वहीं, प्रियंका को कमजोर दिखाने की कोशिश की गई है, वो वह हर दृश्य में दीपिका पर भारी पड़ती हैं। जबकि असल जिंदगी में 'पेशविन बाई' मानसिक तौर पर बेहद कमजोर थीं।

युद्ध के दृश्य फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी हैं। संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्‍म के लिए जो कहानी चुनी थी, युद्ध के दृश्य उसकी खूबी बन सकते थे। फिल्म का सबसे बड़ा युद्ध का दृश्य शुरुआती लम्हों में दिखाया जाता है, जब‌ मस्तानी के अनुग्रह पर बाजीराव उसका राज्य बचाने जाते हैं। इस दौरान दो सेनाओं के टकाराने के दृश्य को कुछ सेकेंड के शॉट में समेटा गया है। जरा याद करिए कोई ऐसी फिल्म जहां दो सेनाएं टकराती हैं, बाहुबली।

निर्देशन में है चूक, मिला बेस्ट निर्देशन का अवार्ड

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संजय लीला भंसाली को फिल्म के निर्देशन के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड मिला है। यहां एक मिनट के लिए आप संजय लीला भंसाली की फिल्मों को याद करिए, 'खामोशी', 'हम दिल दे चुके सनम', 'देवदास', 'गुजारिश', 'ब्लैक', 'राम लीला'। इन सब में साफ दिखता है, भंसाली ने अपने फिल्म बनाने का अंदाज विकसित किया है।

फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भले अच्छा कमाई की हो, पर वो इसमें अपनी पुरानी बाध्यताओं को तोड़ नहीं पाते। फिल्‍म की पटकथा, दृश्यों के संयोजन से ज्यादा उनका ध्यान सेट सजाने में लगा रहता है। फिल्म में वह अपने ही पुराने दृश्यों की नकल उतारते भी पकड़े जाते हैं।

एक सूरमा को फिल्‍म के क्लाइमेक्स में पारिवारिक स्थितियों से हारकर मानसिक तौर पर विक्षिप्त होते दिखाया जाता है। वह एक नदी में दुश्मन के भ्रम में अकेले तलावार भांजते मर जाता है।

जबकि इससे ठीक पहले एक युद्ध के सीन में मुख्य किरदार करीब 600 से ज्यादा तीर-तलवार धारी सेना जो लगातार उसपर तीर से हमला कर रही, उसे अकेले मार डालता है। यह दृश्य भी कुछ सेकेंड में खत्म कर देते हैं। भंसाली की एक सच्ची घटना पर बनाई गई फिल्‍म में आपको कल्पना बहुत ज्यादा दिखती है।

कमजोर एक्‍शन वाली फिल्म को बेस्ट एक्‍शन अवार्ड

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फिल्‍मफेयर ने बाजीराव मस्तानी में एक्‍शन तैयार करने वाले शाम कौशल को सर्वश्रेष्ठ एक्‍शन ‌निर्देशक चुना गया। जबकि फिल्म देखते वक्त एक-आध एक्‍शन दृश्यों को छोड़ दें, जिनमें दीपिका तलवार भांजते दिखती हैं, तो रणवीर के सभी एक्‍शन दृश्यों में सतहीपन दिखता है।

वह किसी एक्‍शन दृश्य में नहीं फबे हैं। रणवीर सिंह की चंचलता और आत्मविश्वास उन्हें फिल्‍म में बनाए रखता है, वरना ए‌क्शन दृश्यों में उनकी कमजोरियां फिल्म सहायक अभिनेता की सी बना देती हैं। इसके अलावा फिल्म में मिलिंद सोमण, महेश मांजरेकर, आदित्य पंचोली जैसे अभिनेताओं के होने के बावजूद किसी एक्‍शन दृश्य में उन्हें शामिल न करना खलता है।

‌फिल्म के प्रोडक्‍शन डिजाइन के लिए सुजीत सावंत, श्रीराम अयंगर और सलोनी धत्रक को अवार्ड दिया गया। जबकि शूटिंग के दौरान कई बार खबरें आईं, जब रणवीर को अनायस बाल छिलाने पड़े। शूटिंग के दौरान कई बार प्रियंका को परेशानियां उठानी पड़ीं। फिल्म रिलीज से पहले शुरुआत में कुछ कैरीकेचर वाले वीडियो जारी किए थे, जिनमें बाजीराव बातचीत में अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग करते सुने जा रहे थे।

इसके अलावा फिल्म को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री, सर्वश्रेष्ठ पाश्वर्व गायन महिला, सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइन, बेस्ट प्रोडक्‍शन डिजाइन का अवार्ड दिया गया। प्रियंका चोपड़ा ने वास्तव में फिल्म में बेहतरीन अभिनय किया था। वह उसकी हकदार थीं। दिवानी मस्तानी गाने को श्रेया ने बेहद मन से गाया था। साल में आई अन्य फिल्मों में बाहुबली (बाहुबली) के अलावा पहनावे-ओढावे पर भी इसी फिल्म में मेहनत की गई थी। ऐसे में अनुज मोदी और मैक्सिम बासू को दिया गया सर्वश्रेष्ठ कास्ट्यूम अवार्ड भी जायज लगता है।

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