चलिए ढंग से मिलते हैं खलनायक प्रेम चोपड़ा से
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प्रेम चोपड़ा को चाहने वाले न देश में कम हैं न विदेश में। बावजूद इसके कि उन्होंने फिल्मों में ऐसी विलेनगिरी की है कि देखने वाले नफरत करने लगते थे। प्रेम चोपड़ा की बेटी रिकिता नंदा ने पिता की जीवनी उन्हीं की जुबानी लिखी है।
किताब नाम इससे बेहतर हो भी क्या सकता था... प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा। इस किताब में प्रेम चोपड़ा से जुड़े दिलचस्प किस्से हैं। ऐसे किस्से जिनसे अभी तक आप नावाकिफ रहे होंगे।
कहां से आया किताब का आइडिया
बेटी रिशा के जन्म के बाद मेरी जिंदगी बदल गई थी। घर से बाहर जाना और काम करना बंद हो गया था। तब मेरे पति राहुल हिमांशु नंदा ने आइडिया दिया कि क्यों नहीं तुम अपने पिता की जीवनी लिखती हो। हिंदी सिनेमा सौ साल का जश्न मना रहा है और इसमें पिता पचास साल से भी ज्यादा समय तक फिल्म इंडस्ट्री में रहे हैं।
मुझे लगा कि पिताजी की सिनेमाई यात्रा को लिखने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। जिससे भी मैंने किताब के आइडिया पर बात की उसे यह बहुत पसंद आया। मुझे किताब लिखने में मां से सर्वाधिक मदद मिली क्योंकि उन्होंने शादी के बाद से पिता पर जो कुछ भी अखबारों और पत्रिकाओं में लिखा गया, उसकी कतरनें संभाल कर रखी थीं। फिर मैंने पिताजी की एक-एक फिल्म देखी।
हम तीन बहनें हैं और किसी ने भी फिल्मों का रुख नहीं किया। हम घर में बहुत खुश थीं। हमारी मां बहुत अनुशासनप्रिय थीं और उन्होंने हमारी पढ़ाई-लिखाई का बहुत खयाल रखा। पिताजी भी परिवार पर पूरा ध्यान और समय देते थे। वह हमें छुट्टियों में घूमने ले जाते थे। फिल्म इंडस्ट्री में होने पर भी उनके पैर सदा जमीन पर रहे। फिल्म इंडस्ट्री में भी इसीलिए उन्हें सभी प्यार करते हैं।
बच्चे मांगते थे ऑटोग्राफ
स्कूल के दिनों में हमें तब यह एहसास हुआ कि पिताजी की बहुत शोहरत है जब दूसरे बच्चे हमें ऑटोग्राफ बुक देकर पिताजी के ऑटोग्राफ मंगाते थे। मुझे याद है कि जब हम तीनों बहनें पिताजी को पर्दे पर पिटते देखती थीं तो रोने लगती थीं।
जब मैं थोड़ी बड़ी हुई तो मैंने पिताजी से कहा था कि आप कुछ अच्छा काम क्यों नहीं करते, जैसे ‘टैक्सी चलाना’। उनके बुरे आदमी के किरदार मुझे खराब लगते थे। वे पर्दे पर हमेशा हीरोइनों से बुरे ढंग से पेश आते थे। आखिर एक दिन मुझे शूटिंग दिखाने ले जाया गया और मां ने बताया कि यह सिर्फ एक ड्रामा है।
नहीं रहा है कोई अफेयर
मुझे याद है कि वह बहुत ही जिंदादिल इंसान थे। उनकी सबसे दोस्ती थी। वह हर किसी के साथ काम करते थे। उन्होंने अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, राकेश रोशन, शम्मी अंकल और शशि अंकल से लेकर देव आनंद, मनोज कुमार और दिलीप कुमार के साथ खूब काम किया। जितेंद्र, ऋषि कपूर और स्वर्यी सुजीत कुमार उनके अच्छे दोस्त थे। उनसे दोस्त त्यौहारों के मौके पर घर आते थे। उनकी दोस्ती आज तक चली आ रही है।
सभी ने की है अच्छी बातें
न ही उनका किसी तरह की खेमेबाजी में भरोसा था। उन्होंने कहा कि फिल्मी दुनिया में प्रेम चोपड़ा सबसे ज्यादा लोगों के द्वारा चाहे जाने वाले इंसान थे। वह सबके फेवरेट थे और उनका स्वभाव इतना अच्छा था कि हर व्यक्ति उनके साथ काम करना चाहता था। प्रेम चोपड़ा हमेशा अपनी शर्तों पर काम करते थे, लेकिन उनके नखरे नहीं थे।
सबने निभाई दोस्ती
इसके अलावा राकेश ओम प्रकाश मेहरा, विधु विनोद चोपड़ा, अक्षय कुमार और प्रेम चोपड़ा के दामाद शरमन जोशी शामिल थे। वैसे आश्चर्य की बात यह थी कि बीती जमाने की कोई हीरोइन इस कार्यक्रम में नहीं आई। क्या उन पर अब भी प्रेम चोपड़ा की खलनायकी का खौफ है।