Amar Ujala Samwad: अमर उजाला के 'संवाद' में शिरकत करेंगे मनोज मुंतशिर, कलम से फिल्म इंडस्ट्री में बनाई पहचान
Manoj Muntashir to Attend Amar Ujala Samwad: अमर उजाला का 'संवाद' कार्यक्रम 17 और 18 अप्रैल को लखनऊ में गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होगा। इसमें मशहूर लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर भी शिरकत करेंगे।
विस्तार
मशहूर गीतकार, कवि और लेखक मनोज मुंतशिर हिंदी सिनेमा और साहित्य जगत में अपनी अनूठी छाप छोड़ चुके हैं। उनकी कलम से निकले गीत, संवाद और कविताएं न केवल लोगों के दिलों को छूती हैं, बल्कि समाज में गहरी प्रेरणा भी देती हैं। ‘तेरी मिट्टी’, ‘गलियां’ जैसे गीतों से लेकर दमदार संवाद और पटकथाओं तक, उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें मनोरंजन उद्योग में अलग पहचान दिलाई है। जल्द ही मनोज मुंतशिर अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शिरकत करने वाले हैं, जहां वह कई मुद्दों पर अपनी राय साझा करेंगे। इस कार्यक्रम से पहले आइए उनके बारे में कुछ खास बातें जान लेते हैं।
मनोज मुंतशिर का जन्म 27 फरवरी 1976 को उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम शिवप्रताप शुक्ला और मां का नाम प्रेमा शुक्ला है। मनोज अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उनकी पत्नी का नाम नीलम मुंतशिर है। वह एक लेखिका हैं। उनका एक बेटा भी है, जिसका नाम आरू है। बचपन से ही मनोज को साहित्य और कविताओं का शौक था।
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मनोज की जिंदगी में एक रोचक मोड़ तब आया जब उन्होंने अपने नाम में 'मुंतशिर' जोड़ा। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि 1997 की एक सर्द रात में वह गौरीगंज के एक चाय की टपरी पर थे, जहां रेडियो पर एक मुशायरे में 'मुंतशिर' शब्द सुना। इस शब्द का अर्थ है 'बिखरा हुआ'। उन्हें यह शब्द इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे अपने नाम का हिस्सा बना लिया। हालांकि, इस बदलाव से उनके पिता काफी नाराज हुए, क्योंकि उन्हें लगा कि मनोज ने धर्म परिवर्तन कर लिया है। बाद में यह गलतफहमी दूर हुई और वह 'मनोज मुंतशिर' के नाम से पहचाने जाने लगे।
मनोज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गौरीगंज के एक कॉन्वेंट स्कूल और अमेठी के एचएएल स्कूल, कोरवा में पूरी की। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद से विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान भी वह साहित्य और लेखन की ओर आकर्षित रहे। उन्होंने उर्दू सीखने के लिए खास मेहनत की। एक बार जब उन्हें गालिब की शायरी समझने में दिक्कत हुई तो उन्होंने मस्जिद के पास से दो रुपये में एक पुरानी उर्दू किताब खरीदी और उससे उर्दू सीखी।
1999 में स्नातक पूरा करने के बाद मनोज अपने सपनों को साकार करने के लिए मुंबई पहुंचे। उनके पास उस वक्त केवल 700 रुपये थे, जो उनके पिता ने उन्हें दिए थे। मुंबई में शुरुआती दिन बेहद मुश्किल थे। कई बार उन्हें फुटपाथ पर रातें गुजारनी पड़ीं और आर्थिक तंगी के कारण भूखे भी रहना पड़ा।
मनोज को पहला बड़ा मौका 1999 में भजन सम्राट अनूप जलोटा से मिला, जिनके लिए उन्होंने एक भजन लिखा और इसके लिए 3000 रुपये का चेक प्राप्त किया। यह रकम उनके लिए उस समय किसी खजाने से कम नहीं थी। इसके बाद 2005 में उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया, जब उन्हें टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के लिए लेखन का अवसर मिला। इस शो ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।
मनोज मुंतशिर ने अपने भावपूर्ण गीतों से हिंदी सिनेमा में खास पहचान बनाई है। उनके लिखे गाने ‘तेरी मिट्टी’ (केसरी), ‘गलियां’ (एक विलेन), ‘तेरे संग यारा’ (रुस्तम), ‘कौन तुझे’ (एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी) और ‘फिर भी तुमको चाहूंगा’ (हाफ गर्लफ्रेंड) ने दर्शकों के दिलों को छुआ और हर तरफ तारीफ बटोरी। इन गीतों की गहराई और सादगी ने मनोज को इंडस्ट्री के सबसे पसंदीदा गीतकारों में से एक बना दिया।
बाहुबली: द बिगिनिंग और बाहुबली: द कन्क्लूजन (हिंदी डबिंग) के संवाद मनोज ने ही लिखे है, जो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। खास तौर पर "औरत पर अंगुली उठाने वाले की अंगुली ही नहीं काटी जाती, काटा जाता है उसका गला" जैसे संवाद आज भी याद किए जाते हैं। उन्होंने 'आदिपुरुष 'के सवांद भी लिखे थे।
मनोज ने इंडिया गॉट टैलेंट और इंडियन आइडल जूनियर जैसे रियलिटी शोज के लिए स्क्रिप्ट लिखी। 2019 में उनकी पहली किताब 'मेरी फितरत है मस्ताना' प्रकाशित हुई, जो उनकी कविताओं का संग्रह है। मनोज मुंतशिर ने अपने शानदार काम से कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड अपने नाम किए हैं। उन्होंने 2014 में ‘इंडियाज गॉट टैलेंट’ के लिए बेस्ट स्क्रिप्ट का अवॉर्ड जीता। इसके अलावा 2015 में ‘गलियां’ (एक विलेन) के लिए उन्होंने आईफा और स्टार गिल्ड जैसे पुरस्कार अपने नाम किए। 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती और उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान से नवाजा। साल 2022 में फिल्म ‘साइना’ के लिए उन्हें 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ गीतकार का अवॉर्ड मिला।