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महेश भट्ट बोले, 'फिल्मों में बोल्ड सीन तो हमारी मजबूरी बन गए हैं'

Thu, 17 Sep 2015 08:35 AM IST
Updated Thu, 17 Sep 2015 08:35 AM IST
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Mahesh Bhatt talks about Bold Scenes in films

सारांश, नाम और जख्म जैसी संवेदनशील फिल्में बना चुके महेश भट्ट मानते हैं कि भारत में वही फिल्में चलती हैं जिनका विषय कुछ 'विवादित' होता है। निर्माता निर्देशक सुभाष घई के द्वारा आयोजित एक फिल्म फेस्टिवल में आए महेश भट्ट ने मीडिया से हुई बातचीत में अपनी राय रखी।

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महेश भट्ट से जब यह पूछा गया कि फिल्मों के निर्माण के दौरान कैसी विषयवस्तु चुनी जाए तो वो मुस्कुरा उठे। महेश ने कहा, 'फिल्में वो चुनो जिनपर किसी को आपत्ति हो या जिन विषयों पर मनाही हो, आप देखना वो फिल्में कमाल करती हैं.'
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बॉक्स ऑफिस पर हिट का फॉर्मूला तलाशते आजकल के निर्माताओं को ध्यान में रखते हुए महेश कहते हैं, 'जैसी फिल्में बनाने के लिए जनता या सरकार कहती है, उन्हें कोई देखता नहीं और जिन विषयों पर सबसे ज्यादा हाय-तौबा होती है वो फिल्में देखी भी सबसे ज्यादा जाती हैं।'
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जब मीडिया ने जोर देकर ऐसी फिल्मों के नाम बताने के लिए कहा तो उन्होनें अपनी ही फिल्मों के उदाहरण दिए।

अच्छी फिल्म कम कमाती है

Mahesh Bhatt talks about Bold Scenes in films

महेश भट्ट ने कहा, 'पिछले साल 2014 में रिलीज हुई राजकुमार राव अभिनीत फिल्म 'सिटी लाईट्स', जो हमारे हिसाब से एक बेहतरीन फिल्म थी, बॉक्स ऑफिस पर कुल 8.5 करोड़ ही कमा सकी। वहीं सनी लियोनी की 'जिस्म 2' ने पहले दिन ही 9 करोड़ रुपए कमाए।'

महेश भट्ट इसके अलावा मर्डर जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि जब दर्शक ही इस तरह की फिल्में पसंद करते हैं तो निर्माता होने के तौर पर मैं क्यूं ना ऐसी ही फिल्मों में निवेश करुं? महेश भट्ट ने खुलकर बोल्ड सीन और इंटीमेट सीन पर अपनी राय रखी।

कला को राजनीति से मिलाना ठीक नहीं

पिछले तीन महीने से पुणे में गजेंद्र चौहान की एफटीआईआई के अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति के बाद सरकार और छात्रों के बीच चल रहे घमासान पर महेश भट्ट पहले भी अपनी राय रख चुके हैं।

महेश ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'सरकार को छात्रों की बात पर ध्यान देना चाहिए, कला को राजनीति से मिलाना ठीक नहीं।' महेश का मानना है कि एफटीआईआई एक कला का मंदिर है और कला की जगह पर ब्यूरोक्रैट्स का कोई काम नहीं है, ये मुद्दा काफी पहले सुलझाया जा सकता था।

इस समारोह में कुछ देर के लिए मौजूद रहे फरहान ने भी एफटीआईआई के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा, 'अगर छात्र इतना जोर दे रहे हैं और वो भी किसी एक मुद्दे पर तो सरकार को उनकी बात को सुननी चाहिए।'

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