KIFF 2021: एमपी में सब्सिडी के लिए अब 70 फीसदी स्थानीय कलाकार जरूरी, खजुराहो फिल्म फेस्टिवल के विरोध का असर
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मध्य प्रदेश के खजुराहो में हर साल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के नाम पर होने वाली कथित बंदरबांट इस साल राज्य सरकार के गले की फांस बन गई है। फेस्टिवल का स्थानीय स्तर पर इस बार जमकर विरोध हुआ और इसी विरोध का असर है कि राज्य सरकार को प्रदेश में नई फिल्म नीति लागू करने का एलान करना पड़ा है। सरकार ने ये भी तय किया है कि प्रदेश में बनने वाली सिर्फ उन्हीं फिल्मों को अब आर्थिक सहायता दी जाएगी जिनमें कम से कम 70 फीसदी कलाकार राज्य के होंगे। यही नहीं जल्द ही मध्य प्रदेश में बिना इजाजत के कहीं भी शुरू हो जाने वाली शूटिंग पर भी रोक लगने जा रही है। राज्य में किसी भी तरह की शूटिंग से पहले अब संबंधित जिलाधिकारी की अनुमति लेना जरूरी होगा।
5 दिसंबर से शुरू हुए खजुराहो इंटनेशनल फिल्म फेस्टिवल को आइफा फिल्म फेस्टिवल जैसा भव्य बनाने की तमाम कोशिशें इसके आयोजकों की इस साल तब धरी की धरी रह गईं जब इसके उद्घाटन के लिए गोविंदा को छोड़कर दूसरा कोई सितारा इसके आयोजक नहीं जुटा सके। यही नहीं इस बार इसका स्थानीय स्तर पर भी जमकर विरोध हुआ। छतरपुर के कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह को इस बारे में एक लिखित शिकायत भी मिली जिसके मुताबिक ये आयोजन सिर्फ कुछ लोग अपना नाम चमकाने के लिए करते हैं और इसमें बुंदेलखंड के स्थानीय कलाकारों की जमकर उपेक्षा की जाती है। इन लोगों की शिकायत ये भी रही कि बुंदेलखंड से मुंबई आकर यहां नाम कमाने वाले स्थानीय कलाकारों को इस फेस्टिवल में जानबूझकर नहीं बुलाया जाता है।
इन लोगों ने आरोप ये भी लगाया कि खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के आयोजक जानबूझकर मुख्यधारा के पत्रकारों को इससे दूर रखते हैं ताकि उनकी गड़बड़ियां सामने न आ सकें। लेकिन, इस बार छतरपुर के कलेक्टर ने पूरे मामले की छानबीन करने का फैसला किया है और इस बारे में अपनी रिपोर्ट शासन को भी भेजी है। इसी का नतीजा रहा कि जब राज्य के पर्यटन और राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत इस फेस्टिवल में आए तो उन्होंने स्थानीय कलाकारों का असंतोष दूर करने की पूरी कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक राजपूत ने ही राज्य में प्रस्तावित नई फिल्म नीति की जानकारी दी और ये भी बताया कि अब से सिर्फ उन्हीं फिल्मों को मध्य प्रदेश सरकार आर्थिक सहायता देगी जिनमें कम से कम 70 फीसदी कलाकार राज्य के होंगे।
मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में हिंदी की फिल्में और वेब सीरीज खूब शूट होती रही हैं। स्थानीय कलाकारों व संगठनों का आरोप है कि इस तरह के फिल्म निर्माण में प्राकृतिक संपदाओं का बेतरतीब दोहन होता है और इस दौरान स्थानीय संस्कृति व परंपराओं का भी ध्यान नहीं रखा जाता। निर्माता निर्देशक प्रकाश झा को भी इसी के चलते अपनी वेब सीरीज ‘आश्रम’ के अगले सीजन की शूटिंग के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा था। बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद ही वह अपनी शूटिंग प्रदेश की राजधानी भोपाल में पूरी कर पाए थे।
मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार ने पर्यटन विभाग, गृह विभाग और राजस्व विभागों को प्रदेश की नई फिल्म नीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है और इसका नोडल विभाग पर्यटन विभाग को ही बनाया है। इस नई नीति का मसौदा बनकर तैयार हो चुका है और इसे शासन को भेजा भी जा चुका है। इसके नए साल से लागू होने की उम्मीद स्थानीय कलाकार जता रहे हैं। नई नीति में स्थानीय कलाकारों की सहभागिता सुनिश्चित करने के अलावा ये भी शर्त लगाई गई है कि प्रदेश में शूटिंग के लिए अब फिल्मकारों को स्थानीय प्रशासन से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी होगी। खजुराहो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन के दिन भी स्थानीय कलाकारों ने इसका जमकर विरोध किया और इसकी सूचना मिलने के बाद से ही राज्य सरकार इस दिशा में सक्रिय हो गई थी।