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फीका रहा हफ्ता, पिट गईं कई फिल्में
- अनुराधा गोयल
Updated Sat, 20 Oct 2012 04:36 PM IST
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'बर्फी' की सफलता से ऐसा लग रहा था कि ऑफबीट फिल्मों का यह सबसे अच्छा समय चल रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से लगभ्गा एक दर्जन फिल्मों की असफलता इस फ्लो को बनाए रखने में नाकामयाब रही है।
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'अय्या' जैसी फिल्मों की खराब ओपनिंग एक निराशाजनक माहौल बनाती है। हालांकि ऐसा माना जाता है कि महिला प्रधान फिल्में धीमी शुरुआत के बाद गति पकड़ती हैं।
'अय्या'
चार्ट बस्टर सान्ग्स और अच्छे प्रोमोज की वजह से 'अय्या' को पचास फीसदी की ओपनिंग की उम्मीद थी, लेकिन यह 25 फीसदी के पार नहीं जा सकी। रानी मुखर्जी अभिनीत इस फिल्म ने शुरुआती सप्ताह में लगभग 5 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया, जो कोई सकारात्मक संकेत नहीं देता।
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'भूत रिर्टन्स'
'भूत रिर्टन्स' ने लगभग 3.75 करोड़ रुपए कलेक्ट किये। जबकि इस फिल्म के कंटेंट को काफी सराहा गया था लेकिन आलोचकों का मिला-जुला रिस्पांस था। वैसे कम बजट में बनी इस फिल्म में घाटा भी कम से कम ही रहा।
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'मक्खी'
एक बेहतरीन फिल्म होने के बावजूद 'मक्खी' को भी बॉक्स ऑफिस पर कोई सफलता नहीं मिली। अपनी ओपनिंग में यह फिल्म लगभग 2.06 करोड़ रुपए का ही कलेक्शन कर सकी। इसकी असफलता की वजह जल्दबाजी में इस फिल्म को रिलीज करना रहा।
ये तीनों फिल्में तकरीबन 10 करोड़ रुपए का कलेक्शन करने में सफल रहीं। अन्य फिल्में दस फीसदी कलेक्शन भी नहीं कर पायीं।
कई को थिएटर भी नसीब नहीं
'चिट्टगांव', 'लॉगिन', 'अता पता लापता', 'प्रेम मयी' और 'इन दि नेम ऑफ ताई' ठीक ढंग से रिलीज भी नहीं हो पाई। यानी इन्हें बिग फ्लॉप करार दे दिया गया है। 'चिट्टगांव' प्रीमियम मल्टीप्लेक्सेस में केवल एक या दो शो के लिए रिलीज हुई। 'प्रेम मयी' और 'न दिन नेम ऑफ ताई' के निर्माताओं को थियेटर तक नसीब नहीं हुआ।
'मक्खी' फिल्म के लिए किसी को भी बुरा लग सकता है। जिन लोगों ने यह फिल्म देखी उन्होंने भी इसके अच्छे बिजनेस की उम्मीद नहीं जताई। फिर भी हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि इस फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स आने वाले समय में इस फिल्म का प्रदर्शन जारी रखेंगे। हो सकता है यह फिल्म व्यवसायिक रूप से कुछ सफलता अर्जित कर ले।
हालांकि ट्रेड एलालिस्ट का मानना है कि इन सभी फिल्मों के फ्लॉप होने का सबसे बड़ा कारण इनका बल्क में रिलीज होना माना जा रहा है।