अमिताभ बच्चन: टीवी पर सबको बना रहे 'करोड़पति', खुद कैसे बने परदे के शहंशाह?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बॉलीवुड में करीब 50 साल पूरे कर चुके अमिताभ बच्चन का जलवा आज भी बड़े परदे पर भी कायम है और छोटे परदे पर भी। बड़े परदे पर जहां वे 'गुलाबो सिताबो' की शूटिंग में व्यस्त हैं। वहीं हाल ही में फिल्म 'सई रा नरसिम्हा रेड्डी' में उनका खतरनाक लुक भी जारी हुआ, जिसमें वे एक बार फिर अंग्रेजों से लोहा लेते दिखाई देंगे। छोटे परदे पर वे आम लोगों को करोड़पति बना रहे हैं। 'कौन बनेगा करोड़पति' के 11वें सीजन में एक बार फिर अमिताभ कहते नजर आ रहे हैं- आइए देवियों और सज्जनों आप और हम मिलकर खेलते हैं- कौन बनेगा करोड़पति।
साल 1969, एक ऐसा साल जब भारतीय सिनेमा के शहंशाह का फिल्मी करियर शुरू हुआ था। उस साल 7 सितंबर को अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' रिलीज हुई थी। फिल्म 'सात हिन्दुस्तानी' के लिए अमिताभ को सर्वश्रेष्ठ नए अभिनेता के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। हालांकि फिल्म व्यवसायिक रूप से सफल नहीं हो पाई थी। वहीं आने वाले कुछ और साल भी अमिताभ के लिए बतौर अभिनेता कुछ खास नहीं रहे, लेकिन बच्चन साहब ने हार न मानी और आज वो क्या मुकाम रखते हैं इसको शब्दों में बयान करने की जरूरत नहीं है। इस स्पेशल रिपोर्ट में हम बात करेंगे अमिताभ के बारे में... जिसमें जिक्र होगा उनकी जिंदगी का, उनकी फिल्मों का और उनके शहंशाह बनने तक के सफर का....
आखिर कैसे मिली थी अमिताभ को उनकी पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी'
अमिताभ बच्चन ने न सिर्फ निजी जिंदगी में बल्कि सिनेमाई सफर में भी कई उतार चढ़ाव देखे, इसकी शुरुआत उनकी पहली फिल्म से ही हो गई थी। दरअसल उन्हीं दिनों अजिताभ ट्रेन से दिल्ली से मुंबई जा रहे थे कि उन्हें ट्रेन में उनकी एक मित्र मिली जिसने बताया कि ख़्वाजा अहमद अब्बास अपनी नई फिल्म 'सात हिन्दुस्तानी' के लिए नए कलाकारों की तलाश कर रहे हैं। तो अजिताभ ने भाई अमिताभ के फोटो उस मित्र को देते हुए अब्बास से बात करने को कहा। जब वे फोटो अब्बास ने देखे तो उन्होंने कहा फोटो से क्या होगा, लड़के को बुलाओ। तब अजिताभ ने अमिताभ को कोलकाता ('बर्ड एंड कंपनी' में सेल्स एग्जिक्यूटिव पद पर कार्यरत) से तुरंत मुंबई आने को कहा। अमिताभ बच्चन जब मुंबई में अब्बास साहब के पास पहुंचे तो उन्होंने सर नेम बच्चन देखकर पूछा कि तुम क्या बच्चन के बेटे हो, घर से भागकर आए हो। तब अमिताभ ने कहा भागकर नहीं आया उन्हें पता है। लेकिन अपनी तसल्ली के लिए ख़्वाजा अहमद अब्बास ने बच्चन जी को तार भेजकर पूछा कि तुम क्या इस बात से सहमत हो कि अमिताभ फिल्मों में काम करे। तब बच्चन जी ने अब्बास को जवाब दिया कि यदि तुमको लगता है कि अमिताभ में कुछ योग्यता है तो हमारी सहमति है लेकिन लगता है ऐसी कोई योग्यता नहीं है तो उसे समझाकर वापस कोलकाता भेज दो। लेकिन अब्बास को जब लगा कि वह यह सब कर सकता है तो माँ जी और बाबूजी ने भी अमिताभ को फिल्मों में काम करने की सहमति दे दी।
पढ़ें: बदलते दौर में बदल गए प्रमोशन के तरीके, कुछ दिखे तीखे-कुछ पड़े फीके
जंजीर ने बदली किस्मत
अमिताभ के फिल्मी करियर को नया मोड़ फिल्म जंजीर से मिला था। दरइसल उन दिनों प्रकाश मेहरा अपनी फिल्म 'जंजीर' के लिए अमिनेता की तलाश कर रहे थे। फिल्म में पहले धर्मेन्द्र नजर आने वाले थे लेकिन धर्मेन्द्र से बात न बनने पर देव आनंद और राज कुमार सहित कुछ अन्य अभिनेताओं से भी प्रकाश मेहरा की बात हुई। लेकिन कहीं और बात न बनने पर ये फिल्म अमिताभ की झोली में आ गिरी। लेकिन मुसीबतें अब भी आसान नहीं हुई थीं क्योंकि तब अमिताभ के साथ कोई अभिनेत्री फिल्म करने को तैयार नहीं थी। ऐसे में जया जी ने तुरंत अमिताभ के साथ काम करने के लिए स्वीकृति दे दी। फिल्म रिलीज होने के साथ ही अमिताभ की किस्मत बदल गई। देश को एक नया सुपरस्टार मिल गया था। इस फिल्म से ही अमिताभ एंग्री यंग मेन बनकर पूरे देश पर छा गए थे।
अमिताभ बच्चन के किस्से
-फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से पहले अमिताभ ने ऑल इंडिया रेडियो में उद्घोषक के लिए भी आवेदन किया था। इसके लिए अमिताभ ने ऑल इंडिया रेडियो में ऑडिशन दिया लेकिन रेडियो की चयन समिति ने अमिताभ की आवाज को रेडियो के लिए अयोग्य बताकर रिजेक्ट कर दिया था। गौरतलब है कि रेडियो की इस गलती का अफसोस गोवा में 28 नवम्बर 2017 को तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने भी किया था। उस वक्त स्मृति ने कहा था- 'जीवन में एक ऐसा हादसा हुआ कि ऑल इंडिया रेडियो में अमित जी ऑडिशन करने गए और अमित जी को ऑल इंडिया रेडियो पर रिजेक्ट कर दिया गया था. तो आज यह विधि का विधान है और हमारा सौभाग्य कि आज इस मंच पर उसी मंत्रालय द्वारा और भारत सरकार की ओर से हम अमित जी को पारितोषिक दे रहे हैं, यह हमारा अभिमान है।'
- अमिताभ बच्चन की आवाज को चाहें रेडियो द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया था लेकिन इसके कुछ दिन बाद फिल्मकार मृणाल सेन ने उन्हें अपनी फिल्म 'भुवन सोम' में सूत्रधार के रूप में अमिताभ की ही आवाज ली। हालांकि फिल्म की क्रेडिट लाइन में अमिताभ बच्चन की जगह सिर्फ अमिताभ दिया गया और उन्हें तब इसके लिए 300 रुपये का मेहनताना मिला था।
- अमिताभ ने अपने फिल्मी करियर में एक के बाद एक कई फ्लॉप फिल्में दी हैं। फ्लॉप का यह दाग साफ होने में करीब 4 बरस का लम्बा समय लग गया था। 'सात हिन्दुस्तानी' के अमिताभ को सुनील दत्त ने 'रेशमा और शेरा' में लिया जिसमें अमिताभ की फिल्म के नायक शेरा (सुनील दत्त) के गूंगे भाई छोटू की एक छोटी सी भूमिका थी। फिल्म में अमिताभ का कोई संवाद भी नहीं था. यह फिल्म देश-विदेश में काफी पसंद की गई, लेकिन फिल्म का अधिकतर श्रेय सुनील दत्त, वहीदा रहमान और विनोद खन्ना को मिला। इस दौरान 'परवाना', संजोग' 'बंसी बिरजू', 'एक नज़र', 'रास्ते का पत्थर' और 'बंधे हाथ' जैसी कई फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप होती गईं। हालांकि फिल्म 'बॉम्बे टू गोवा' और 'आनंद' ने अमिताभ के करियर को उस वक्त थोड़ा सहारा दिया। फिल्म आनंद के लिए पहली बार सर्वोत्तम सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था।
- अमिताभ के लिए बॉलीवुड का शुरुआती सफर इतना मुश्किल था कि उनकी कई फिल्मों की शूटिंग बीच में ही रोक दी गई या फिर उन्हें बीच में ही फिल्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस दौरान यह भी हुआ कि अमिताभ को लेकर शुरू की गयी कुछ फ़िल्मों से उन्हें निकाल दिया गया. कुछ फ़िल्में कुछ दिन की शूटिंग के बाद रोक दी गईं। बता दें कि निर्देशक कुंदन कुमार ने एक फिल्म 'दुनिया का मेला' में अमिताभ के साथ रेखा को लिया था। लेकिन कुछ दिन बाद अमिताभ को बाहर कर संजय खान को ले लिया गया। अमिताभ को लेकर शुरू की गई 'अपराजिता' और 'पतझड़' जैसी फिल्में भी कुछ शूटिंग के बाद बीच में रोक दी गईं। वहीं ऋषिकेश मुखर्जी ने अमिताभ को फिल्म 'गुड्डी' में नायिका जया भादुड़ी के अपोजिट लेकर और चार दिन की शूटिंग के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस फिल्म में उनकी जगह अभिनेता समित भंजा को ले लिया गया था।
पढ़ें: वेब सीरीज क्या हैं, क्यों बढ़ी डिमांड, कैसे बदला टीवी-सिनेमा का चेहरा ?
अमिताभ के दस दमदार डायलॉग्स
- पूरा नाम, विजय दीनानाथ चौहान, बाप का नाम, दीनानाथ चौहान, मां का नाम सुहासिनी चौहान, गांव मांडवा, उम्र छत्तीस साल। (अग्निपथ)
- हम जहां खड़े हो जाते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है। (कालिया)
- आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है, क्या है तुम्हारे पास? (दीवार)
- आई कैन टॉक इंग्लिश, आई कैन वॉक इंग्लिश, आई कैन लॉफ इंग्लिश बिकॉज इंग्लिश इज अ वेरी फन्नी लैंग्वेज। भैरों बिकम्स बायरन बिकॉज देयर माइंड्स और वैरी नैरो। (नमक हलाल)
- रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है शहंशाह। (शहंशाह)
- मूंछें हो तो नत्थूलाल जैसी वरना न हो। (शराबी)
- डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है लेकिन एक बात समझ लो.. डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। (डॉन)
- कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है – कि जिंदगी तेरी जुल्फों की नर्म छांव में गुजारनी पड़ती तो शादाब हो भी सकती थी। (कभी कभी)
अमिताभ की सुपरहिट फिल्में
करीबन 50 साल के फिल्मी करियर में अमिताभ बच्चन ने कई सुपरहिट फिल्में भारतीय सिनेमा के नाम की हैं। लेकिन कुछ ऐसी फिल्मों का श्रेय भी अमिताभ को जाता है जिसके बिना भारतीय सिनेमा अधूरा है। आनंद(1971), ज़ंजीर(1973), अभिमान(1973), नमक हराम (1973), दीवार(1975), शोले(1975), चुपके चुपके(1975), अमर अकबर एंथोनी(1977), खून पसीना(1977), परवरिश (1977), डॉन(1978), मुक़द्दर का सिकंदर(1978), काला पत्थर(1979), सुहाग(1979), दोस्ताना(1980), याराना (1981), लावारिस(1981), सिलसिला(1981), कालिया(1981), सत्ते पे सत्ता(1982), नमक हलाल(1982), कुली (1983), शराबी(1984), मर्द(1985), शहंशाह (1988), अग्निपथ(1990), सूर्यवंशन (1999), आंखें(2002), बागवान(2003), खाकी(2004), ब्लैक(2005), सरकार(2005), पा (2009), पिंक (2016) और बदला (2019) अमिताभ की बेहतरीन फिल्मों की लिस्ट में शामिल हैं।
पढ़ें: सिनेमा में सीक्वल और स्पिन ऑफ: जो एक बार हिट है वो आगे भी फिट है
इन गानों को अमिताभ ने दी आवाज
मेरे पास आओ (मिस्टर नटवरलाल, 1979)
रंग बरसे (सिलसिला, 1981)
नीला आसमन (सिलसिला, 1981)
मेरे अंगने में (लावारिस, 1981)
जहाँ चार यार (शराबी, 1984)
चोरी चोरी (सूर्यवंशम, 1999)
बुढ्ढा होगा तेरा बाप (बुढ्ढा होगा तेरा बाप, 2011)
होरी खेले रघुवीरा (बाग़बान, 2003)
रोज़ाना जीए (निशब्द, 2007)
पिद्दी सी बातें (शमिताभ, 2015)
चली चली (बाग़बान)
मैं यहां तू वहां (बाग़बान)
चले जाने दो (भूतनाथ)
बोल बच्चन (बोल बच्चन)
एकला चलो रे (कहानी)
अतरंगी यारी - वज़ीर
छोटे पर्दे पर भी बच्चन का दबदबा
अमिताभ न सिर्फ बड़े पर्दे बल्कि छोटे पर्दे पर भी काफी एक्टिव रहने लगे हैं। दरअसल अमिताभ ने कुछ टीवी शोज भी होस्ट किए हैं। इनमें बिग बॉस और कौन बनेगा करोड़पति मुख्य रूप से शामिल हैं। क्विज रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति की बात करें तो इसका 11वां सीजन टीवी पर दस्तक दे चुका है। गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन कौन बनेगा करोड़पति से पिछले 19 सालों से जुड़े हैं और 10वीं बार वो केबीसी को होस्ट कर रहे हैं।
पढ़ें: ऐतिहासिक प्रेम कहानियां, कुछ ऐसा ताना बाना...थोड़ी हकीकत थोड़ा फसाना