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कपूर सरनेम का कोई मतलब नहीं: वानी कपूर
रवि बुले
Updated Mon, 09 Sep 2013 10:53 AM IST
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वानी कपूर यशराज फिल्म्स की नई खोज हैं। वह दिल्ली की हैं। उन्होंने टूरिज्म की पढ़ाई की और रैंप पर चलते हुए मुंबई पहुंचीं। किस्मत ने यशराज फिल्म्स के दरवाजे खोले। ‘शुद्ध देसी रोमांस’ उनकी पहली फिल्म है। यशराज से उनका तीन फिल्मों का अनुबंध है। प्रस्तुत हैं वानी से बातचीत के अंशः
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पहली ही फिल्म यशराज बैनर की! कैसे संभव हुआ?
मैंने इसके लिए कोई प्लान नहीं किया था। ढाई साल से मैं मॉडलिंग कर रही थी। एक एड के शूट के सिलसिले में मैं पहली बार मुंबई आई थी। मेरी एजेंसी ने मेरे फोटो यशराज में भेजे थे। एजेंसी ने ही मुझसे कहा कि आप यशराज की कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा से मिल लें। शानू ने मुझे इस फिल्म के लिए ऑडिशन देने को कहा।
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क्या आपका कोई फिल्मी बैकग्राउंड है?
मेरा कोई फिल्म बैकग्राउंड नहीं है। कपूर सिर्फ मेरा सरनेम है। कोई कनेक्शन नहीं है। मेरे पिता एक्सपोर्टर हैं। बहुत प्रोटेक्टिव हैं। उन्हें मेरे मॉडलिंग और फिल्मों में आने से ऐतराज था। लेकिन मां आर्मी बैकग्राउंड से हैं। उन्होंने मुझे हौसला दिया।
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अपनी पहली फिल्म के बारे में, अपने पहले रोल के बारे में क्या कहेंगी?
यह यशराज की पारंपरिक फिल्मों जैसी लवस्टोरी नहीं है। बहुत ही रियलिस्टिक रोमांस है। आजकल की जेनरेशन को ध्यान में रख कर यह रोमांस बनाया गया है। लव, कमिटमेंट और मैरिज को लेकर इस जेनरेशन में बहुत कन्फ्यूजन है।
फिल्म में मेरा रोल तारा नाम की लड़की का है, जो एक छोटे शहर से है। लेकिन सच कहूं, तो मुझमें और तारा में कोई समानता नहीं है। उसकी बातें मुझे चौंका देती थीं। मनीष शर्मा (डायरेक्टर) मुझसे अक्सर कहते थे कि वानी तुम यहां तारा हो। जब सेट पर आती हो तो वानी को घर छोड़ के आया करो।
आपने ऐक्टिंग का कोर्स या स्टेज नहीं किया। डायरेक्टर ने कैसे मदद की?
कैरेक्टर को समझने के लिए मैंने मनीष के साथ बहुत सारे रीडिंग सेशंस किए। तारा को लेकर डिस्कशन किए। वर्कशॉप किए।
सुशांत सिंह राजपूत और परिणीति चोपड़ा के साथ अनुभव कैसा रहा?
बहुत अच्छा। उन्होंने मुझे कभी अनकंफर्टेबल फील नहीं होने दिया। हम अपने सीन्स को लेकर डिस्कस करते थे। जहां मैं चीजों को समझ नहीं पाती थी, वे मुझे समझाते थे। दोनों बहुत टैलेंटेड और डाउन-टु-अर्थ हैं।