फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   interview of ranvir singh

मैं तो डरकर लुटेरा छोड़ रहा थाः रणवीर सिंह

Fri, 05 Jul 2013 04:11 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 05 Jul 2013 04:11 PM IST
विज्ञापन
interview of ranvir singh

रणवीर सिंह की तीसरी फिल्म 'लुटेरा' रिलीज हो गयी है। यह फिल्म उनकी दोनों फिल्में 'बैंड बाजा बारात' और 'लेडीज वर्सेज रिकी बहल' से पूरी तरह से अलग है।

विज्ञापन


रणवीर सिंह का कहना है कि 'लुटेरा' का विषय उनकी पिछली दोनों फिल्मों से इतना अलग है कि वह इस फिल्म में काम करने के दौरान नर्वस हो गए थे। इतने नर्वस कि वह इस फिल्म को ही छोड़ने जा रहे थे। रणवीर सिंह ने अमर उजाला से इस फिल्म के बारे में लंबी बात की। पेश हैं बातचीत के कुछ चुनिंदा अंश,
विज्ञापन


आप बार बार इस बात को दोहरा रहे हैं कि 'लुटेरा' आपकी सबसे कठिन फिल्म है, क्यों?

हां लुटेरा मेरे लिए सबसे कठिन फिल्म थी। क्योंकि फिल्म की शूटिंग के तीन चार दिन बाद ही मुझे लगने लगा कि मैं अच्छा परफॉर्म नहीं कर रहा। मैं नर्वस हो गया था। फिल्म छोड़ने तक की नौबत आ गयी थी। लेकिन मुझे विक्रम ने हौसला दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


मेरा जॉनर कभी भी ऐसी फिल्मों का नहीं रहा है। मैंने हमेशा लाउड कैरेक्टर निभाया है। ऐसे में विक्रम की फिल्म मेरे लिए बेहद कठिन थी। इसमें मुझे संवाद कम और एक्सप्रेशन ज्यादा देना था। और हमने जहां जहां शूटिंग की, उन स्थानों पर सबकुछ अनुकूल नहीं था। इसलिए भी मेरे लिए यह फिल्म बेहद कठिन थी।

क्या आपने विक्रम की पहली फिल्म देखी थी?

हां, मैंने 'उड़ान' देखी थी और मुझे कमाल की फिल्म लगी थी। मेरी और विक्रम की मुलाकात एक अवार्ड फंक्शन के दौरान हुई। वहां मिला तो मैंने उन्हें साफ साफ कहा कि आप कभी भी फिल्म लिखें और आपको ऐसा महसूस हो कि मुझे फिल्म में कास्ट करना चाहिए तो मुझे जरूर बताएं। इस फिल्म ने मुझे स्क्रिप्ट पढ़ने के दौरान ही रुला दिया था। इतना इमोशन है इस फिल्म में।

ऐसी प्रेम कहानियां कम बनती हैं। 'लुटेरा' बिल्कुल एक चित्रकार की सही तसवीर है, जिसका हर फ्रेम बिल्कुल परफेक्ट है। यह मैं ऐसे ही नहीं कह रहा। आप देखें फिल्म। फिर खुद तय करें। आप अकेले बाद में बैठ कर स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं और आपकी आंखों से लगातार आंसू गिर रहे हैं। मैं तो उसी वक्त इस फिल्म का हिस्सा बन चुका था।

आपने कभी ऐसे जॉनर की फिल्म में काम नहीं किया था तो कितना कठिन रहा इसका होमवर्क?

दरअसल, मैं खुद भी मसाला फिल्मों का दर्शक रहा हूं। मेरे लिए फिल्मों का मतलब मसाला फिल्में हुआ करती थी और मैं वैसी ही फिल्मों का चुनाव करता था तो वह मेरे लिए मुश्किल काम नहीं था। लेकिन 'लूटेरा' मेरे स्वभाव से बिल्कुल विपरीत फिल्म है।

इसमें मैं गंभीर और शर्मीला सा रहनेवाला लड़का बना हूं। ऐसा मैंने न तो कभी किरदार निभाया है और न ही मैं खुद भी ऐसा हूं। तो काफी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन सारी तैयारी तो विक्रम ने ही की है। मैंने नहीं। ऐसे में अभिनय करना बहुत कठिन था।

लेकिन मैं खुद चकित हूं कि फिल्म में मैं यह कर पाया। मैं अपने किरदार से प्यार कर बैठा हूं। बाद में मुझे इस किरदार से निकल कर किसी और किरदार में जाने में काफी दिक्कतें हुई। अगर सच कहूं तो मैं इश्क में पड़ गया हूं लुटेरा के साथ।

बतौर निर्देशक विक्रमादित्य मोटवानी के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?

मुझे विक्रमादित्य के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं लकी हूं। चूंकि विक्रम अपने कलाकार को जिस तरह संवारते हैं ऐसा बहुत कम निर्देशक कर पाते हैं। यह उनकी खूबी है कि वह हिंदी सिनेमा के हर पोशर्न को बखूबी जानते हैं। उन्हें एडिटिंग कैमरा, निर्देशन, स्क्रिप्ट सबकी जानकारी है। विक्रम को सिनेमा की ग्रामर की जो समझ है, शायद ही किसी और के पास होगी।

डलहौजी में शूटिंग का एक्सपीरियंस कैसा रहा?


हम जब इस फिल्म की शूटिंग डलहौंजी में कर रहे थे। वहां जब हमें बर्फ चाहिए थी तो बर्फ मिल नहीं रही थी। और जब नहीं चाहिए था तो इतनी बर्फबारी हो रही थी कि हम शूटिंग नहीं कर पा रहे थे। हम कई बार शूटिंग करने गये। लौट लौट कर आये।

कोई और निर्देशक होते तो फिल्म कहीं और शूट कर लेते, लेकिन विक्रम ने तय कर लिया था वही शूट करेंगे। मैं तो कायल हो गया हूं विक्रम का। विपरीत परिस्थिति के बाद भी उन्होंने अपनी लगन बनाए रखी।

आपको फिल्म के सेट पर चोट बहुत लगती है। आखिर चक्कर क्या है।

हां, लुटेरा के शूट के दौरान मेरी कमर में चोट लगी थी। तभी मैंने कहा था विक्रम किसी और को कास्ट कर लें। लेकिन वह नहीं माने। रामलीला के दौरान भी मुझे शूटिंग के वक्त चोट लगी। पहले मैं नजर या किसी अंधविश्वास को नहीं मानता था। लेकिन अब मानने लगा हूं।

मुझे लगता है कि किसी की नजर लग गयी है। पहले ऐसा नानी कहा करती थी। अब मैं अपने पैरों में काला धागा बांध कर रखने लगा हूं। नानी कहती हैं कि इससे नजर हटती है। अब इतनी चोट लगती है तो लगता है यह सब मानना ही होगा।


सोनाक्षी के साथ कैसा रहा अनुभव? यह आप दोनों के लिए पहली फिल्म है।

हम दोनों की जर्नी साथ शुरू हुई है फिल्मों में तो। दोनों के लिए यह फिल्म खास है। सोनाक्षी काफी मेहनती हैं और स्पॉनटेनियस हैं। उनमें इंडियन लुक बहुत फबते हैं। उनकी आंखें काफी एक्सप्रेसिव हैं। उनकी आवाज भी काफी मीठी है तो वह भी किरदार में जमती हैं। मुझे लगता है कि दर्शकों को हमारी जोड़ी पसंद आयेगी।

19 महीनों के अंतराल के बाद आप फिर से दर्शकों के सामने होंगे?

हां,  मैं देर से तो लौट रहा हूं। इस साल लगभग मेरी चार फिल्में बैक टू बैक रिलीज हो रही है। तो मुझे विश्वास है कि इस बार मेरे कई अवतार उन्हें देखने को मिलेंगे। ये फिल्में सही तरीके से चलीं तो दर्शकों का प्यार मिलता ही रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed