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IFFI 2022: डायरेक्टर कार्लोस एशेलमैन कैसर, बोले- फिल्म ‘रेड शूज’ में महिलाओं के खिलाफ दिखेगी हिंसा

Sun, 27 Nov 2022 06:28 PM IST
प्रियंका नेगी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रियंका नेगी Updated Sun, 27 Nov 2022 06:28 PM IST
सार

कैसर ने बताया कि उनके मन में इस फिल्म को बनाने का विचार उनके अपने पिता के साथ संबंधों के कारण पैदा हुआ था। जो पुरुषों की सकारात्मक मर्दाना ऊर्जा की बातचीत को खोलने की कोशिश करती है।

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IFFI 2022 Mexican Director Carlos Eichelmann Kaiser said theme of red shoes is violence against women
कार्लोस एशेलमैन कैसर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में प्रतिष्ठित स्वर्ण मयूर पुरस्कार के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर रही मैक्सिकन फिल्म 'रेड शूज' को लेकर निर्देशक कार्लोस एशेलमैन कैसर ने शनिवार को इवेंट के दौरान बातचीत की। इस दौरान कैसर ने अपनी फिल्म 'रेड शूज' पर बात करते हुए कहा कि उनकी फिल्म पुरुषों की उर्जा (मर्दाना उर्जा) पर विचार-विमर्श की कोशिश करती है और इसे सकारात्मक तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए, लेकिन फिल्म का केंद्रीय विषय महिलाओं के खिलाफ हिंसा है।

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कैसर ने बताया कि उनके मन में इस फिल्म को बनाने का विचार उनके अपने पिता के साथ संबंधों के कारण पैदा हुआ था। जो पुरुषों की सकारात्मक मर्दाना ऊर्जा की बातचीत को खोलने की कोशिश करती है और इसे फिल्म में काफी सकारात्मक तरीके से दिखाया जाएगा लेकिन फिल्म में केंद्र बिंदु महिलाओं के खिलाफ हिंसा है। शीर्षक उन कार्यकर्ताओं से प्रेरित था जो मेक्सिको में महिलाओं के खिलाफ प्रचलित लिंग आधारित हिंसा को उजागर करने के लिए लाल जूते पहनकर सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा कर लेते थे।" 

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अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कैसर कहते हैं, 'यह फिल्म मेरे लिए बहुत खास है। इसने मुझे अंदर तक छुआ है। कार्यक्रमों में ताली बजने से ज्यादा कलाकारों की निजी यात्रा मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है'।

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तो वहीं निर्माता एलेजांद्रो डी इकाजा ने फिल्म के बारे में बात करते हुए कहा कि 'फिल्म में बताने के लिए एक अद्भुत कहानी है। यह अलग बात है कि इसकी शूटिंग काफी जटिल और लंबी रही थी, क्योंकि हमने कोविड महामारी के दौरान शूट किया था'। उन्होंने कहा कि कार्लोस के साथ काम करने का अनुभव बहुत शानदार था।

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फिल्म एक किसान के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अलगाव और अकेलेपन में जीवन व्यतीत कर रहा है और उसकी बेटी की मौत की खबर मिलने के बाद होने वाली घटनाओं के केंद्र में फिल्म चलती रहती है। फिल्म आगे बढ़ती है क्योंकि किसान अपनी बेटी के शरीर को घर लाने की कोशिश करने के लिए एक अपरिचित और विदेशी दुनिया के माध्यम से नेविगेट करने की कोशिश करता है।

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