बैडमेन को पसंद है रावण का किरदार
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अमर उजाला से की बात में उनका कहना है कि हीरो अगर नेगेटिव रोल में रहता है तो उसे फिल्म के अंत विलेन का किरदार ही बरकरार रखना चाहिए न कि दोबारा से हीरो बन जाए। शुक्रवार को वह नोएडा में एक फिल्म के प्रमोशन पर पहुंचे।
गुलशन बताते हैं कि फिल्मों का पहले से ट्रेंड बदल गया है। अब हर अभिनेता अलग-अलग किरदार निभाना चाहता है। वह खुद इस माह अपनी आने वाली चार फिल्मों (सुपर से ऊपर, बुलेट राजा, यारियां और बात बन गई) में अलग-अगल किरदारों में नजर आएंगे।
गुलशन कहते हैं कि यदि कोई हीरो अपनी इमेज बचाने के लिए फिल्म के अंत में नेगेटिव से पॉजिटिव किरदार में आता है तो यह उसकी कायरता है। दिल्ली के निवासी रहे गुलशन ग्रोवर ने श्रीराम कॉलेज ऑफ आर्ट एंड कॉमर्स से मास्टर डिग्री प्राप्त की। उनके पिता भी कई वर्षों तक रामलीलाओं का आयोजन कराते रहे।
दिल्ली को अपना दिल बताते हुए कहा कि उन्होंने अभिनय की शुरुआत रामलीला में वानर सेना के एक सदस्य के रूप में की थी। वह बताते हैं कि आज भी उनकी इच्छा रावण का किरदार निभाने की है। आई एम कलाम के निर्देशक नीला मदहब पांडा उनको लेकर ‘दशानन’ बनाने वाले थे लेकिन कुछ कारणों से यह फिल्म नहीं बन पाई।