Exclusive : 60 का होने तक डेरा सच्चा सौदा की गद्दी पर जमे रहेंगे गुरमीत राम रहीम
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डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम इंसान फिल्म निर्माण में भी सक्रिय हो गए हैं। उनकी पहली फिल्म 'मैसेंजर ऑफ गॉड' थी। अब उनकी 'एमएसजी द वॉरियर लॉयन हार्ट' आ रही है। फिल्म से संबंधित 30 काम उन्होंने अकेले किए हैं।
वारिस कौन होगा, मालूम नहीं
आप बड़ी कम उम्र में डेरा सच्चा सौदा के वारिस बन गए थे। अब आप अपने बाद किसे उत्तराधिकारी घोषित करेंगे ये पूछे जाने पर गुरमीत ने कहा- मैं 23 साल का था, जब गुरुजी ने मुझे डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख बना दिया था। इस पद पर रहते हुए मुझे 16 साल हो गए। मेरे बाद इसका उत्तराधिकारी कौन होगा उस पर गुरु कृपा से फैसला लिया जाएगा। मैं इस वक्त 46 का हूं पर मेरे गुरुजी मुझसे 60 साल तक काम लेना चाहते हैं। नतीजतन वारिस के सवाल पर सवालिया निशान लगा हुआ है। वैसे भी मैं इस 46 की उम्र में भी वैसे स्टंट कर लेता हूं जो 20-22 के जवान भी नहीं कर पाते हैं। मैं वे सभी काम भी कर लेता हूं जो महिलाएं कर लेती हैं। सब ईश्वर की कृपा है। वरना साधारण इंसान यह सब कहां कर पाता है।
एलियन से लड़ता है किरदार
'एमएसजी द वॉरियर लॉयन हार्ट' में मेरे तीन रोल हैं। एक में मैं योद्धा बना हूं। वह पूरे राष्ट्र की माता और बहनों की इज्जत बचाने को एलियन से भिड़ जाता है। वह उन्हें कैसे धूल चटा धरती से बाहर भेजता है फिल्म उस बारे में है। ऐसा नहीं है कि वह अकेला है। उसका भरा-पुरा परिवार है। फिल्म में गाने भी हैं। एक गाना किसानों पर भी है। वह किसानों से गुजारिश करता है कि आत्महत्या मत करो। यह समस्या का हल नहीं है। ऐसे काफी संदेश हैं फिल्म में। वो सब मनोरंजक तरीके से बयां किए गए हैं।
टैक्स की रकम मालूम नहीं
गुरमीत राम कहते हैं कि, 'एमएसजी2 तो अभी तक चल रही है। सिनेमाघरों में लगी हुई है। एक साल हो गया उसे। हकीकत एंटरटेनमेंट से जुड़े करोड़ों लोगों ने फिल्म देखी है। उन्होंने बताया कि फिल्म की काफी कमाई हुई। उस पर मैंने कहा कि उस कमाई का बड़ा हिस्सा गरीबों के लिए हॉस्पिटल बनाने को खर्च किया जाए। उन अस्पतालों में बायपास सर्जरी तक फ्री है। रहा सवाल आंकड़ों और कमाई का तो वह आप को फिल्म के प्रोड्यूसर ही बता सकते हैं। मेरा उनमें इंट्रेस्ट नहीं था। हां हमारी आवाज यूथ तक पहुंची है, वह हमसे पूछें तो वह मैं बता सकता हूं। हर रविवार हमारे पास दुनिया भर से दो से पांच हजार लोग ड्रग्स छोड़ने आते थे। एमएसजी2 देखने के बाद वह तादाद बढ़कर 25 से 50 हजार के आंकड़ा को छू चुका है। हम नशा छुड़वाने के लिए कोई फीस चार्ज नहीं करते।
अवतार के स्केल की फिल्म बनाई है
मैं फिल्म निर्माण में पूरी तरह सक्रिय हो गया हूं। यह फिल्म अक्टूबर में आ रही है। इससे पहले हम एक और फिल्म बना चुके हैं। उसका वीएफएक्स बहुत बड़े स्केल का है। वह हॉलीवुड की 'अवतार' को टक्कर देगी। वह साढ़े चार महीने में तैयार हुई है। इसके अलावा एक कॉमेडी फिल्म भी कर रहा हूं। लोगों को साफ-सुथरी कॉमेडी देने की मेरी कोशिश है। जो लोग कहते हैं कि बगैर डबल मीनिंग संवादों के कॉमेडी नहीं हो सकती, मैं उनका भ्रम तोड़ना चाहता हूं।
हर दर्शक वर्ग के लिए है फिल्म
हमारी फिल्मों में नग्नता और अश्लीलता नहीं होती। मांसाहार करते हुए गाने गाओ। संडे हो या मंडे, रोज खाओ अंडे जैसी बात नहीं है। हम स्वस्थ मनोरंजन परोस रहे हैं। यानी जो लोग बजरंगी भाईजान और फैन जैसी फिल्मों के फैन हैं, यह फिल्म उन दर्शकों के लिए भी है। फिल्म में जो एक्शन और पारिवारिक मूल्यों का समावेश है वह सब फिल्म में है। लिहाजा यह हर तरह के दर्शक वर्ग को भाएगी।
लोगों का उद्धार और सुधार भी करना था
इस तरह हुआ नामकरण
जब मैं गुरुजी शास्त्र नाथ महाराज के पास आया तो उन्होंने मुझसे सभी धर्म की किताबों को पढ़ने को कहा। लिहाजा मैंने कुरान, बाइबिल, गुरुबाणी पर रिसर्च किया। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि सभी धर्मों की 99 फीसदी बातें तो एक सी ही हैं। सब में शांति, सहिष्णुता, सौहार्द की बातें हैं। वह करने के बाद मैंने कई जगह सतसंग किया तो लोग कहने लगे कि मैं उनका गुरु हूं। तब तक मेरा नाम कुछ और था। जब सभी धर्म के अनुयायियों ने मुझे अपना गुरु मान लिया तो मैंने सोचा कि मैं नाम तब्दील कर लूं। मुझे लोगों का उद्धार और सुधार भी करना था, इसलिए सोचा कि गुरमीत राम रहीम इंसान ही रख लूं ताकि उसमें सभी धर्म का समावेश हो जाए।
नंबरदार का बेटा हूं
मेरे माता-पिता की शादी के 18 साल बाद मेरा जन्म हुआ था। मेरे पिता राजस्थान के महाराज गंगासिंह बीकानेर घराने के नंबरदार थे। मेरी ईश्वर के बारे में जानने की बहुत रुचि थी। खेती-बाड़ी, पढ़ने और खेल-कूद में मुझे बड़ा मजा आता था। मैंने 32 राष्ट्रीय स्तर के खेल खेले हैं। आज भी खेलता हूं। उन्हीं दिनों से मैंने लोगों का नशा छुड़वाने और समाज कल्याण की खातिर बहुत कुछ करने का मन बना लिया था। खासकर जो लोग गरीब और कमजोर होते थे, उनके लिए फ्री में काम करता था। ऐसा करते-करते शादी हुई। बच्चे भी हुए। जब छोटी बेटी एक साल की हुई तो लगा कि समाज सुधार जरूरी है। पारिवारिक जीवन तो जी लिया। मेरा बहुत बड़ा घराना था। मैं घर का इकलौता बेटा था। सब कुछ था घर में लेकिन गुरुजी ने कहा कि त्याग कर आना पड़ेगा तो मैंने वह सब त्याग दिया। मैं गुरुजी के चरणों में आ गया। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों पर रिसर्च करो। वह शुरू किया। राजस्थान में अच्छी चीज यह रही कि वहां दोस्त यार सभी धर्म के थे। 1984 में आकर पता चला कि धर्म जैसी भी कोई चीज होती है। धर्म तो महासाइंस है। दरअसल संत को गाइड के अवतार में होना चाहिए। जब आप संत बनते हैं तो लोग स्वाभाविक तौर पर आप का सत्कार करते हैं। फिर 1990 से हम इस काम में लगे और 6 करोड़ लोगों का नशा छुड़वाया। साढ़े तीन करोड़ पेड़ लगवाए। 125 तरह के समाज कल्याण से जुड़े कार्य करते हैं।
मनुष्य अपनी मर्जी का मालिक है
इसलिए भगवान मदद नहीं करते
कश्मीर, ईराक, ईरान में निरपराध लोग मर रहे हैं। अगर भगवान हैं तो वह उनकी रक्षा क्यों नहीं करता? इस सवाल पर राम रहीम इंसान जवाब देते हैं, दरअसल जो मालिक है वह हर किसी में है। मनुष्य अपनी मर्जी का मालिक है। अच्छे कर्म करो तो आप ईश्वर को देख सकते हो। उन्होंने हर किसी को यह शक्ति दी हुई है। लिहाजा ईश्वर का इसमें कोई दोष नहीं है।
फिल्म निर्माण के सभी गुर खुद सीखे
सब ईश्वर की कृपा है। मैं तो पढ़ा-लिखा भी नहीं हूं पर समुद्री जहाज तक चला लेता हूं। बाइक के स्टंट कर लेता हूं। 80 फीट के रॉड पर योगा कर लेता हूं। बिना सेफ्टी गार्ड के। इस फिल्म के भी तकरीबन 30 से ज्यादा काम किए उनकी ट्रेनिंग कहीं से नहीं ली। मेरे भीतर की प्रतिभा ईश्वर उभारते गए। पहले एचडी कैमरे पर मैंने ट्रेनिंग ली। छह-छह कैमरों के साथ मैं ट्रेनिंग करता था। डॉक्युमेंट्री बनाया करता था। इस फिल्म के लिए भी ईश्वर की कृपा से सभी 30 काम कर लिए।