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वेब सीरीज में गालियों के बढ़ते चलन पर बोले FTII के अध्यक्ष, कहा- अच्छे कॉटेंट के लिए ये जरूरी नहीं
Thu, 07 Feb 2019 11:07 AM IST
Mishra Mishra
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Mishra Mishra
Updated Thu, 07 Feb 2019 11:07 AM IST
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बीपी सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे के अध्यक्ष बी पी सिंह सबसे ज़्यादा समय तक चलने वाले टीवी शो आहट और सीआईडी के निर्माता भी हैं। वह अब ओटीटी पर भी सक्रिय हो रहे हैं। अमर उजाला संवाददाता अक्षित त्यागी ने मनोरंजन के इस बदलते दौर को लेकर पूछे उनसे कुछ सवाल।
भारत की वेबसीरीज में अमूमन फ्लॉप सितारों को ही क्यों लिया जा रहा है?
दरअसल सारा खेल कलाकारों की उपलब्धता का है। जो एक्टर हमें डेट देगा उसी के साथ हम काम करेंगे। वेब सीरीज का आइडिया मंजूर होने के बाद उसे पूरा करने का समय कम होता है। मेरी पहली वेब सीरीज अभय के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह भी बहुत ही नकचढ़े हैं काम को लेकर। उन्होंने कहानी सुनने के बाद जब तक सबसे मीटिंग नहीं कर ली तब तक वह तैयार नहीं हुए।
टेलीविजन पर हॉरर के फिक्शन शोज में आहट ट्रेंड सेटर रहा है। टेलीविजन पर आपका अगला शो कब आने वाला है?
अभी सिर्फ इतना बता सकता हूं कि हमारी टीम जल्द ही एक नया हॉरर शो लेकर दर्शको के बीच आने वाली है। ये शो मेरी पिछली दोनों सीरीज से ही बहुत अलग होगा। इसे हम टेलीविजन के लिए ही बना रहे हैं। आइडिया मंजूर हो चुका है। ओटीटी की तरह टेलीविजन पर हम इसे जल्दबाजी में नहीं बनाएंगे। यह शो भी ट्रेंडसेटर होगा, इससे ज्यादा मैं अभी कुछ और नहीं बता सकता हूं।
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टेलीविजन तय समय पर शोज देखने वाले दर्शक लगातार खो रहा है। अब लोग अपनी सहूलितय के हिसाब से शोज देख रहे हैं और ओटीटी की तरफ रुख कर रहे हैं, इसका क्या कारण है?
हमारा देश जबरदस्त बदलाव से गुजर रहा है। हर आदमी के हाथ में मोबाइल और सभी इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं। ओटीटी पर कंटेंट चुनने की आजादी भी है जिसको जो पसंद है उसे वह देख सकता है। विदेशी शोज भी भारतीय भाषाओं में डब होकर या सब टाइटल्स के साथ आने लगे हैं तो लोगों के पास चुनने को बहुत कुछ है।
ओटीटी पर सेंसरशिप नहीं है। क्या वेबसीरीज को सेंसर करने से क्रिएटिविटी को नुकसान पहुंचेगा?
मै बहुत ही रूढ़िवादी सोच का हूं लेकिन बदलाव पर बहस भी करता हूं। ऐसा नहीं है ओटीटी पर कुछ भी दिखाने का लाइसेंस मिल गया है। यह सिर्फ दर्शकों पर निर्भर करेगा कि वह क्या देखना पसंद करते हैं। जहां तक बात क्रिएटिविटी की है तो भीड़ से अलग होने के लिए अश्लीलता और गालियों की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ गालियों से ही ओटीटी कंटेंट नहीं बनता। इसने हमें बोल्ड विषयों को लेने की स्वतंत्रता दी है लेकिन इसकी लिखावट भी वैसी ही होनी चाहिए। अगर ऐ ओटीटी के लिए भी नियम बने तो लेखन शैली और बदलनी चाहिए।
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भारत की वेबसीरीज में अमूमन फ्लॉप सितारों को ही क्यों लिया जा रहा है?
दरअसल सारा खेल कलाकारों की उपलब्धता का है। जो एक्टर हमें डेट देगा उसी के साथ हम काम करेंगे। वेब सीरीज का आइडिया मंजूर होने के बाद उसे पूरा करने का समय कम होता है। मेरी पहली वेब सीरीज अभय के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह भी बहुत ही नकचढ़े हैं काम को लेकर। उन्होंने कहानी सुनने के बाद जब तक सबसे मीटिंग नहीं कर ली तब तक वह तैयार नहीं हुए।
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टेलीविजन पर हॉरर के फिक्शन शोज में आहट ट्रेंड सेटर रहा है। टेलीविजन पर आपका अगला शो कब आने वाला है?
अभी सिर्फ इतना बता सकता हूं कि हमारी टीम जल्द ही एक नया हॉरर शो लेकर दर्शको के बीच आने वाली है। ये शो मेरी पिछली दोनों सीरीज से ही बहुत अलग होगा। इसे हम टेलीविजन के लिए ही बना रहे हैं। आइडिया मंजूर हो चुका है। ओटीटी की तरह टेलीविजन पर हम इसे जल्दबाजी में नहीं बनाएंगे। यह शो भी ट्रेंडसेटर होगा, इससे ज्यादा मैं अभी कुछ और नहीं बता सकता हूं।
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टेलीविजन तय समय पर शोज देखने वाले दर्शक लगातार खो रहा है। अब लोग अपनी सहूलितय के हिसाब से शोज देख रहे हैं और ओटीटी की तरफ रुख कर रहे हैं, इसका क्या कारण है?
हमारा देश जबरदस्त बदलाव से गुजर रहा है। हर आदमी के हाथ में मोबाइल और सभी इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं। ओटीटी पर कंटेंट चुनने की आजादी भी है जिसको जो पसंद है उसे वह देख सकता है। विदेशी शोज भी भारतीय भाषाओं में डब होकर या सब टाइटल्स के साथ आने लगे हैं तो लोगों के पास चुनने को बहुत कुछ है।
ओटीटी पर सेंसरशिप नहीं है। क्या वेबसीरीज को सेंसर करने से क्रिएटिविटी को नुकसान पहुंचेगा?
मै बहुत ही रूढ़िवादी सोच का हूं लेकिन बदलाव पर बहस भी करता हूं। ऐसा नहीं है ओटीटी पर कुछ भी दिखाने का लाइसेंस मिल गया है। यह सिर्फ दर्शकों पर निर्भर करेगा कि वह क्या देखना पसंद करते हैं। जहां तक बात क्रिएटिविटी की है तो भीड़ से अलग होने के लिए अश्लीलता और गालियों की ज़रूरत नहीं है। सिर्फ गालियों से ही ओटीटी कंटेंट नहीं बनता। इसने हमें बोल्ड विषयों को लेने की स्वतंत्रता दी है लेकिन इसकी लिखावट भी वैसी ही होनी चाहिए। अगर ऐ ओटीटी के लिए भी नियम बने तो लेखन शैली और बदलनी चाहिए।