जानिए किसने कहा कि अमिताभ बूढ़े हो रहे हैं!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमिताभ बच्चन के ज़बरदस्त प्रशंसक निर्देशक आर बाल्कि को उनसे जुड़ा एक सवाल बड़ा अखरता है। अमिताभ को 'उम्रदराज़' कहने वाले लोग उन्हें बड़े नागवार गुज़रते हैं।
शुक्रवार को रिलीज़ हुई फ़िल्म 'शमिताभ' के निर्देशक आर बाल्कि कहते हैं, "किसने कहा कि अमिताभ बूढ़े हो रहे हैं। वो दिन-ब-दिन जवान होते जा रहे हैं। उनकी उम्र के तमाम कलाकार कहां ग़ायब हो गए। लेकिन बच्चन डटे हैं। सबका मनोरंजन कर रहे हैं।"
हमेशा लाजवाब हैं अमिताभ बच्चन
बिग बी के इतने बड़े फ़ैन आर बाल्कि को क्या कभी नहीं लगता कि वो युवा अमिताभ के ज़माने में आए होते तो उनका और बेहतर इस्तेमाल कर पाते?
इसके जवाब में बाल्कि कहते हैं, "कलाकार की उम्र मायने नहीं रखती। वो स्क्रिप्ट पर जंचना चाहिए। और मेरी कहानी में अमित जी फ़िट बैठते हैं। फिर काहे का ग़म।"
बाल्कि मानते हैं कि पर्दे पर ग़ुस्सा जताने में अमिताभ का कोई सानी नहीं और ऐसा वो बिना अतिरेक के कर गुज़रते हैं। बॉलीवुड में अक्सर बड़े सितारों की कई बार कमज़ोर फ़िल्में भी हिट हो जाती हैं। क्या ये चलन परेशान करने वाला नहीं है।
यहां हर काम अलग-अलग लोग करते हैं
शमिताभ के डायरेक्टर बाल्कि के मुताबिक़, "कई बार लोग अच्छी कहानी की वजह से फ़िल्म देखने जाते हैं। कई बार उन्हें सलमान ख़ान को ही देखना होता है इसलिए फ़िल्म देखने जाते हैं। इसमें ग़लत क्या है। हां, स्टार होने के साथ-साथ फ़िल्म भी अच्छी हो तो सोने पे सुहागा। लेकिन सिर्फ़ सुपरस्टार को देखने भी लोग फ़िल्म जाते हैं तो ये भी सही है।"
बाल्कि को बॉलीवुड में अगर किसी बात से शिकायत है तो वो है लेखन से। वो कहते हैं, "यहां कहानी कोई और लिखता है। संवाद कोई और। स्क्रीनप्ले कोई तीसरा आदमी लिखता है।
तकनीक पर नहीं बल्कि बेहतर लेखन पर निर्भर है भविष्य
सब कुछ अलग-अलग वक़्त पर। ये ग़लत है। आप बिना संवादों के कहानी कैसे लिख सकते हो। बॉलीवुड का बेहतर भविष्य नवीनतम तकनीक पर नहीं बल्कि बेहतर लेखन पर निर्भर करता है।"
बाल्कि मानते हैं कि लेखकों को बेहतर पारिश्रमिक मिलना चाहिए। आर बाल्कि अपनी पत्नी फ़िल्मकार गौरी शिंदे को बेहद संवेदनशील और अच्छी निर्देशक मानते हैं।