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जन्मदिन विशेषः फरहान ने रचा अपने समय से आगे का सिनेमा
रोहित मिश्र
Updated Wed, 09 Jan 2013 09:51 AM IST
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फरहान अख्तर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसे हरफनमौला फिल्मकार हैं जिन्होंने फिल्म की लगभग हर विधा पर हाथ आजमाया और सफल भी हुए। फरहान ने अभिनय किया, निर्देशन किया, गीत लिखे, गाने गाए और फिल्मों को प्रोड्यूस किया है। हर काम में वह सफल पाए गए।
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पटकथा लेखक और गीतकार, जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर ने इंडस्ट्री को एक इंटलैक्चुअल किस्म का सिनेमा दिया है। फरहान द्वारा निर्देशित ज्यादातर फिल्में ऐसी हैं जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की क्वालिटी को उपर ले जाती हैं। खासकर आइडियोलॉजी के स्तर पर। फरहान अपने समकालीन फिल्मकारों में सबसे बेहतर फिल्मी समझ रखने वाले फिल्मकार हैं। उन्हें दोस्ती के मनोविज्ञान को समझने वाला फिल्मकार भी कहा जा सकता है। 'दिल चाहता है', 'रॉक ऑन' और 'जिंदगी मिलेगी न दोबारा' ऐसी तीन फिल्में हैं जो अपने समय से आगे की फिल्में मानी जाती हैं।
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इन तीनों ही फिल्मों में फरहान ने दोस्ती के मनोविज्ञान की क्या खूबसूरत परिभाषा दी है। 2001 में 'जब दिल चाहता है' फिल्म रिलीज हुई थी तो उस समय इंडस्ट्री फॉर्मूला फिल्मों की भेड़चाल में एक-दूसरे को धकियाते हुए चल रही थी। इस फिल्म ने इंडस्ट्री को बताया कि बड़े कलाकारों को लेकर ऐसी फिल्में भी बनाई जा सकती है। 'दिल चाहता है' अपने समय से दस साल पहले की फिल्म थी। जिस इंटलैक्चुअल सिनेमा की बात पिछले कुछ बरस से जोर-शोर से हो रही है सही मायने में इसकी शुरुआत फरहान अख्तर से ही होती है। 'दिल चाहता है' के बाद फरहान ने 'लक्ष्य', 'डॉन' और 'डॉन 2' फिल्मों का निर्देशन किया। यह तीनों ही फिल्में सफल और चर्चित रहीं।
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कैमरे के पीछे छिपे हुए कई सफल चेहरे कई बार कैमरे का सामना करने में उतने प्रभावी नहीं हो पाते हैं। फरहान ने इस मिथक को भी तोड़ा। हीरो जैसा चेहरा मोहरा न होने के बावजूद फरहान ने अपनी ऐक्टिंग, संवाद कहने के तरीके, उसकी टाइमिंग और सेंस ऑफ ह्रयूमर से बताया कि अभिनय इस तरह से भी किया जा सकता है। 'रॉक ऑन' फिल्म से फरहान ने अभिनय में डेब्यू किया। इसके बाद वह कई फिल्मों में दिखे। कार्तिक कॉलिंग कार्तिक जैसी कुछ फिल्में उम्मीद के अनुरूप नहीं चलीं। फिर भी फरहान के अभिनय को पसंद किया गया। अब फरहान 'भाख मिल्खा भाग' जैसी पीरियॉडिक फिल्म में दिखने वाले हैं।
'जिंदगी मिलेगी न दोबारा' फिल्म को यदि गौर से देखा जाए तो यह फिल्म हर उस फ्रेम में कमजोर हो जाती है जिसमें फरहान अख्तर नहीं हैं। बावजूद इसके कि इस फिल्म में रितिक रोशन जैसे बड़े कलाकार हैं। फरहान अख्तर एक अच्छे गायक भी हैं। 'रॉक ऑन' और 'जिंदगी न मिलेगी दोबारा' के गाने गाकर उन्होंने इंडस्ट्री को बता दिया है कि गायकी का हुनर भी उनके झोले में मौजूद है। पटकथाएं और गीत तो वह लिख ही लेते हैं।