Ek Villain Returns Review: अर्जुन और जॉन की ओवरएक्टिंग से मात खाई ‘एक विलेन रिटर्न्स’, तारा और दिशा भी बेअसर
हिंदी सिनेमा के चर्चित भट्ट कैंप से छिटकर अपना अलग वजूद बनाने वाले निर्देशक मोहित सूरी ‘सीक्वल मास्टर’ कहलाते हैं। 17 साल के निर्देशन करियर में उनकी जो दो फिल्में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्में रही हैं, वे हैं ‘मर्डर 2’ और ‘आशिकी 2’। कहते हैं कि महेश भट्ट ने फिल्म ‘आशिकी 2’ देखने के बाद कहा था कि अब अपने करियर में वह इससे अच्छी फिल्म शायद ही बना पाएं। मोहित सूरी ने इसके तुरंत बाद फिल्म ‘एक विलेन’ बनाई। फिल्म हिट रही लेकिन इसके बाद रिलीज हुईं उनकी लगातार तीन फिल्में ‘हमारी अधूरी कहानी’, ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ और ‘मलंग’ को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब मोहित सूरी एक और सीक्वल लेकर आए हैं ‘एक विलेन रिटर्न्स’। ‘राज: द मिस्ट्री कान्टीन्यूज’ को भी मिला लें तो ये उनकी चौथी सीक्वल फिल्म है। उनकी एक और सीक्वल ‘मलंग 2’ पर भी काम जारी है।
छलावे की कहानी की कमजोर पटकथा
मोहित सूरी की ताजा फिल्म ‘एक विलेन रिटर्न्स’ अपनी कहानी का सिरा आठ साल पहले आई उनकी आखिरी कामयाब फिल्म ‘एक विलेन’ से जोड़ती है। पुलिस कहती है कि ‘एक विलेन’ लौट आया है। ये विलेन एक सीरियल किलर है जो ऐसी लड़कियों को मारता है जो लड़कों के एक तरफा प्यार को ठुकरा देती हैं। उसका अपना भी कुछ ऐसा ही इतिहास रहा है और वह अपनी अलग दुनिया में जी रहा है। इस दुनिया में उसे सब कुछ अपने हिसाब का दिखता है। उसकी गर्लफ्रेंड उसके साथ है। वह उसके साथ गाने गाता है। साथ में नहाता है। और जब मन करता है हमबिस्तर भी हो लेता है। लेकिन, ये सच है या छलावा, उसे भी नहीं पता। कहानी की गुत्थी दर्शकों को उलझाती चलती है। कभी छह महीने पीछे तो कभी आज में तो कभी फिर तीन महीने पीछे। फिल्म की शुरुआत में दो कहानियां इसी टाइम लाइन पर चलती हैं। फिर दोनों कहानियां आकर वहां मिलती हैं जहां एक और सिरफिरा आशिक अपनी गर्लफ्रेंड के घर में घुसता है। पुलिस दोनों के सिरे जोड़ती है और तहकीकात में जो कुछ सामने आता है, उसका परिणाम कहानी को फिर वहां ले जाता है जहां फिल्म ‘एक विलेन’ खत्म हुई थी। मोहित सूरी फिल्म की तीसरी कड़ी की गुंजाइश भी छोड़ जाते हैं।
तर्क के धरातल पर बिखरी फिल्म
फिल्म ‘एक विलेन रिटर्न्स’ एक कमजोर कहानी पर आधारित फिल्म है। ये कहानी और फिर इस पर बुनी गई पटकथा हर मामले में लड़कियों को ही दोषी ठहराती है। एक इंटरनेशनल ब्रांड के शोरूम में काम करने वाली लड़की बोनस और प्रमोशन के लिए अपने बॉस के साथ हमबिस्तर होने को जायज ठहराती है। बारिश में भीगते अपने प्रेमी को एक दूसरी लड़की इसलिए दुत्कार कर भगाने की कोशिश करती है क्योंकि वह अपना सच्चा प्रेम उसके सामने प्रकट कर रहा है और वह लड़की दूसरा प्रेमी तलाश कर चुकी है। कोई एक ऐसा शहर है जिसमें रईसों की शादियों में होने वाले हंगामों पर पुलिस चूं तक नहीं करती। पुलिस वाले मराठी बोलते हैं तो माना जा सकता है शहर मुंबई ही है लेकिन एक दर्जन से ज्यादा लड़कियों के मर्डर हो जाने पर भी पुलिस सिर्फ एक गायिका के लापता होने पर ही सबसे ज्यादा सक्रिय दिखती है। आखिर, फिल्म की वह हीरोइन जो ठहरी।
मोहित सूरी के हाथ से निकली फिल्म
कहानी और पटकथा के स्तर पर कमजोर होने के अलावा फिल्म ‘एक विलेन रिटर्न्स’ में मोहित सूरी का निर्देशन भी पटरी से उतरा हुआ है। वह अपने कलाकारों को काबू में नहीं कर पाए हैं। जॉन अब्राहम को छोड़ दें तो सब ओवरएक्टिंग करते नजर आते हैं। जॉन अब्राहम भी शुरू में अपने किरदार के हिसाब से उखड़े उखड़े नजर आते हैं। फिर धीरे धीरे वह रंग में आने की कोशिश करते हैं लेकिन उनके किरदार के साथ तमाम लोचे हैं। एक लड़की एक टैक्सी ड्राइवर को लगातार बेवकूफ बनाकर पैसे खर्च करवा रही है और उसकी आंखें तब जाकर खुलती हैं जब वह उसे किसी दूसरे के साथ हमबिस्तर होते देख लेता है। हिंदी सिनेमा देखने वाले दर्शकों की अनुभूतियों और संवेदनाओं का ये फिल्म हर मोड़ पर नया इम्तिहान लेती है। कहने को चिड़ियाघर कहानी का एक हिस्सा है लेकिन फिल्म के सारे किरदार भी किसी चिड़ियाघर के अजूबे जैसे ही हैं। हैरानी तब होती है जब पुलिस एक सीरियल किलर का नाम स्माइली किलर रख देती है।
अर्जुन, दिशा, तारा का निष्प्रभावी अभिनय
अर्जुन कपूर पूरी कोशिश करते दिखते हैं कि किसी तरह हिंदी सिनेमा में वह एक सुपरस्टार के खांचे में फिट हो जाएं लेकिन उनका अभिनय और उनकी देहयष्टि बार बार उनके कदम पीछे खींच लेती है। तारा सुतारिया का किरदार भी स्याह है। वह कामयाबी के लिए किसी भी गुनाह की हिस्सेदार होने को तैयार है। अभिनय उनसे होता नहीं है और लिप सिंक गानों पर वह होंठ तो मैच करा लेती हैं पर उनके चेहरे पर वैसे भाव नहीं आते। और, हां फिल्म में दिशा पाटनी भी हैं। हर दूसरे मौके पर बदन से कपड़े उतार फेंकने को उतावली मौकापरस्त लड़की के किरदार में। अभिनय दिशा पाटनी से भी होता नहीं है। कहानी के चारों किरदार देखा जाए तो आम जिंदगी के हिसाब से किसी विलेन से कम नहीं है और सबको इसका गुरूर भी है। श्वेत, श्याम किरदारों पर पनपते रहे हिंदी सिनेमा में सिर्फ स्याह किरदारों पर बनी फिल्म ‘एक विलेन रिटर्न्स’ जैसी फिल्म की स्वीकारोक्ति आसान नहीं है।
देखें कि न देखें
फिल्म का सबसे कमजोर पहलू है इसका संगीत। पिछली फिल्म ‘एक विलेन’ के गाने ‘तेरी गलियां’ के नए संस्करण को छोड़ दें तो और कोई गाना फिल्म खत्म होने के बाद याद नहीं रह जाता। टी सीरीज जैसी म्यूजिक कंपनी से हर बार ये उम्मीद रहती है कि वह हिंदी सिनेमा में संगीत का एक नया अध्याय लिखेगी लेकिन हर बार कुछ पुराने पन्ने ही पलट कर सामने आते रहते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक में शोर ज्यादा है और इसकी सिनेमैटोग्राफी और संपादन में भी ऐसा कुछ खास नहीं है जिसकी तारीफ की जा सके। हिंसा और देहदर्शन से खुश रहने वाले दर्शकों के अलावा बाकी आम जनता के लिए फिल्म में कुछ खास नहीं है। फिल्म टाइमपास करने के लिए भी देखनी हो अपने रिस्क पर ही देखें।