Basu Chatterjee Birth Anniversary: फिल्मों में होता था जिंदगी का सार, मिडिल क्लास कहानियों को पर्दे पर उतारा
जब दर्शक अमिताभ बच्चन का सिनेमा में एंग्री यंग माना वाला अंदाज सराहा रहे थे, उसी समय में निर्देशक बासु चैटर्जी दिल को छू लेने वाले सीधी-सरल सी कहानियां पर्दे पर लेकर आ रहे थे। इन फिल्मों को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। जानिए, निर्देशक बासु चैटर्जी की जयंती (10 जनवरी 1927) पर उनकी फिल्मों से जुड़ी खास बातें।
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विस्तार
बासु चैटर्जी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर अस्सिटेंट की। आगे चलकर उन्होंने खुद ही फिल्में बनाना शुरू किया, वह अपनी फिल्मों के डायलॉग, स्क्रीन प्ले भी लगभग खुद ही लिखा करते थे। वह भी निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की तरह की अलग तरह की कहानियां पर्दे पर लाए, जिनमें उन्होंने एक अलग तरह का सिनेमा रचा, जो बॉलीवुड की मार-धाड़ वाली फिल्मों से अलग रहा।
मिडिल क्लास की कहानी
बासु चैटर्जी ने साल 1969 में बतौर निर्देशक पहली फिल्म बनाई ‘सारा आकाश’। वैवाहिक जीवन की परेशानियों को इस फिल्म में बड़ी ही संजीदा तरीके से दिखाया था। इसके बाद बासु चैटर्जी ने ‘पिया का घर’ और ‘रजनीगंधा’ जैसी कई और फिल्में बनाई, जिसमें वैवाहिक जीवन और प्रेम कहानियों को दिखाया, लेकिन इन्हें दिखाने का ढंग बिल्कुल अलग रहा। बासु चैटर्जी की कई फिल्मों में एक्टर अमोल पालेकर, मुख्य भूमिकाओं में रहे, उनकी एक अलग किस्म की छवि बनाने में कहीं ना कहीं बासु चैटर्जी का हाथ रहा है, अमोल पालेकर मिडिल क्लास आदमी का चेहरा ही बड़े पर्दे पर बन गए। बासु चैटर्जी की फिल्मों का सार निकाला जाए, वह मिडिल क्लास लोगों की कहानियां कहने पर ज्यादा जोर देते रहे।
अलग किस्म की प्रेम कहानियां
बासु चैटर्जी की फिल्मों में जब प्रेम कहानियां दिखाई जाती थीं तो उसमें हीरो, हीरोइन के लिए गुंड़ों से लड़ता-भिड़ता नहीं है। ये प्रेम कहानियां बहुत सरल सी होती हैं। सामान्य समस्या कैसे प्रेम कहानियाें के लिए परेशानी बनती है, यही सब फिल्म में होता था। जैसे बासु चैटर्जी की फिल्म ‘रजनीगंधा’ और ‘छोटी सी बात’ में प्रेम कहानियों में कोई बड़ी समस्या नहीं है। फिल्म ‘रजनीगंधा’ में हीरोइन एक लड़के के प्रेम में है लेकिन अचानक उसकी जिंदगी में पुराने प्रेमी की एंट्री होती है, तब उसके मन में जो सवाल हैं? उसी पर फिल्म की पूरी कहानी है। यह फिल्म साहित्यकार मनु भंडारी की रचना ‘यही सच है’ पर आधारित रही।
आर्ट-कमर्शियल सिनेमा का संगम
बासु चैटर्जी की बनाई बाकी फिल्मों को भी दर्शक जब देखते हैं तो लगता है कि वह आर्ट, कमर्शियल फिल्मों के बीच की कोई फिल्म देख रहे हैं। बासु चैटर्जी की फिल्मों में सोशल मैसेज को भी कई बार कॉमेडी का सहारा लेकर कहा गया। साथ ही उनकी फिल्मों के गीत भी दर्शकों को बहुत भाते थे। बासु चैटर्जी ने अपनी फिल्मों की हीरोइन को एक सामान्य लड़की की तरह पर्दे पर दिखाया, इससे महिला दर्शक आसानी से उनकी हीरोइन से रिलेट कर पाती थीं।
ये रही सबसे चर्चित फिल्में
बासु चैटर्जी की चर्चित फिल्मों की बात की जाए, तो इसमें ‘छोटी सी बात’, ‘रजनीगंधा’, ‘चितचोर’, ‘खट्टा-मीठा’ ‘बातों-बातों’ और ‘चमेली की शादी’ रही। इन सभी फिल्मों की प्रेम कहानियां दर्शकों का दिल छूने में कामयाब रही हैं। आज भी ये फिल्में दिखी और सराही जाती हैं।