यूट्यूब पर गानों में गीतकार का नाम जोड़ने की फिर उठी मांग, योगेश के तमाम गाने डिजिटल पर बेनाम मौजूद
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हिंदी संगीत की दुनिया के जाने माने गीतकार योगेश को राजेश खन्ना की सुपरहिट फिल्म आनंद, अमोल पालेकर की फिल्म रजनीगंधा और अमिताभ बच्चन- जया भादुड़ी की मिली जैसी कई फिल्मों में बेहतरीन गीत लिखने के लिए जाना जाता है। लेकिन, योगेश के काम के बारे में या तो इंटरनेट पर विकीपीडिया जानता है या फिर सिर्फ उनके करीबी दोस्त। क्योंकि यूट्यूब पर उपलब्ध योगेश के कई बेहतरीन गीतों में उनका नाम तक दर्ज करना जरूरी नहीं समझा गया।
योगेश के गीतों के पक्के प्रशंसक और पटकथा लेखक अमर नाथ झा कहते हैं, "यूट्यूब पर चल रहे शेमारू और सारेगामा जैसी कई म्यूजिक कंपनियों के चैनल योगेश के लिखे गीतों से लाखों करोड़ों रुपये कमाते हैं। लेकिन, उनके गीत के साथ एक गीतकार के रूप में उनका नाम नहीं दिया जाता। यह बात सिर्फ योगेश की नहीं है। हिंदी संगीत जगत के कई ऐसे गीतकार हैं जिनके गीतों में गायक, फिल्म के निर्देशक, कलाकार और संगीतकार का भी नाम दिया जाता है। लेकिन, गीतकार के नाम को अक्सर लिखा ही नहीं जाता।"
वह तो भला हो आयुष्मान खुराना की दो साल पहले आई फिल्म 'अंधाधुन' के निर्माता संजय राउतरे का जिन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करके योगेश को श्रद्धांजलि दी। वरना लोगों को तो पता ही नहीं चलता कि फिल्म में आकाश प्रमोद सिन्हा की श्रद्धाजंलि के लिए जो गीत 'गुजर जाए दिन दिन' गाया जाता है, वह गीत असल में योगेश ने लिखा है। क्योंकि फिल्म 'अंधाधुन' से यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस गाने में गायक और फिल्म के कलाकारों का नाम तो है लेकिन गीतकार का नाम कहीं भी मौजूद नहीं है।
संजय बताते हैं, "यह गीत योगेश ने वर्ष 1972 में आई फिल्म 'अन्नदाता' के लिए लिखा था जिसको अमित सेन ने निर्देशित किया है और जिसमें अनिल धवन, जया भादुड़ी, गोपी कृष्णा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं। यह तो सिर्फ एक गीत है। अगर योगेश के जीवन की कार्य यात्रा को खोजा जाए तो उसमें पाया जाएगा कि दसियों ऐसे बेहतरीन गीत हैं जिनको योगेश ने लिखा है। लेकिन, गीत के पूरे विवरण में कहीं भी योगेश का नाम नहीं है। उनमें से वर्ष 1974 में आई फिल्म 'रजनीगंधा' का गीत 'कई बार यूंही देखा है' भी एक है।"
संजय से बातचीत के बाद यूट्यूब पर तमाम और गीतों को खोजने की कोशिश की गई। इनमें राजेश खन्ना की फिल्म 'आनंद' का गीत 'जिंदगी कैसी है पहेली हाय' भला कौन भूल सकता है। इस गीत को भी योगेश ने ही लिखा है। म्यूजिक कंपनी सारेगामा ने यूट्यूब पर इस गाने में योगेश का नाम लिखा है। अपने निधन से पहले योगेश ने कई दशक मुंबई में गुमनामी के गुजारे हैं। निधन भी उनका अपने एक करीबी दोस्त के यहां वसई रोड में हुआ।