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सुशांत सिंह राजपूत: चांद के उस पार का एक सितारा..!
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सुशांत सिंह राजपूत एक अधूरी दास्तां रह गए हैं. बिना पते की कोई चिट्ठी.
- फोटो : सोशल मीडिया
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सुशांत सिंह राजपूत एक अधूरी दास्तां बन गए. बिना पते की कोई चिट्ठी. नुमाइश से पहले दफ्न हो चुका हुनर. जैसे विसेंट वॉन गॉग. एक गोली की आवाज में खो जाने वाली जिंदगी.
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विसेंट स्टैरी नाइट्स का सितारा था. सुशांत ट्विटर पर उस नाइट को सहेजकर रात के अंधेरे में समा गया. अफसोस की जिस दिल में वॉन गॉग को समझने के रंग थे, वह दिल एक रंगहीन दुनिया में टूटकर बिखर गया.
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इस दुनिया में वॉन गॉग के हिस्से वही आया जो उसके साथ था. सुशांत के भी हिस्से वही आया जो उसने संजोया था.
मलाल यह है की आखिरी अलविदा के बाद ही दुनिया पता पूछने निकलती है.
जिन संदूकों को पहले खंगालना था उनकी धूल आज झड़ रही है. जिस सुगंध की तलाश में काफिलों को निकल पड़ना था उसे महसूस भर किया जा रहा है.
फानी दुनिया का दस्तूर रहा है कि हुनरमंदों के हिस्से जीते जी कुछ नहीं आता, सिवाय मौत के. उनकी मृत्यु मौत के बाद ही स्मृतियां ज्यादा सुर्ख होती हैं. नाम, चेहरा, हुनर तराशे जाते हैं. भूली-बिसरी बातें किस्से बन जाते हैं.
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खत्म होने के बाद अभागी जिंदगी ज्यादा चमकती है क्योंकि वह किसी के लिए खतरा नहीं होती..!
कहते हैं- जिनकी हसरतों की चादर बड़ी होती है वहां कई अरमान एक साथ ख्वाब देखा करते हैं, लेकिन नियति उनके हिस्से में जिंदगी की रेखा को बहुत छोटा बनाती है.
कभी मौत के मुहाने से इरफान ने एक खत जिंदगी के नाम लिखा था लेकिन सुशांत जिंदगी का आखिरी वॉ्टसएप मैसेज भी नहीं छोड़ पाए. एक रेखा बीच में टूट गई और एक शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई.
सुशांत के सपनों की रेखा बहुत लंबी थी जबकि हुनर का आसमान फैला हुआ था. उन्हें चुनना भर था की वे किस सपने को ताक पर रखते और किस ख्वाब में रंग भरते, किस हसरत को पूरा करते और किस अरमान को सोने देते.
फिजिक्स उनके दिमाग की ऑक्सीजन थी और अभिनय उनके दिल की धड़कन, टेनिस उनकी रगों में दौड़ता था और पेटिंग जिंदगी की तलाश थी.
टेलीस्कोप में गड़ी हुई सुशांत की आंखों की चमक को कोई नहीं पहचानता था. हर मुलाकात उन्हें अकेला करती थी और हर बार अकेला होना उन्हें अलग बना देता था.
जब वे अलग होते थे तो अलहदा होते थे. उनके प्रिय वॉन गॉग की तरह. दोनों जीवन की तलाश में निकले थे जो उन्हें मृत्यु में हासिल हुई..
कौन जानता है कि वॉन गॉग पेंटिंग छोड़ना चाहता था और सुशांत एक्टिंग.!
सुशांत चांद के पार का सितारा था. बेशकीमती और सदियों तक चमकने वाला.
जीते जी धरती पर उसकी चमक फीकी पड़ रही थी..!
अलविदा..!