आनंद नीलकंठन ने राम कथा के सागरों से भरी एक नई गागर, 29 एपीसोड में समेटे नए जमाने के नए सबक
चर्चित वेब सीरीज ‘बाहुबली: बिफोर द बिगनिंग’ की वजह से लगातार चर्चा में बने रहे चर्चित लेखक आनंद नीलकंठन अब रामायण का एक नया सोपना लेकर आने वाले हैं।
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चर्चित वेब सीरीज ‘बाहुबली: बिफोर द बिगनिंग’ की वजह से लगातार चर्चा में बने रहे चर्चित लेखक आनंद नीलकंठन अब रामायण का एक नया सोपना लेकर आने वाले हैं। राम कथा के अलग अलग प्रसंगो और चरित्रों की कहानियां उनके नजरिये से लिखने में महारत रखने वाले आनंद को अपनी पहली पुस्तक ‘‘असुर: टेल ऑफ़ द वैंक्विश्ड’ से ही खूब चर्चा मिली। 2012 में प्रकाशित हुई रावण के दृष्टिकोण से लिखी गई ये कथा अमेजन की बेस्ट सेलर किताबों में रही है। रामायण श्रृंखला पर यह उनकी पहली पुस्तक रही। महाभारत और बाहुबली पात्रों पर आधारित प्रकाशित उनकी किताबों का तमाम भारतीय भाषाओं के अलावा विदेश में भी अनुवाद हो चुका है। आनंद की अगली कृति भी रामायण पर आधारित है और इसे पढ़ने की बजाय सुना जा सकेगा।
आडियोबुक ‘मैनी रामायणाज़ एंड मैनी लेसन्स’ को अंग्रेजी और हिंदी में लॉन्च किया गया है। इसके तहत आनंद ने इस महान गाथा के 29 एपिसोड्स बनाए हैं और इसे इस तरह से लिखा गया है कि श्रोताओं को रामकथा में शामिल जिम्मेदारी, कर्म, नेतृत्व और ज्ञान से जुड़े सारे सबक इन्हें सुनने के साथ साथ मिलते रहें।
आनंद नीलकंठन के मुताबिक उन्होंने ने इस महागाथा को अलग-अलग वर्जन में प्रस्तुत करने की कोशिश की है। इसके जरिए वह हर उम्र के लोगों को ऐसी सीख देना चाहते हैं जो हमेशा उनके साथ बनी रहे। इस कहानी को कालक्रम के अनुसार सुनाया गया है। इसके हरेक एपिसोड में ऋषि वाल्मीकि, भगवान राम, ऋषि विश्वमित्र, सीता, भरत की महानता के किस्से सुनाए गए हैं।
‘मैनी रामायणाज़ एंड मैनी लेसन्स’ की कहानी को सुनाया है मनीष डोंगरदिवे ने और इसके हिंदी संस्करण, ‘रामायण- अनेक कथाएं, अनेक संदर्भ’ को बाबला कोच्चर ने अपनी आवाज दी है। इस बारे में आनंद नीलकंठन कहते हैं, “रामायण’ भारत के महानतम महाकाव्यों में से एक है और कहानी कहने की हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। पूरे एशिया में ‘रामायण’ के 300 रूप मौजूद हैं, जिनमें वाल्मीकि वाला संस्करण भी शामिल है। ‘मैनी रामायणाज़ एंड मैनी लेसन्स’ के माध्यम से मैं ‘रामायण’ के विभिन्न रूपों के साथ कहानी का एक अलग अनुभव देना चाहता हूं। इससे लोग अन्य संस्कृतियों में मौजूद विभिन्न मान्यताओं और दृष्टिकोण को भी जान पाएंगे।”