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'शोले' पर अब क्या कहते हैं धर्मेंद्र, अमिताभ, हेमा-जावेद

Thu, 13 Aug 2015 09:06 AM IST
Updated Thu, 13 Aug 2015 09:06 AM IST
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Amitabh, Dharmendra and Hema view on Sholay today

तीन दिन बाद शोले को रिलीज हुए 40 साल हो जाएंगे। आज जब हम बैठते हैं तो कितना कुछ याद आ जाता है, जरा सोचिए अमिताभ-धर्मेंद्र क्या सोचते होंगे? जब हमने ये जानने की कोशिश की तो कई दिल छू लेने वाली बातें सामने आईं।

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शोले का जय यानि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन कहते हैं कि जय को कभी नहीं भूल सकता। यह एक ऐतिहासिक महागाथा थी, जो आज भी मील का पत्थर है। इसके डायलॉग आज भी युवाओं की जुबां पर हैं।
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उस दौरान मैं दिन में शोले की शूटिंग करता था, और रात में दीवार की। मैं रात भर मुंबई में शूटिंग करने के बाद सुबह-सुबह शोले के लिए बंगलुरू की फ्लाइट पकड़ता था। आज भी उन दिनों को याद करता हूं, तो एक अलग सी खुशी मिलती है।

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वीरू और बसंती के लिए बहुत खास थी ये फिल्म

Amitabh, Dharmendra and Hema view on Sholay today

शोले के वीरू यानि धर्मेंद्र फिल्म को याद करते हुए कहते हैं कि उस वक्त एक साथ कई कमाल हो रहे थे। किरदारों से लेकर तकनीक समेत शोले में बहुत कुछ खास था। वो आगे जोड़ते हैं कि सलीम-जावेद साहब के लिखे डायलॉग्स लोगों को क्या खूब पसंद आए। रमेश सिप्पी के निर्देशन का कमाल है कि लोग आज भी इस फिल्म पर चर्चा करने से बच नहीं पाते।

कभी-कभी लगता है कि शायद शोले की पूरी टीम इस फिल्म को करने के लिए ही पैदा हुई थी। विशेष तौर पर हम छह लोग (मैं, धरम जी, जया, अमित जी, अमजद खान और संजीव कुमार) इस फिल्म के मुख्य किरदार बने।

वहीं फिल्म कालिया यानि वीजू खोटे बताते हैं कि लोगों को वीजू खोटे याद हो या न हो, लेकिन शोले का कालिया सबको याद है। मेरे लिए इससे ज्यादा सम्मान क्या होगा?

आज क्या कहते हैं सलीम-जावेद-रमेश

Amitabh, Dharmendra and Hema view on Sholay today

शोले की लेखक जोड़ी के सलीम खान बताते हैं कि लोग उनसे पूछते हैं कि आज आपको शोले लिखनी होती तो आप कैसा लिखते। क्या बदलवा करते। इस वो कहते हैं कि जिस तरह क्रिकेट में कभी जीतने वाली टीम को बदलते नहीं। मैं भी शोले में रत्ती भर बदलाव नहीं करना चाहूंगा। शोले दोबारा नहीं बन सकती।

लेखक जोड़ी सलीम-जावेद अख्तर कहते हैं कि यह कमाल की फिल्म थी, जो 40 साल बाद भी सलीम खान और मेरे लेखन को प्रमोट कर रही है। मैं सामान्यतः अपनी पुरानी फिल्में नहीं देखता, लेकिन कभी-कभी समय मिलने पर शोले को जरूर देख लेता हूं।

निर्देशक रमेश सिप्पी कहते हैं कि अगर शोले के सीक्वल का आइडिया मुझे आता, तो अब तक मैं इसे बना चुका होता। मैं नहीं समझता कि शोले को किसी सीक्वल की जरूरत है।

उनके दिल की बात, जो दुनिया छोड़ गए, पर हमारे दिल में हैं

Amitabh, Dharmendra and Hema view on Sholay today

इस अभिनेता की जब मौत हुई तो हिन्दी अंग्रेजी के अखबरों का शीर्षक था, 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई'। इससे पता चलता है कि शोले का किस कदर असर था उसके किरदारों पर, जी हां बात कर रहे हैं, एके हंगल की। वो कहते थे कि रहीम चाचा ‌के किरदार ने मुझे घर-घर में चाचा की पहचान दे दी थी। मैं जहां भी जाता था, लोग मुझे चाचा पुकारते थे। यह रोल मेरे बेहतरीन प्रदर्शन में से एक है।

शोले को लेकर सांभा यानि मैकमोहन कहते थे कि 'जब मुझे मालूम चला कि फिल्म में मेरा सिर्फ एक ही सीन है, तो इतना नाराज था कि इस फिल्म के प्रीमियर लॉन्च पर भी नहीं गया। लेकिन जब एक दिन लोगों ने मुझे सांभा-सांभा कहकर पुकारा और मुझसे ऑटोग्राफ मांगे, तो मैं खुद को यह फिल्म देखने से रोक नहीं सका।'

शोले का गब्बर और ठाकुर भी अब इस दुनिया में नहीं है। इस फिल्म के केंद्र में वही दोनों थे, और फिल्म ने दोनों की जिंदगी बदल थी। शोले के 40 साल के विशेष सत्र में हम उन दोनों किरदारों की रील लाइफ और रीयल लाइफ और उनके दिल की बात पर अलग से चर्चा करेंगे।

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