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दुनिया भर के समीक्षकों का दिल जीतने वाली 'अंधाधुन' के प्रोडक्शन हाउस की अगली फिल्म का एलान
Tue, 15 Oct 2019 12:01 PM IST
shrilata biswas
मुंबई डेस्क
मुंबई डेस्क
Published by: shrilata biswas
Updated Tue, 15 Oct 2019 12:01 PM IST
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संजय राउतरे, जिग्ना वोरा, श्रीराम राघवन और एस हुसैन जैदी
- फोटो : अमर उजाला
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बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों का और दुनिया भर के फिल्म फेस्टिवल्स में समीक्षकों का दिल जीतने वाली आयुष्मान खुराना, तब्बू और राधिका आप्टे स्टारर फिल्म अंधाधुन के बाद निर्माता संजय राउतरे के प्रोडक्शन हाउस मैचबॉक्स पिक्चर्स ने अपने अगले प्रोजेक्ट का एलान कर दिया है। मैचबॉक्स की अगली फिल्म मुंबई की चर्चित पत्रकार जिग्ना वोरा की किताब बिहाइंड बार्स इन भायखला पर बनेगी।
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मुंबई के मशहूर पत्रकार जे डे की 11 जून 2011 को मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने दिन दहाड़े हत्या कर दी थी। पुलिस का आरोप रहा कि डे की हत्या जिग्ना वोरा ने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन से कहकर कराई है। अदालत ने जिग्ना और एक अन्य अभियुक्त को इस मामले में बरी कर दिया है। मुकदमे के दौरान जिग्ना जितने दिन भायखला जेल में रहीं, वह वहां बंद कैदियों से बातें करती रहीं। भायखला जेल में महाराष्ट्र की महिला कैदियों को भी रखा जाता है। जिग्ना ने जेल में बंद इन्हीं महिला कैदियों के संस्मरणों को अपनी किताब में संकलित किया है।
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निर्माता संजय राउतरे कहते हैं, 'मैचबॉक्स पिक्चर्स को इस बात की खुशी है कि श्रीराम राघवन जैसे निर्देशक लगातार हमें अच्छी कहानियों को चिन्हित करने में मदद कर रहे हैं। भायखला जेल की इन महिला कैदियों से जुड़ी सच्ची घटनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की जरूरत हम महसूस करते हैं और इसके लिए मैचबॉक्स ने जसपिंदर सिंह कंग के साथ इस प्रोजेक्ट पर काम करने का फैसा किया है।'
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जिग्ना वोरा की किताब का अनावरण करने वाले निर्देशक श्रीराम राघवन कहते हैं, 'किताब बिहाइंड द बार्स को लेकर मैं काफी जिज्ञासु रहा हूं क्योंकि यह जेल के जीवन पर एक क्राइम रिपोर्टर का नजरिया है। इस किताब के कुछ हिस्से मुझे अपनी ही फिल्म एक हसीना थी की भी याद दिलाते हैं। ये किताब जिग्ना के एक पत्रकार के रूप में करियर की बात करती है और ये बताती है कि कैसे वह इस मामले में फंसी, कैसे उन्होंने जेल में दिन बिताए और आखिरकार कैसे अदालत ने उन्हें बरी किया। इसके अलावा किताब में जिग्ना की जेल में बंद कैदियों से बातचीत के भी रोचक संस्मरण हैं।'