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सुचित्रा सेन: शोहरत के सलीब पर टंगी जिंदगी

Fri, 17 Jan 2014 10:57 AM IST
Updated Fri, 17 Jan 2014 10:57 AM IST
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Actress suchitra sen profile

जीते-जी लीजेंड बन गए देवानंद की फिल्म गाइड का एक डायलॉग है- ये जिंदगी भी एक नशा है दोस्त, जब चढ़ता है तो पूछो न क्या आलम होता है। उनका यह डायलॉग सिल्वर स्क्रीन की जिंदगी पर भी बिल्कुल फिट बैठता है।

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यहां जब एक्टर-एक्ट्रेस की शोहरत का खुमार चढ़ता है तो सातवें आसमान पर होता है लेकिन जब उतरता है तो उन्हें लोगों की निगाहों से इतनी दूर ले जाता है कि वो खुद को भी पहचानने से इनकार कर देते हैं।
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पिछले दिनों जब अपने जमाने की मशहूर एक्ट्रेस सुचित्रा सेन के अस्पताल में भर्ती होने की खबर आई तो एक बार फिर फिल्मी दुनिया की इस हकीकत का सामना हुआ। आज की पीढ़ी भले ही उन्हें राइमा या रिया सेन की नानी के तौर पर जाने लेकिन वह भी क्या जमाना था, जब सुचित्रा सेन एक सनसनी थीं।
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पहले बांग्ला और फिर हिंदी फिल्मों में उनके बेहतरीन अभिनय ने उन्हें अपने दौर का सिरमौर अभिनेत्री बना दिया था। बांग्ला फिल्मों के पहले सुपर स्टार उत्तम कुमार के साथ उनकी रोमांटिक जोड़ी लगभग दो दशक तक चली।

सिल्वर स्क्रीन पर कोई रोमांटिक जोड़ी शायद ही इतनी लंबी चली हो। 1952 में फिल्म शेष कोथाय से अपना फिल्मी सफर करने वाली सुचित्रा पहली भारतीय अभिनेत्री थीं, जिन्हें अपने अभिनय के लिए किसी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड से नवाजा गया था।

खुद को समेटने लगी थी वो...

Actress suchitra sen profile

तीन दशक के अपने लंबे कैरियर में उन्होंने लगभग 52 बांग्ला और सात हिंदी फिल्मों में एक्टिंग की। हिंदी फिल्मों में विमल राय की देवदास की पारो को सुचित्रा ही जीवंत कर सकती थीं। बाद में गुलजार की आंधी में भी उन्होंने उतना ही जीवंत अभिनय किया था।

इसे इंदिरा गांधी के निजी जीवन पर बनी फिल्म माना गया। बांग्ला फिल्मों में सात पाके बांधा, अग्निपरीक्षा, सप्तपदी, दीप जोले जाय जैसी फिल्में देने वाली सुचित्रा को अब अभिनय की दुनिया में अब कुछ साबित नहीं करना था।

लेकिन सत्तर के दशक के आखिर में आई उनकी बांगला फिल्म प्रणय पाश फ्लॉप क्या हुई, उन्होंने अपने  लाखों फैन की नजरों से दूर एकांत जीवन अपना लिया। अपने कैरियर के चरम पर सब कुछ छोड़ कर सुचित्रा ने जो एकांत अपनाया था उसकी भी एक इंतिहा थी।

उन्होंने बिल्कुल सादा जीवन अपना लिया था। बेहद कम खाना, संकरे बिस्तर में कड़े गद्दे पर सोना और सूती की साड़ी पहनना। धार्मिक संगीत सुनना और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना। उन्होंने अपनी दुनिया एक फ्लैट के अंदर समेट ली थी। बाहर के लोगों से बिल्कुल कटा हुआ जीवन।

बेटी मुनमुन सेन का परिवार अगले अपार्टमेंट्स में रहता था । लेकिन बेटी, दामाद और नातिनों (राइमा और रिया) को भी उनसे मिलने के लिए इजाजत लेनी पड़ती थी। कहते हैं कि उन्होंने रामकृष्ण मिशन के भरत महाराज के संपर्क में आकर आध्यात्मिक जीवन अपना लिया।

शराब और जुआ के आदी हो चुके थे सुच‌ित्रा के पति

Actress suchitra sen profile

सुचित्रा को 1978 के बाद सिर्फ एक बार घर से निकल कर सार्वजनिक जगह पर देखा गया, जब वह भरत महाराज की मृत्यु पर नंगे पांव चल कर बेलूर मठ पहुंची थीं।

उनके नजदीकी सहयोगी और उन पर किताब लिख चुके गोपाल कृष्ण राय का कहना है कि सुचित्रा चाहती थीं कि दुनिया उन्हें उसी तरह याद रखे, जैसा वह खुद को फिल्मों में दिखाती थीं और इसमें वह सफल रही थीं। ठीक हॉलीवुड की ग्रेटा गार्बो की तरह।

गार्बो ने भी इसी तरह चमक-दमक के बीच फिल्मी ग्लैमर को अलविदा कह दिया था। सुचित्रा की नातिन राइमा सेन कहती हैं कि उनकी नानी कभी-कभार घर से निकलती थी लेकिन पूरी तरह छिप कर।

उनका तीन चौथाई चेहरा ढका होता होता था। आंखों पर काला चश्मा होता था। फिर भी लोग उन्हें पहचान लेते थे।

यह कहना बड़ा मुश्किल है कि सुचित्रा को कौन सी चीज सक्रिय फिल्म जीवन से दूर ले गई लेकिन इतना तय था कि उनकी निजी जिंदगी की उथल-पुथल में इसका अहम रोल था।

उनके पति बुरी तरह शराब और जुआ के आदी हो चुके थे। सुचित्रा से उनकी दूरी बन गई थी।

नलिनी, प्रिया, परवीन बॉबी, मीना कुमारी और भी है कतार

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बहरहाल, सुचित्रा ने खुद को जिस तरह एकांत में ढाल लिया वैसे उदाहरण उनके बाद भी दिखे। बॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों ने  अपन ग्लैमर का नशा उतरते देखा और खुद को समेट लिया था।

नलिनी जयवंत, प्रिया राजवंश, परवीन बॉबी, मीना कुमारी से लेकर साधना ने भी ऐसी ही जिंदगी अपना ली थी।

यह वह दौर था, जब इन अभिनेत्रियों की कोई समांतर जिंदगी नहीं थी। इनका जिक्र सिर्फ गॉसिप पत्रिकाओं में होता था। नरगिस दत्त जैसी इक्का-दुक्का अभिनेत्रियां ही कुछ हद तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय दिखीं।

टीवी पर अभिनय की दूसरी पारी के मौके नहीं थे न ही इन अभिनेत्रियों में सार्वजनिक जीवन के प्रति इतना रुझान दिखता था। वे अपने आसपास रचे गए आभामंडल की शिकार होकर रह गईं। बॉलीवुड मर्दों की दुनिया थी(आज भी है) और ज्यादातर अभिनेत्रियां इस वर्चस्व को तोड़ नहीं पाईं।

कोई किसी अभिनेता की प्रेमिका बन कर छली गई तो किसी ने अपनी तमाम हसरतों को गला घोंट कर किसी डायरेक्टर का दामन लिया था। वैसे अभिनेताओं और निर्देशकों का साथ पकड़ा जिनकी कई शादियां हो चुकी थीं और जो कई बार परिवार उजाड़ चुके थे।

इन अभिनेत्रियों के बाद की पीढ़ी ने अपनी जिंदगी को कहीं ज्यादा सधे अंदाज में जीया। जया बच्चन, शर्मिला टैगोर, हेमामालिनी, पद्मिनी कोल्हापुरे, टीना मुनीम और पूनम ढिल्लो जैसी अभिनेत्रियों ने अपनी दूसरी पारी को संतुलित बनाए रखा।

उन्होंने वक्त से तालमेल बिठाते हुए फिल्मों और टीवी में अभिनय किया। विज्ञापन किए। परिवार बसाया। राजनीति में सक्रिय रहीं और  सार्वजनिक जीवन के दूसरे मंचों पर खुद को व्यस्त रखा। उन्होंने ग्लैमर की दुनिया की हकीकत को अच्छी तरह समझा।

ये एक काली स्याह सच्चाई है

Actress suchitra sen profile

मनोविश्लेषकों का मानना है कि सुचित्रा सेन जैसी कहानी ग्लैमर की दुनिया में आम है। फिल्म अभिनेता या अभिनेत्रियां अपने अच्छे दिनों की छवि का टूटना बर्दाश्त नहीं कर पाते।

वह अपने इर्द-गिर्द ऐसी आभासी दुनिया बना लेते हैं, जिनसे निकलना हर किसी के बूते में नहीं होता। यह आत्ममुधता की स्थिति ही उन्हें सुचित्रा जैसे हालात की ओर धकेलती हैं।

और वे जिंदगी भर इस आत्ममुग्ध छवि का सलीब ढोती रहती हैं। आज जब सुचित्रा सेन अस्पताल में अपनी मौत से जूझ रही हैं तो उनकी यह करुण छवि उदास कर देती है।

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