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इन पांच वजहों से ‘शिकारा’ देखना है बेहद जरूरी
Tue, 28 Jan 2020 08:04 AM IST
shrilata biswas
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Published by: shrilata biswas
Updated Tue, 28 Jan 2020 08:04 AM IST
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Shikara
- फोटो : social media
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1. विधु विनोद चोपड़ा- हिंदी सिनेमा जगत के जीनियस फिल्म निर्देशक व निर्माता जिन्होंने परिंदा, 1942 अ लव स्टोरी और मिशन कश्मीर जैसी नायाब फिल्में निर्देशित की हैं। अपनी आखिरी फिल्म एकलव्या के 13 साल बाद इनके निर्देशन में बनी फिल्म है शिकारा। इन्होंने 11 साल लगाकर इस अतिसंवेदनशील फिल्म का निर्देशन किया, बावजूद कई लोग इन्हें इस मुद्दे पर फिल्म बनाने के लिए मना करते रहे।
2. एक अनकही कहानी- धार्मिक अत्याचार के कारण 4 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को रातों रात अपना घर छोड़ना पड़ा। ये लोग अपने ही देश में एक शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं । किसी भी मीडिया हाउस, राजनीतिक दल, के लोग इनकी मदद के लिए आगे नहीं आए। शिकारा पहली बार इस मुद्दे को समाज की मुख्यधारा में ला रही है।
3. असली शरणार्थियों द्वारा अभिनय- जगति शरणार्थि कैम्प के 4000 से ज्यादा कश्मीरी पंडित शरणार्थियों ने इस फिल्म में अभिनय किया है, और 1990 के अपने निष्क्रमण के दृश्य को पुनर्जीवित किया है । फिल्म जगत में ऐसा पहली बार हुआ है कि अपने ऊपर बन रही किसी फिल्म में शरणार्थियों ने खुद अभिनय किया है । फिल्म के सारे सहायक अभिनेता भी कश्मीरी थे ।
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4. एआर रहमान और विधु विनोद चोपड़ा- ‘मोज़ार्ट ऑफ मद्रास’ एआर रहमान और मास्टर निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा दोनो पहली बार एक साथ इस फिल्म में काम कर रहे हैं । एआर रहमान के बैकग्राउंड व थीम संगीत, दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं । लोग के बीच पहले से ही एआर रहमान द्वारा संगीतबद्ध किए गए ट्रेलर का थीम संगीत प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है ।
5. आदिल और सादिया- ये दोनों कलाकार एक सामान्य व विनम्र पृष्ठभूमि से हैं और उच्चकोटि की प्रतिभा के धनी हैं । आदिल की जड़ें कश्मीर से सम्बद्ध हैं तो वहीं सादिया जम्मू और कश्मीर के एक छोटे शहर से आती हैं । विधु विनोद चोपड़ा ने दो सालों तक इन दो कलाकारों को प्रशिक्षित किया है । ऐसा कहा जा रहा है कि इस फिल्म में इन दोनों कलाकारों का प्रदर्शन बेहतरीन है ।
(Advertorial)
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2. एक अनकही कहानी- धार्मिक अत्याचार के कारण 4 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को रातों रात अपना घर छोड़ना पड़ा। ये लोग अपने ही देश में एक शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं । किसी भी मीडिया हाउस, राजनीतिक दल, के लोग इनकी मदद के लिए आगे नहीं आए। शिकारा पहली बार इस मुद्दे को समाज की मुख्यधारा में ला रही है।
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3. असली शरणार्थियों द्वारा अभिनय- जगति शरणार्थि कैम्प के 4000 से ज्यादा कश्मीरी पंडित शरणार्थियों ने इस फिल्म में अभिनय किया है, और 1990 के अपने निष्क्रमण के दृश्य को पुनर्जीवित किया है । फिल्म जगत में ऐसा पहली बार हुआ है कि अपने ऊपर बन रही किसी फिल्म में शरणार्थियों ने खुद अभिनय किया है । फिल्म के सारे सहायक अभिनेता भी कश्मीरी थे ।
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4. एआर रहमान और विधु विनोद चोपड़ा- ‘मोज़ार्ट ऑफ मद्रास’ एआर रहमान और मास्टर निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा दोनो पहली बार एक साथ इस फिल्म में काम कर रहे हैं । एआर रहमान के बैकग्राउंड व थीम संगीत, दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं । लोग के बीच पहले से ही एआर रहमान द्वारा संगीतबद्ध किए गए ट्रेलर का थीम संगीत प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है ।
5. आदिल और सादिया- ये दोनों कलाकार एक सामान्य व विनम्र पृष्ठभूमि से हैं और उच्चकोटि की प्रतिभा के धनी हैं । आदिल की जड़ें कश्मीर से सम्बद्ध हैं तो वहीं सादिया जम्मू और कश्मीर के एक छोटे शहर से आती हैं । विधु विनोद चोपड़ा ने दो सालों तक इन दो कलाकारों को प्रशिक्षित किया है । ऐसा कहा जा रहा है कि इस फिल्म में इन दोनों कलाकारों का प्रदर्शन बेहतरीन है ।
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