Maharashtra: क्या चुनावी गीत 'जय भवानी' से उद्धव को मिल पाएगी सियासी धार? ऐसे मिला पुरानी पिच पर खेलने का मौका
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विस्तार
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के चुनावी गीत के बाद अचानक सियासत गरमा गई है। इस सियासत के गर्म होने की वजह चुनावी गीत में 'जय भवानी' और 'हिंदू' शब्द का आना है। दरअसल, चुनाव आयोग ने इस गीत के बाद इन शब्दों पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना को नोटिस देखकर इनको हटाने के लिए कहा था। हालांकि उद्धव ठाकरे ने शब्दों को हटाने की बात तो दूर, बल्कि इन्हीं शब्दों को अब महाराष्ट्र की सियासत में अपना बड़ा सियासी हथियार बना कर नया दांव चल दिया है। सियासी जानकारों के मुताबिक उद्धव की सेना इन शब्दों के साथ कमजोर पड़ रही अपनी हिंदुत्ववादी छवि को निखारने में लग गई है। इस संबंध में मंगलवार को यूबीटी के नेताओं की एक बैठक भी हुई। फिलहाल समूचे महाराष्ट्र में एक संदेश के साथ उद्धव ठाकरे की शिवसेना इसे आगे बढ़ाने लगी है।
दरअसल, महाराष्ट्र की सियासत तब गर्म होने लगी, जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने लोकसभा के चुनाव में अपनी पार्टी में चुनावी गीत लॉन्च किया। जब चुनाव आयोग ने इस पर नोटिस दिया, तो उद्धव ठाकरे ने इसको महाराष्ट्र की अस्मिता और अपनी पार्टी की पुरानी हिंदुत्ववादी छवि से जोड़ना शुरू कर दिया। शिवसेना सेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस नोटिस को मिलने के बाद कहा कि वह अपनी पार्टी के गीत से न तो 'जय भवानी' हटाने जा रहे हैं और न ही उसके किसी शब्द को कम करने वाले हैं। ठाकरे ने कहा कि शिवसेना की जो परंपराएं चलती चली आ रही है, उसे किसी कीमत पर ना तो कमजोर होने दिया जाएगा और ना ही किसी तंत्र के सामने झुकने दिया जाएगा। इन्हीं परंपराओं में 'जय भवानी-जय शिवाजी' का उदघोष भी शामिल है। इस मामले में पार्टी के बड़े नेताओं ने मंगलवार को बैठक कर उद्घोष को हमेशा की तरह आगे बढ़ाने के लिए निर्देश भी दिए गए।
महाराष्ट्र के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना को नोटिस तो दे दिया, लेकिन पार्टी ने इससे कमजोर पड़ रही अपनी हिंदुत्ववादी छवि को चमकाने की व्यवस्था कर ली। सियासी जानकार और वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि दरअसल शिवसेना जब से इंडिया गठबंधन के साथ आई है, तब से उसके हिंदुत्व की छवि को कमजोर कहा जाने लगा है। अब जब चुनाव आयोग ने उनके एक चुनावी गीत के जय भवानी और हिंदू जैसे शब्दों पर आपत्ति की, तो उद्धव ठाकरे ने इसको बड़ा मौका समझ कर लपक लिया। वह कहते हैं कि उद्धव ठाकरे ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए नोटिस को जवाब देने की बजाय, यह संदेश दिया कि जय भवानी और हिंदू जैसे शब्द बिल्कुल नहीं हटने वाले।
सियासी जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र में शिवसेना शुरुआत से ही हिंदुत्ववादी विचारधारा की पार्टी के तौर पर पहचानी जाती है। लेकिन हाल के दिनों में हुई सियासी उथल-पुथल के बीच जब कांग्रेस और अन्य दलों के साथ गठबंधन हुआ, तो उसकी इस विचारधारा को लेकर तमाम तरह के सवालिया निशान उठने लगे। राजनीतिक विश्लेषक हेमंत लीलाधर साठे कहते हैं कि इस विवाद के शुरू होने के साथ ही जिस तरह उद्धव ठाकरे ने छत्रपति शिवाजी महाराज, देवी तुलजा भवानी और हिंदवी स्वराज की बात कही है। उससे इस बात का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना किस तरह इस मामले को अपनी हिंदुत्ववादी छवि के साथ आगे लेकर जा रही है। वह कहते हैं कि दरअसल इस पूरे मामले को उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक तरह से सियासी ऑक्सीजन के तौर पर देख रही है। महाराष्ट्र में गठबंधन के साथ आने पर यह पहला मौका है, जब जय भवानी और हिंदू शब्द के साथ खुलकर उद्धव ठाकरे की सेना ने मोर्चा संभाला है।
चुनाव आयोग की ओर से उद्धव ठाकरे की शिवसेना को नोटिस भेजा गया, तो उनकी पार्टी भी अपने उन सभी पुराने मामलों को लेकर सामने आ रही है, जिसमें उसकी हिंदुत्ववादी छवि चमकती थी। नोटिस मिलने के बाद उद्धव ठाकरे ने याद दिलाया कि उनके पिता बाला साहब ठाकरे को छह साल के लिए चुनाव लड़ने से इसलिए रोक दिया गया था, क्योंकि उन्होंने हिंदुत्व के लिए बड़ा अभियान चलाया था। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर भी हमला करते हुए कहा कि अगर हमारे गीत में 'जय भवानी' और 'हिंदू' नजर आता है, तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की रैलियों में बोले गए ऐसे शब्दों पर चुनाव आयोग क्यों नोटिस नहीं देता है।