{"_id":"6ac5e5a7c510cc95a5051985","slug":"uttar-pradesh-election-2027-bhadohi-assembly-seat-history-bjp-sp-bsp-congress-political-equation-2026-10-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सीट का समीकरण: बीते पांच चुनाव में तीन अलग दलों को चुन चुकी है भदोही की जनता, भाजपा-सपा-बसपा में कब कौन जीता?","category":{"title":"Election","title_hn":"चुनाव","slug":"election"}}
सीट का समीकरण: बीते पांच चुनाव में तीन अलग दलों को चुन चुकी है भदोही की जनता, भाजपा-सपा-बसपा में कब कौन जीता?
Thu, 08 Oct 2026 08:01 PM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 08 Oct 2026 08:01 PM IST
सार
भदोही जिले की भदोही विधानसभा सीट 1962 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आई। 1962 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस को जीत मिली थी। बीते पांच चुनाव में इस सीट पर एक-एक बार भाजपा और बसपा तो तीन बार सपा ने जीत दर्ज की है। आइये जानते हैं भदोही सीट का चुनावी इतिहास...
विज्ञापन
सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही मतदाताओं को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात भदोही जिले की भदोही विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
पहले जानते हैं भदोही सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला भदोही है, जिसका नाम एक बार फिर बदलकर संत रविदास नगर भदोही कर दिया गया है। जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं: भदोही, ज्ञानपुर और औराई। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम भदोही विधानसभा सीट की बात करेंगे। भदोही विधानसभा सीट 1962 में अस्तित्व में आई थी और यहां के पहले विधायक बंशीधर पांडेय बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
विज्ञापन
पहले जानते हैं भदोही सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला भदोही है, जिसका नाम एक बार फिर बदलकर संत रविदास नगर भदोही कर दिया गया है। जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं: भदोही, ज्ञानपुर और औराई। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम भदोही विधानसभा सीट की बात करेंगे। भदोही विधानसभा सीट 1962 में अस्तित्व में आई थी और यहां के पहले विधायक बंशीधर पांडेय बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
विज्ञापन
Trending Videos
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
भदोही विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
भदोही विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, बिंद, मुस्लिम, यादव और एससी (दलित) समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 17% हैं। इसके बाद बिंद मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14% और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 14% है, जबकि यादव मतदाता करीब 13% और एससी (दलित) मतदाता लगभग 13% हैं। अन्य प्रमुख वर्गों में पाल समुदाय के मतदाता करीब 7%, मौर्य समाज लगभग 6% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाता करीब 6% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
भदोही विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1962: कांग्रेस के दबदबे का साथ शुरुआत
भदोही विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो यहां के पहले यानी कि 1962 के चुनाव में कांग्रेस के बंशीधर पांडेय विजयी हुए थे। उन्होंने भारतीय जनसंघ के रामदेव प्रसाद अंबाश को 5,620 वोटों के अंतर से हराया था। चुनाव में बंशीधर पांडेय को 16,190 वोट, जबकि रामदेव प्रसाद अंबाश को 10,570 वोट मिले।
भदोही विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, बिंद, मुस्लिम, यादव और एससी (दलित) समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 17% हैं। इसके बाद बिंद मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14% और मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 14% है, जबकि यादव मतदाता करीब 13% और एससी (दलित) मतदाता लगभग 13% हैं। अन्य प्रमुख वर्गों में पाल समुदाय के मतदाता करीब 7%, मौर्य समाज लगभग 6% और क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाता करीब 6% हैं। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
भदोही विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1962: कांग्रेस के दबदबे का साथ शुरुआत
भदोही विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो यहां के पहले यानी कि 1962 के चुनाव में कांग्रेस के बंशीधर पांडेय विजयी हुए थे। उन्होंने भारतीय जनसंघ के रामदेव प्रसाद अंबाश को 5,620 वोटों के अंतर से हराया था। चुनाव में बंशीधर पांडेय को 16,190 वोट, जबकि रामदेव प्रसाद अंबाश को 10,570 वोट मिले।
विज्ञापन
कांग्रेस ने दोहराई जीत
1967 के विधानसभा चुनाव में भी भदोही विधानसभा सीट पर कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखी। इस बार के चुनाव में कांग्रेस के एच. राम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के के. प्रसाद को 1,170 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में एच. राम को 20,036 वोट, जबकि के. प्रसाद को 18,866 वोट मिले।
1969 और 1974 का चुनाव
इसके बाद राज्य में 1969 और 1974 में चुनाव हुए। इन चुनावों में भदोही से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। इन दोनों चुनावों में भारतीय क्रांति दल के राम निहोर ने जीत दर्ज की। 1969 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के हरिगैन को महज 231 वोटों के अंतर से हराया। तो वहीं 1974 के चुनाव में उन्होंने भारतीय जनसंघ के मुरलीधर को 5,804 वोटों से मात दी।
आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
1967 के विधानसभा चुनाव में भी भदोही विधानसभा सीट पर कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखी। इस बार के चुनाव में कांग्रेस के एच. राम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के के. प्रसाद को 1,170 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में एच. राम को 20,036 वोट, जबकि के. प्रसाद को 18,866 वोट मिले।
1969 और 1974 का चुनाव
इसके बाद राज्य में 1969 और 1974 में चुनाव हुए। इन चुनावों में भदोही से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। इन दोनों चुनावों में भारतीय क्रांति दल के राम निहोर ने जीत दर्ज की। 1969 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के हरिगैन को महज 231 वोटों के अंतर से हराया। तो वहीं 1974 के चुनाव में उन्होंने भारतीय जनसंघ के मुरलीधर को 5,804 वोटों से मात दी।
आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी।
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
1977: जनता पार्टी ने मारी बाजी
1977 के विधानसभा चुनाव में भदोही सीट पर एक बार फिर बदलाव हुआ। इस बार जनता पार्टी के मिठाई लाल विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के मूलचंद को 368 वोटों के मामूली अंतर से हराया। चुनाव में मिठाई लाल को 23,239 वोट, जबकि मूलचंद को 22,871 वोट मिले।
राजनीतिक अस्थिरता का समय
उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई थी। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने राज्यों की जनता पार्टी सरकारों को भंग कर मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए। इन चुनावों में कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1977: जनता पार्टी ने मारी बाजी
1977 के विधानसभा चुनाव में भदोही सीट पर एक बार फिर बदलाव हुआ। इस बार जनता पार्टी के मिठाई लाल विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के मूलचंद को 368 वोटों के मामूली अंतर से हराया। चुनाव में मिठाई लाल को 23,239 वोट, जबकि मूलचंद को 22,871 वोट मिले।
राजनीतिक अस्थिरता का समय
उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई थी। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए, जिसमें इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने राज्यों की जनता पार्टी सरकारों को भंग कर मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए। इन चुनावों में कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980 का चुनाव
1980 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में भदोही सीट पर एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हुई। चुनाव में कांग्रेस (आई) के बनवारी राम विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के मिठाई लाल को 3,925 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बनवारी राम को 16,257 वोट, जबकि मिठाई लाल को 12,332 वोट मिले। भदोही विधानसभा सीट पर यह कांग्रेस की आखिरी जीत थी।
1985 और 1989 का चुनाव
1980 के बाद 1985 और 1989 में विधानसभा चुनाव हुए। इन दोनों चुनावों में मूलचंद विजयी रहे। 1985 के चुनाव में उन्होंने लोकदल के टिकट पर जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के बनवारी राम को 4,526 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1989 के चुनाव में उन्होंने जनता दल के प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस के बनवारी राम को 16,004 वोटों से हराया।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में भदोही विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1980 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में भदोही सीट पर एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हुई। चुनाव में कांग्रेस (आई) के बनवारी राम विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (सेक्युलर) के मिठाई लाल को 3,925 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बनवारी राम को 16,257 वोट, जबकि मिठाई लाल को 12,332 वोट मिले। भदोही विधानसभा सीट पर यह कांग्रेस की आखिरी जीत थी।
1985 और 1989 का चुनाव
1980 के बाद 1985 और 1989 में विधानसभा चुनाव हुए। इन दोनों चुनावों में मूलचंद विजयी रहे। 1985 के चुनाव में उन्होंने लोकदल के टिकट पर जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के बनवारी राम को 4,526 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1989 के चुनाव में उन्होंने जनता दल के प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस के बनवारी राम को 16,004 वोटों से हराया।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में भदोही विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1991: पहली बार जीती भाजपा
1991 के चुनाव में भदोही विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा के पूर्णमासी पंकज विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के मूल चंद को 2,106 वोटों के अंतर से हराया।
1993: पहली बार जीती बसपा
1993 के चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की । चुनाव में बसपा के मेवालाल बागी विजयी हुए। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के पूर्णमासी पंकज को 17,251 वोटों के अंतर से हराया।
1996: भाजपा ने की वापसी
इसके बाद 1996 में चुनाव हुए। इस चुनाव में एक बार फिर भाजपा के पूर्णमासी पंकज ने जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने सपा के दीनानाथ भास्कर को 791 वोटों के अंतर से हराया।
1991 के चुनाव में भदोही विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा के पूर्णमासी पंकज विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के मूल चंद को 2,106 वोटों के अंतर से हराया।
1993: पहली बार जीती बसपा
1993 के चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने जीत दर्ज की । चुनाव में बसपा के मेवालाल बागी विजयी हुए। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के पूर्णमासी पंकज को 17,251 वोटों के अंतर से हराया।
1996: भाजपा ने की वापसी
इसके बाद 1996 में चुनाव हुए। इस चुनाव में एक बार फिर भाजपा के पूर्णमासी पंकज ने जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने सपा के दीनानाथ भास्कर को 791 वोटों के अंतर से हराया।
2002 में पहली बार जीती सपा
इसके बाद राज्य में 2002 के चुनाव में भदोही विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के दीनानाथ भास्कर विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उमा शंकर को 17,818 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दीनानाथ भास्कर को 52,427 वोट, जबकि उमा शंकर को 34,609 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पूर्णमासी 33,631 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2007: बसपा ने की वापसी
2007 के चुनाव की बात करें तो भदोही विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अर्चना सरोज विजयी हुईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दीनानाथ भास्कर को 6,330 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अर्चना सरोज को 47,555 वोट, जबकि दीनानाथ भास्कर को 41,225 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पूर्णमासी पंकज 19,157 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2009 में हुआ उपचुनाव
2007 के बाद भदोही विधानसभा सीट पर 2009 में फिर चुनाव कराए गए क्योंकि 2007 में निर्वाचित BSP विधायक अर्चना सरोज का बीमारी के कारण निधन हो गया था। इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की मधुबाला पासी विजयी हुईं। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के अमर सिंह सरोज को 5,020 वोटों के अंतर से हराया।
इसके बाद राज्य में 2002 के चुनाव में भदोही विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के दीनानाथ भास्कर विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उमा शंकर को 17,818 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दीनानाथ भास्कर को 52,427 वोट, जबकि उमा शंकर को 34,609 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पूर्णमासी 33,631 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2007: बसपा ने की वापसी
2007 के चुनाव की बात करें तो भदोही विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अर्चना सरोज विजयी हुईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दीनानाथ भास्कर को 6,330 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अर्चना सरोज को 47,555 वोट, जबकि दीनानाथ भास्कर को 41,225 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पूर्णमासी पंकज 19,157 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2009 में हुआ उपचुनाव
2007 के बाद भदोही विधानसभा सीट पर 2009 में फिर चुनाव कराए गए क्योंकि 2007 में निर्वाचित BSP विधायक अर्चना सरोज का बीमारी के कारण निधन हो गया था। इस उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की मधुबाला पासी विजयी हुईं। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के अमर सिंह सरोज को 5,020 वोटों के अंतर से हराया।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2012: का चुनाव
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के रवींद्रनाथ त्रिपाठी को 16,241 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जाहिद बेग को 78,698 वोट, जबकि रवींद्रनाथ त्रिपाठी को 62,457 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के शैलेंद्र 26,066 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1996 के बाद 2017 में भाजपा की हुई वापसी
इसके बाद राज्य में 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वापसी की। चुनाव में भाजपा के रवींद्र नाथ त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग को 1,105 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रवींद्र नाथ त्रिपाठी को 79,519 वोट, जबकि जाहिद बेग को 78,414 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के रंगनाथ मिश्रा 56,555 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने जीता चुनाव
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भदोही जिले की भदोही विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के रवींद्र नाथ त्रिपाठी को 4,885 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जाहिद बेग को 1,00,738 वोट, जबकि रवींद्र नाथ त्रिपाठी को 95,853 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के हरिशंकर (दादा चौहान) 40,758 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के रवींद्रनाथ त्रिपाठी को 16,241 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जाहिद बेग को 78,698 वोट, जबकि रवींद्रनाथ त्रिपाठी को 62,457 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के शैलेंद्र 26,066 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1996 के बाद 2017 में भाजपा की हुई वापसी
इसके बाद राज्य में 2017 के चुनाव हुए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने वापसी की। चुनाव में भाजपा के रवींद्र नाथ त्रिपाठी विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग को 1,105 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रवींद्र नाथ त्रिपाठी को 79,519 वोट, जबकि जाहिद बेग को 78,414 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के रंगनाथ मिश्रा 56,555 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022: सपा ने जीता चुनाव
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भदोही जिले की भदोही विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के रवींद्र नाथ त्रिपाठी को 4,885 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में जाहिद बेग को 1,00,738 वोट, जबकि रवींद्र नाथ त्रिपाठी को 95,853 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के हरिशंकर (दादा चौहान) 40,758 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।