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Sikkim: इन गारंटियों के चलते सिक्किम ने तमांग पर बरसाया अपार 'प्रेम'; 11 साल में ऐसे अपने गुरु को कर दिया पस्त

Sun, 02 Jun 2024 04:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक/नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगटोक/नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 02 Jun 2024 04:03 PM IST
सार

Sikkim Assembly Election 2024 Result, Chunav Parinam News: सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) 32 सदस्यीय विधानसभा में 31 सीट पर जीत दर्ज करके रविवार को लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सिक्किम की सत्ता में लौटा। विपक्षी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) महज एक सीट जीत पाया है। सिक्किम में 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के साथ ही विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था।

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Sikkim Election Result 2024 Vote Counting Assembly Chunav Party Wise Win Lose Seats News in Hindi
Sikkim Result - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले आज दो राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए। पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम में सत्ताधारी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी। नतीजों के अनुसार, एसकेएम पार्टी 31 सीट पर विजयी रही। इसके अलावा बची एकमात्र सीट सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) को मिली। तेनजिंग नोरबू लाम्था ने एसडीएफ के टिकट पर श्यारी विधानसभा सीट से जीत हासिल की है। एसकेएम प्रमुख और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने गंगटोक जिले की रेनॉक और सोरेंग जिले की सोरेंग-चाकुंग विधानसभा सीटों से जीत हासिल की। राज्य में विधानसभा की 32 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 17 है।

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नहीं खिला पाया कमल

राज्य में भाजपा ने 31 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। यहां निवर्तमान सदन में उसके 12 विधायक थे। हिमालयी राज्य में भाजपा को केवल 5.18 प्रतिशत वोट ही मिल पाए। एसकेएम को 58.38 प्रतिशत वोट मिले, जबकि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को 27.37 प्रतिशत वोट मिले। सिक्किम भाजपा अध्यक्ष दिली राम थापा अपर बुर्तुक विधानसभा क्षेत्र में एसकेएम उम्मीदवार काला राय से हार गए। मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री थापा राय से 2,968 मतों से हार गए।राय को 6,723 वोट मिले, जबकि थापा को 3,755 वोट मिले। 

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  • सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के डीबी थापा को 1,623 वोट मिले, जबकि बीके तमांग (CAP-A) को 581 वोट मिले। भाजपा ने लाचेन मंगन सीट को छोड़कर 31 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और अधिकांश सीटों पर भगवा पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
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  • निवर्तमान सिक्किम विधानसभा में भाजपा के 12 विधायक थे, जिनमें से 10 विपक्षी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) से दलबदलू थे, जबकि दो अन्य ने एसकेएम के साथ गठबंधन करके अक्तूबर 2019 में हुए विधानसभा उपचुनाव जीते थे। उन 12 विधायकों में से पांच ने पार्टी छोड़ दी थी।


आइये जानते हैं कि आखिर सिक्किम विधानसभा चुनाव में क्या मुद्दे रहे? एसकेएम की वापसी की प्रमुख वजहें क्या रहीं?

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पहले जानते हैं सिक्किम विधानसभा चुनाव की खास बातें?
देश में लोकसभा चुनावों के साथ चार राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी कराए गए। 32 सदस्यीय सिक्किम विधानसभा के लिए 19 अप्रैल को मतदान कराया गया था। राज्य की 32 सीटों पर कुल 146 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे। यहां मुख मुकबला मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) और पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग की सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के बीच रहा। अन्य प्रमुख दलों में भाजपा और कांग्रेस रहे। चुनाव से कुछ समय पहले तक भाजपा और एसकेएम साथ-साथ थे हालांकि सीट बंटवारे के मुद्दों पर बात न बनने पर गठबंधन टूट गया। एसकेएम के साथ संबंध तोड़ने के बाद भाजपा ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ा।

आखिर सिक्किम विधानसभा चुनाव में क्या मुद्दे रहे?
सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के प्रमुख और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग दो सीटों से चुनाव मैदान में रहे। उन्होंने गंगटोक जिले की रेनॉक और सोरेंग जिले की सोरेंग- चाकुंग विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मुख्यमंत्री तमांग की पत्नी कृष्णा कुमारी राय चुनाव मैदान में रहीं और सफलता हासिल की।

सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के अलावा, राज्य में इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा मजबूत प्रचार अभियान देखा जा रहा है, जो हिमालयी राज्य में राष्ट्रवाद और कल्याणकारी उपायों की लहर पर सवार होकर जमीन हासिल करने की कोशिश कर रही है। हाल ही में सीट बंटवारे के मुद्दों पर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाले एसकेएम के साथ संबंध तोड़ने के बाद भगवा पार्टी राज्य में अकेले चुनाव लड़ रही है।

सिक्किमी अस्मिता: सिक्किमी पहचान का मुद्दा सभी चुनावी दलों के चुनावी एजेंडे में रहा। एसकेएम चुनाव में कहती आई कि यह चुनाव सिक्किम की आत्मा के लिए एक लड़ाई है। एसडीएफ की विभाजनकारी राजनीति लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रही और इसलिए उन्हें 2019 में जनता ने खारिज कर दिया गया। 

हाल में राज्य में 'सिक्किमी' लोगों की परिभाषा का विस्तार किया गया था जिससे क्षेत्रीय दल नाराज थे। नए वित्त अधिनियम 2023 में 1975 तक सिक्किम में रहने वाले पुराने निवासियों के वंशजों को शामिल किया गया था। इसके जरिए स्थानीय लेप्चा, भूटिया और नेपाली लोगों से परे 'सिक्किमी' लोगों की परिभाषा का विस्तार किया गया था।हालांकि, भाजपा ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा था कि यह केवल पुराने निवासियों के वंशजों को आयकर छूट प्रदान करने के लिए किया गया था।

अनुच्छेद 371एफ का मुद्दा सभी चुनावी दलों के चुनाव में छाया रहा। एसकेएम और एसडीएफ दोनों ने अनुच्छेद 371एफ के संरक्षण को मुद्दा बनाया जो सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान सुनिश्चित करता है।

चुनावी गारंटी: देश के लोकसभा चुनाव से लेकर हाल के विधानसभा चुनावों में तमाम दलों का जोर गारंटियों पर रहा। सिक्किम के चुनाव नतीजों में नौ चुनावी गारंटियों का असर साफ दिखा। सिक्किम में सत्तारूढ़ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) की जीत में उसकी चुनावी गारंटियों ने अहम भूमिका निभाई है। एसकेएम पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में 'नौ गारंटी' का उल्लेख किया था। ये नौ गारंटियां थीं (1) - 371 (एफ) की सुरक्षा, (2) - युवाओं का सुनहरा भविष्य, (3) - महिलाओं के लिए 50% सरकारी नौकरी आरक्षण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, (4) - समृद्ध सिक्किम (5) स्वस्थ सिक्किम प्रत्येक नागरिक के लिए स्वास्थ्य बीमा, (6) - शिक्षित सिक्किम, (7) - कृषि क्षेत्र (8) - प्रत्येक नागरिक के लिए कल्याणकारी योजनाएं, (9) - सुशासन।

पूरे अभियान के दौरान मुख्यमंत्री और एसकेएम अध्यक्ष तमांग ने नौ चुनावी गारंटियों की बात की जिसका नतीजा भी दिखा है। एसकेएम सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से भी उसे चुनावी लाभ मिला है और एक कार्यकाल के लिए सत्ता में रहने के कारण सत्ता विरोधी भावनाएं भी नहीं उभरी थीं।

दलबदल: बीते पांच वर्षों में सिक्किम ने भी दलबदल का दौर देखा। चुनाव के कुछ समय पहले तक भाजपा राज्य में मुख्य विपक्षी दल थी। निवर्तमान सिक्किम विधानसभा में भाजपा के 12 विधायक थे, जिनमें से 10 विधायक ने एसडीफ से दलबदल किया था। बाकी दो विधायक अक्तूबर 2019 में विधानसभा उपचुनाव जीते थे। इन 12 विधायकों में से पांच ने पार्टी छोड़ दी और उनमें से तीन एसकेएम में शामिल हो गए। इन तीनों विधायकों को एसकेएम ने विधानसभा चुनाव में उतारा। वहीं भाजपा के बाकी सात विधायकों में से पार्टी ने इस बार केवल दो को ही टिकट दिया। सिक्किम में दलबदल का नुकसान एसडीएफ और भाजपा को हुआ। 

भ्रष्टाचार: सिक्किम में विपक्षी दलों ने प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाली सरकार पर भ्रष्टाचार, व्यापारियों से जबरन वसूली और वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए निशाना साधा। उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप लगाया।

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