LS Polls 2024: MP के मालवा-निमाड़ में कांग्रेस की ये तिकड़ी बना रही माहौल, तीन आदिवासी सीटों पर क्यों है फोकस?
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विस्तार
मध्यप्रदेश की लोकसभा की 29 सीटों में से 21 सीटों पर मतदान खत्म हो गया है। चौथे चरण का मतदान 13 मई को होने जा रहा है। प्रदेश के अंतिम चरण में मालवा-निमाड़ की आठ सीटों पर वोटिंग होगी। इनमें इंदौर, देवास, उज्जैन, धार, रतलाम, खरगोन, मंदसौर, खंडवा जैसी सीटें शामिल हैं। अभी इन सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा है। 8 सीटों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की परीक्षा होनी है। इन दोनों की जोड़ी को अब पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का भी साथ मिल गया है। राजगढ़ चुनाव खत्म होने के बाद से ही सिंह लगातार इन क्षेत्रों में कांग्रेस पार्टी के प्रचार में जुटे हुए हैं। जबकि राज्य के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने पहले चरण के मतदान के बाद से ही चुनाव प्रचार अभियान से दूरी बना रखी है।
चौथे चरण की आठ सीटों पर कांग्रेस नेताओं ने भी मोर्चा संभाल रखा है। कांग्रेसी दिग्गज नेता लगातार सभाएं कर रहे हैं। राहुल गांधी धार और खरगोन में सभा कर चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार धार में डेरा डाले हुए हैं। सिंघार इसी संसदीय क्षेत्र से हैं। इसी कारण कांग्रेस के लिए यहां का चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न भी बना हुआ है। खरगोन में अरुण यादव मोर्चा संभाले हुए हैं। झाबुआ-रतलाम में कांग्रेस के टिकट पर कद्दावर नेता कांतिलाल भूरिया चुनाव लड़ रहे हैं। भूरिया का यह अंतिम चुनाव है। उनके बेटे विक्रांत झाबुआ से विधायक हैं। दोनों भूरिया ने इस लोकसभा सीट पर मैदान संभाल रखा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मालवा और निमाड़ अंचल में लगातार दौरे कर रहे हैं। वहीं दिग्विजय सिंह प्रचार थमने तक मंदसौर, रतलाम और खंडवा में सभाएं करते हुए नजर आ रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष के लिए प्रतिष्ठा सवाल बनी धार सीट
प्रदेश की सियासत में यह अंचल हमेशा ही निर्णायक भूमिका अदा करता रहा है। आठ में से रतलाम, धार और खरगोन सीट दोनों ही दलों के लिए अहम है। छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों से रतलाम-धार में कांग्रेस उत्साहित है, जबकि भाजपा इन सीटों पर नए चेहरों के साथ उतरी है। आदिवासी वोटर्स यहां निर्णायक स्थिति में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार और खरगोन में सभा कर आदिवासी वोटरों को साधने की कोशिश की। जबकि राहुल गांधी ने खरगोन के सैगांव और रतलाम के जोबट में सभा की।
धार मालवा-निमाड़ की इकलौती सीट है, जहां कांग्रेस वोट शेयर और सीटों के आधार पर भाजपा से मुकाबले में खड़ी दिख रही है। इस लोकसभा सीट में आने वाली आठ में से पांच सीटों पर कांग्रेस काबिज है। आदिवासी बाहुल्य सीट नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का गृह क्षेत्र भी है। इस सीट पर भोजशाला सर्वे के आदेश को भाजपा ने राजनीतिक रूप से भुनाना शुरू कर दिया है। भाजपा ने यहां से मौजूदा सांसद छतरसिंह दरबार का टिकट काटा है और पूर्व सांसद सावित्री ठाकुर को टिकट दिया है। यानी भाजपा को भी लग रहा था कि मौजूदा सांसद मुश्किल में हैं। ऐसे में कांग्रेस को यहां से उम्मीद अधिक है। कांग्रेस ने यहां से युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे तेजतर्रार नेता राधेश्याम मुवेल को टिकट दिया है। धार सीट पर 2009 में कांग्रेस के गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी जीते थे (अब भाजपा में) इसके बाद 2014- 2019 में बीजेपी यहां लगातार दो बार जीती है।
खरगोन सीट पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर
इस सीट पर कांग्रेस ने बिल्कुल नए चेहरे पोरलाल खरते को मैदान में उतारा है। पार्टी को उनकी पहचान बतानी पड़ रही है। खरते पूर्व सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी हैं। उनकी बड़वानी जिले के सेंधवा, खरगोन और भगवानपुरा के आदिवासी इलाकों में अच्छी पैठ है। खरते जयस के संस्थापकों में से भी एक रहे हैं और उनकी आदिवासी युवाओं में अच्छी पकड़ है। भाजपा ने दूसरी बार गजेंद्र पटेल को टिकट दिया है। पटेल का पहले विरोध था। अब ये हवा चल रही है कि गजेंद्र पटेल जीतेंगे, तो निमाड़ को मंत्री पद मिलेगा। इस क्षेत्र से भाजपा के दो सदस्य हैं। लोकसभा से गजेंद्र पटेल के अलावा राज्यसभा से सुमेर सिंह सोलंकी भी राज्यसभा सांसद हैं। इसके बावजूद भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव में कमाल नहीं कर पाई।
आदिवासी बहुल इस लोकसभा सीट की आठ विधानसभा में से कांग्रेस को पांच सीटें मिली थीं। जबकि भाजपा को तीन सीट हासिल हुई थीं। इन पांच सीट के चलते यहां कांग्रेस को उम्मीद है कि वह खरगोन सीट पर अपने पाले में कर सकती है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री बाला बच्चन ने मैदान संभाल रखा है। वे इसी लोकसभा की विधानसभा राजपुर सीट से विधायक हैं। 2007 के उपचुनाव में इस सीट से कांग्रेस के अरुण यादव जीते थे, लेकिन इसके बाद 2009, 2014 और 2019 से यहां भाजपा ही जीतती रही है।
झाबुआ: असली आदिवासी कौन? यह बना चुनावी मुद्दा
यह मालवा-निमाड़ की इकलौती सीट है, मुद्दा राम मंदिर और मोदी की बजाय असली आदिवासी कौन है बन गया। कांग्रेस की तरफ से जाना पहचाना चेहरा और कद्दावर नेता कांतिलाल भूरिया मैदान में हैं। वे भील समुदाय से आते हैं। दूसरी तरफ भाजपा ने इस बार अलीराजपुर से अनीता नागर सिंह चौहान को टिकट दिया है। अनीता भिलाला समुदाय से आती हैं। इस सीट पर भील और भिलाला 65:35 के अनुपात में हैं। इस वजह से कांग्रेस ने भील समुदाय को साधा है। राम मंदिर और मोदी फैक्टर रतलाम-झाबुआ के शहरी मतदाताओं के बीच सिमटे हुए हैं।
रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट आदिवासी बाहुल्य है। यहां की आठ विधानसभा में से कांग्रेस के पास जोबट, झाबुआ, थांदला यह तीन विधानसभा सीटें हैं। वहीं भाजपा के पास अलीराजपुर, पेटलावद, रतलाम सिटी और रतलाम ग्रामीण कुल चार सीटें हैं। वहीं एक सीट भारतीय आदिवासी पार्टी (बाप) के विधायक कमलेश्वर डोडियार के पास सैलाना है। कांग्रेस 2015 में हुए उपचुनाव में यहां पर जीती थी और कांतिलाल भूरिया सांसद बने। साल 2019 में भाजपा के जीएस डामोर ने यहां जीत दर्ज की और भूरिया को हराया। कांतिलाल भूरिया यहां के पुराने आदिवासी नेता हैं। वह 1998, 1999, 2004 और 2009 में भी सांसद का चुनाव जीत चुके हैं।