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Sultanpur: मदन मोहन मालवीय के बेटे से वरुण-मेनका गांधी तक जीत चुके, ऐसा है सुल्तानपुर सीट का सियासी समीकरण

Thu, 28 Mar 2024 07:36 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 28 Mar 2024 07:36 PM IST
सार

Seat Ka Samikaran: 1951-52 में देश के पहले लोकसभा चुनाव हुए थे तब सुल्तानपुर लोकसभा सीट का अस्तित्व नहीं था। सुल्तानपुर सीट 1957 में अस्तित्व में आई। अमर उजाला की खास चुनावी सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में जानते हैं सुल्तानपुर लोकसभा सीट का पूरा इतिहास।

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Election 2024: Sultanpur lok sabha seat profile and history
सुल्तानपुर सीट - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर लोकसभा सीट प्रदेश ही नहीं देश की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। 2019 में यहां से जीतीं मेनका गांधी को एक बार फिर भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, सपा ने भीम निषाद को मैदान में उतारा है। 2014 में यहां से जीते वरुण गांधी इस बार अपनी मां मेनका का प्रचार करते नजर आएंगे। 
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हमारे विशेष कार्यक्रम ‘सीट का समीकरण’ में आज इसी सुल्तानपुर सीट की बात करेंगे। मेनका और वरुण गांधी से पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व कौन-कौन से चेहरे कर चुके हैं? सुल्तानपुर सीट का चुनावी इतिहास क्या है? इस सीट पर कब किसे जीत मिली? 2019 के चुनाव में मेनका की जीत कितनी बड़ी थी? मौजूदा सियासी समीकरण क्या कहता है? आइये इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं…
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सुल्तानपुर सीट का चुनावी इतिहास क्या रहा है?
ऐतिहासिक दृष्टि से सुल्तानपुर का अतीत अत्यंत गौरवशाली रहा है। पुरातात्विक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक और औद्योगिक दृष्टि से सुल्तानपुर का अपना खास स्थान है। महर्षि वाल्मीकि, दुर्वासा वशिष्ठ जैसे ऋषि मुनियों की तपोस्थली का गौरव इसी जिले को प्राप्त है।

अयोध्या और प्रयाग के मध्य गोमती नदी के दोनों ओर सई और तमसा नदियों के बीच कभी यह भूभाग बहुत दुर्गम था। गोमती के किनारे का यह क्षेत्र कुश-काश के लिए प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में सुल्तानपुर का नाम कुशभवनपुर था जो कालांतर में बदलते-बदलते सुल्तानपुर हो गया। मोहम्म्द गोरी के आक्रमण के पहले यह राजभरों के अधिपत्य में था। 

एक बार फिर वापस सुल्तानपुर के चुनावी इतिहास की ओर चलते हैं। शुरुआत 1951-52 से, जब देश के पहले लोकसभा चुनाव हुए, उस वक्त सुल्तानपुर लोकसभा सीट का अस्तित्व नहीं था। उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर जिला (दक्षिण) और सुल्तानपुर जिला (उत्तर) - फैजाबाद जिला (दक्षिण-पश्चिम) नाम से दो सीटें थीं।

Election 2024: Sultanpur lok sabha seat profile and history
1957 आम चुनाव में मतदाता - फोटो : 1957 आम चुनाव में मतदाता
पहले चुनाव में मदनमोहन मालवीय के बेटे जीते
साल 1957, देश में दूसरी बार लोकसभा चुनाव हुए। इसी चुनाव में सुल्तानपुर लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। यहां हुए पहले चुनाव में कांग्रेस की तरफ से उतरे शिक्षाविद और स्वतंत्रता आंदोलन के कार्यकर्ता गोविंद मालवीय को जीत मिली। गोविंद जाने-माने शिक्षाविद मदनमोहन मालवीय के बेटे थे। चुनाव में गोविंद मालवीय ने जनसंघ के उम्मीदवार भास्कर प्रताप साही को 22,883 वोट से हराया था।

1962 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सुल्तानपुर सीट बरकरार रखी। इस बार पार्टी उम्मीदवार कुंवर कृष्ण वर्मा ने जनसंघ के बेचू सिंह को 32,551 वोट से हरा दिया। 1967 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के गणपत सहाय ने जनसंघ के जेके अग्रवाल को 46,010 मतों से हराया। 1971 में कांग्रेस के केदारनाथ सिंह ने जनसंघ के राम प्यारे शुक्ल को 62,815 वोटों से हराया। इसके साथ ही कांग्रेस ने यहां से लगातार चौथी जीत दर्ज की। 

आपातकाल के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को मिली हार 
आपातकाल के बाद हुए 1977 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को देश के ज्यादातर हिस्सों में हार झेलनी पड़ी। सुल्तानपुर सीट पर भी यही हाल हुआ और लगातार चार चुनावों से चला आ रहा कांग्रेस की जीत का सिलसिला इस बार थम गया। 1977 में यहां से भारतीय लोकदल के जुल्फिकार उल्लाह ने कांग्रेस के केदारनाथ सिंह को 1,65,534 वोटों से हरा दिया था।

1980 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर से वापसी कर ली। अबकी बार पार्टी के प्रत्याशी गिरिराज सिंह ने जनता पार्टी (सेक्युलर) के त्रिभुवन नाथ को 26,081 मतों से शिकस्त दी। 1984 में हुए चुनाव में कांग्रेस की तरफ से उतरे राज करण सिंह जीते। राज करण ने निर्दलीय उम्मीदवार मुस्तकीम को 1,60,057 मतों के बड़े अंतर से परास्त किया।

1989 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। इस चुनाव में जनता दल के राम सिंह को जीत मिली, जिन्होंने कांग्रेस के राज करण सिंह को 38,596 मतों से हराया।

भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगाई
सुल्तानपुर सीट पर भाजपा को पहली बार 1991 में सफलता मिली। तब पार्टी के उम्मीदवार विश्वनाथ दास शास्त्री ने जनता दल के राम सिंह को 76,956 मतों से हराया था। अगले चुनाव में भी भाजपा यह सीट बरकरार रख पाई। 1996 में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र बहादुर राय ने समाजवादी पार्टी के कामरूमा फौजी को 1,18,284 मतों के अंतर से परास्त किया।

1998 के आम चुनाव में एक और सफलता के साथ भाजपा ने सुल्तानपुर सीट पर जीत की हैट्रिक लगा दी। इस चुनाव में भी पार्टी के उम्मीदवार देवेंद्र बहादुर राय ने जीत दर्ज की। राय ने सपा की तरफ से उतरीं डॉ. रीता बहुगुणा को 64,448 मतों से हराया।

पहली बार बसपा को सफलता मिली 
अगले लोकसभा चुनाव 1999 में कराए गए जिसमें बहुजन समाज पार्टी ने सुल्तानपुर सीट पर पहली बार जीत दर्ज की। इस चुनाव में बसपा के जयभद्र सिंह ने एक करीबी मुकाबले में सपा के राम लखन वर्मा को 14,599 वोट से हरा दिया।

2004 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने सुल्तानपुर सीट पर अपनी सफलता दोहराई। पार्टी की तरफ से उतरे मोहम्मद ताहिर ने सपा के शैलेन्द्र प्रताप सिंह को 1,01,810 मतों से हरा दिया।

2009 के लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर सीट बसपा के हाथ से निकल गई। इस चुनाव में जीतकर डॉ. संजय सिंह ने यहां 25 साल बाद कांग्रेस की वापसी कराई। संजय सिंह ने बसपा के मोहम्मद ताहिर को 98,779 वोट से शिकस्त दी। 

Election 2024: Sultanpur lok sabha seat profile and history
भाजपा सांसद वरुण गांधी - फोटो : अमर उजाला
2014 में वरुण गांधी को जीत मिली 
अब आता है 2014 का लोकसभा चुनाव, जब उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटों पर कमल खिला। इन 71 सीटों में से एक सीट सुल्तानपुर भी थी। पार्टी ने यहां से गांधी परिवार से आने वाले वरुण गांधी को टिकट थमाया था। चुनाव में वरुण ने सपा उम्मीदवार पवन पांडेय को 1,78,902 वोट के बड़े अंतर से परास्त किया। भाजपा उम्मीदवार को 4,10,348 जबकि सपा उम्मीदवार को 2,31,446 वोट मिले। 

Election 2024: Sultanpur lok sabha seat profile and history
सांसद मेनका गांधी। - फोटो : social media
2019 में करीबी मुकाबले में मेनका जीतीं 
2019 में भाजपा ने यहां से वरुण गांधी की जगह उनकी मां मेनका गांधी को उम्मीदवार बना दिया। इस चुनाव मेनका को जीत तो मिली लेकिन अंतर बेहद कम रहा। मेनका ने बसपा उम्मीदवार चंद्रभद्र सिंह को 14,426 वोटों से हराया। जहां भाजपा उम्मीदवार को 4,59,196 वोट मिले वहीं, बसपा प्रत्याशी को 4,44,670 वोट से संतोष करना पड़ा।  
 

इस बार इनके बीच मुकाबला
भाजपा ने एक बार फिर यहां से मौजूदा सांसद मेनका गांधी को टिकट दिया है। पीलीभीत सांसद और मेनका के बेटे वरुण गांधी का टिकट इस बार कट गया है। वरुण की टीम की ओर से कहा गया है कि वरुण इस बार सुल्तानपुर में अपनी मां के लिए प्रचार करेंगे। वरुण 2014 में यहां से जीत चुके हैं। ऐसे में सुल्तानपुर में उनका अपना भी प्रभाव है जो इस चुनाव में उनकी मां के काम आ सकता है। 

वहीं, समाजवादी पार्टी ने इस बार निषाद वोट बैंक पर निशाना साधने के लिए अंबेडकरनगर निवासी भीम निषाद को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। मूल रूप से आजमगढ़ निवासी भीम राजनीति शास्त्र से परास्नातक हैं। अपने पिता व सात भाइयों के सहयोग से वे लखनऊ व अन्य कई शहरों में रियल एस्टेट का कारोबार करते हैं। फिलहाल वे अंबेडकरनगर में रहते हैं। पिछले साल नवंबर से ही भीम सुल्तानपुर में सक्रिय हैं।
 
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