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Bihar Election 2025: पिछले तीन चुनाव में किसे मिला दरभंगा प्रमंडल का साथ? जानें इस बार की चर्चित सीटों को भी

Sun, 02 Nov 2025 07:28 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sun, 02 Nov 2025 07:28 AM IST
सार

Bihar Election 2025: बिहार में कुल 243 सीटों में से इनमें से 30 सीटें दरभंगा प्रमंडल के अंदर आती हैं। इसमें तीन जिले आते हैं। 

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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार विधानसभा चुनाव का प्रचार चरम पर है। पहले चरण की वोटिंग के लिए एक हफ्ते भी नहीं बचे हैं। नौ प्रमंडल में बंटे बिहार में कहां कौन भारी पड़ता है ये 14 नवंबर को पता चलेगा। अमर उजाला की खास सीरीज में हम आपको बिहार में हर प्रमंडल के पिछले चुनावी नतीजों के बारे में बता रहे हैं। आज बात दरभंगा प्रमंडल की करते हैं। दरभंगा प्रमंडल में कुल तीन जिले आते हैं। इसमें दरभंगा, सीतामढ़ी और मधुबनी जिला शामिल हैं। 

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दरभंगा प्रमंडल का सियासी समीकरण क्या है? पिछली तीन बार यहां के सियासी समीकरण किसके पक्ष में रहे? 2020 किस दल को कितनी सीटों पर सफलता मिली थी? इस बार की चर्चित सीटें कौन सी हैं? आइये जानते हैं…

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दरभंगा क्षेत्र का सियासी समीकरण क्या है?

प्रदेश में 243 सीटों में से 30 सीटें दरभंगा प्रमंडल में आती हैं। इस क्षेत्र में 03 जिले आते हैं। तीनों जिले में 10-10 विधानसभा सीटें हैं। यह मिथिला क्षेत्र का एक हिस्सा है। इसी प्रमंड की एक सीट अलीपुर से लोकगायिका मैथिली ठाकुर को भाजपा ने टिकट दिया है। 

2020 में कैसे रहे थे नतीजे? 

2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच में था। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 125 सीटें जीतीं थीं। इनमें सबसे ज्यादा 74 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। जदयू को 43, वीआईपी और हम को 4-4 सीट पर सफलता मिली थी।  राज्य की 110 सीटें महागठबंधन के खाते में गई थीं। 75 सीटें जीतकर राजद राज्य की सबसे बड़ा दल बना था। इसके साथ ही कांग्रेस को 19, वामदलों को 16 सीट पर जीत मिली थी। इनमें 12 सीटें भाकपा (माले) और दो-दो सीटें भाकपा और माकपा के खाते में गईं थी। अन्य दलों की बात करें तो एआईएमआईएम ने पांच, बसपा, लोजपा और निर्दलीय को एक-एक सीट पर जीत मिली थी।  

दरभंगा प्रमंडल में किसे मिली थी बढ़त?

2020 के विधानसभा चुनाव में दरभंगा में एनडीए गठबंधन ने जबरदस्त जीत हासिल की। एनडीए को 30 में से 22 सीटों पर जीत मिली थी। महागठबंधन को 8 सीटें मिलीं थीं। दलवार आंकड़ों की बात करें तो दो सीटों पर सफलता मिली थी। एनडीए में शामिल भाजपा को 11 सीटें और जदयू को नौ सीटें मिली थी। वहीं, वीआईपी को दो सीटें मिलीं थी। इस चुनाव में वीआईपी एनडीए का साथ छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बन चुकी है। 2020 के चुनाव में महागठबंधन में राजद को सात सीटें मिलीं थीं। वहीं उसकी सहयोगी दल माकपा को एक सीट पर संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस इस इलाके में अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी।  

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2015 में कैसे थे नतीजे?

प्रदेश में 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच में मुकाबला हुआ। इस चुनाव में महागठबंधन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी भी शामिल थी। जदयू के अलावा राजद और कांग्रेस ने साथ मिलकर यह चुनाव लड़ा। वहीं, एनडीए में भाजपा के साथ लोजपा, जीतन राम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा शामिल थे। 

इस चुनाव में महागठबंधन ने 178 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, एनडीए को 58 सीटों से संतोष करना पड़ा था। वाम दलों के खाते में तीन सीटें गईं थी। दलवार आंकडे़ की बात करें तो राजद को सबसे ज्यादा 80 सीटें मिली थीं। जदयू के खाते में 71 और कांग्रेस को 27 सीटों पर सफलता मिली थी। एनडीए में सबसे ज्यादा 53 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। लोजपा और रालोसपा को दो-दो और हम को एक सीट जीतने में सफलता मिली थी। वाम दलों में तीनों सीटें भाकपा (माले) ने जीती थीं। बाकी चार सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहे थे। 

2015 में दरभंगा प्रमंडल में किसे मिली बढ़त?

दरभंगा प्रमंडल की बात करें तो एनडीए को एनडीए को यहां केवल चार सीटें मिली। वहीं महागठबंधन को  26 सीटें मिली थी। दलवार आंकड़ो की बात करें तो एनडीए में शामिल भाजपा को तीन और एक सीट रालोसपा को मिली थी। महागठबंधन में शामिल राजद को 11, जदयू को 13 और कांग्रेस को दो सीट मिली थी। 

2010 में कैसे थे नतीजे?

2008 में परिसीमन के बाद यहां 2010 में पहली बार चुनाव हुए थे। इस चुनाव में एकतरफा एनडीए को जीत मिली थी। एनडीए में जदयू और भाजपा ने एक साथ चुनाव लड़ा था। वहीं राजद और लोजपा साथ थे। वहीं, कांग्रेस ने सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इस चुनाव में एनडीए को 243 में से 206 सीटों पर एकतरफा जीत मिली। राजद-लोजपा गठबंधन को महज 25 तो कांग्रेस को चार सीटों से संतोष करना पड़ा। बाकी सात सीटों में से छह निर्दलियों के खाते में गई। वहीं, चकाई सीट पर झामुमो के सुमित कुमार सिंह जीते थे। दलवार आंकड़ों की बात की जाए तो एनडीए की 206 सीटों में से 115 जदयू और 91 सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। वहीं, राजद को 22 और लोजपा को 3 सीटों पर जीत मिली थी।  

 2010 में दरभंगा प्रमंंडल में किसे मिली बढ़त?

2010 में दरभंगा प्रमंडल में एनडीए ने सबसे ज्यादा 23 सीटों पर कब्जा किया, राजद गठबंधन में केवल राजद को सात सीटें मिली थी। एनडीए में भाजपा को 11 और जदयू को 12 सीटें मिली थी। कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 

इस चुनाव में दरभंगा प्रमंडल की कौन सीटें हैं चर्चा में?

दरभंगा प्रमंडल की सबसे चर्चित सीटों की बात करें तो इनमें  अलीनगर, फुलपरास, सरायरंजन, झंझारपुर जैसी सीटें शामिल है। आइये इन सीटों के बारे में जानते हैं…

अलीनगर: यह इस प्रमंडल की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। भाजपा ने यहां से लोक गायिका  मैथिली ठाकुर को मैदान में उतारा है। राजद ने यहां से विनोद मिश्रा को टिकट दिया है।  जनसुराज ने यहां से बिप्लव कुमार चौधरी को मैदान में उतारा है। 

सरायरंजन : इस सीट पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और मौजूदा मंत्री विजय चौधरी को ही टिकट मिला है। जदयू के विजय कुमार चौधरी को इस सीट पर लगातार तीन बार जीत मिली है। 2010 से लगातार वह इस सीट पर जीतते आ रहे हैं। इससे पहले इस सीट पर कोई उम्मीदवार  लगातार तीन बार नहीं जीता था। वह नीतीश कैबिनेट में कई विभागों के मंत्री भी रह चुके हैं। राजद ने अरबिंद कुमार साहनी और जनसुराज ने साजन कुमार मिश्रा को टिकट दिया है। 

झंझारपुर: इस सीट ने 1972 में बिहार को  सीएम दिया था। जगन्नाथ मिश्र इस सीट से जीत कर बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। 1972 से 1990 तक इस सीट पर जगन्नाथ मिश्र को जीत मिली। इसके बाद उनके बेट नीतीश मिश्र ने इस सीट की कमान संभाली। 2025 के लिए भी उन्हें भाजपा से टिकट दिया गया है। नीतीश कैबिनेट में उन्होंने गन्ना से लेकर पर्यटन जैसे कई मंत्रालयों को संभाला। भाकपा ने यहां राम नारायण यादव और जनसुराज ने केशवचंद्र भंडारी को मैदान में उतारा है। 

गौड़ा बौराम: यह सीट इसलिए चर्चा में है क्योंकि महागठबंधन में राजद और वाआईपी के साथ होने बावजूद यहां दोनों आमने-सामने हैं। भाजपा ने सुजीत कुमार सिंह, वाआईपी ने संतोष सहनी और राजद ने अफजल अली को मैदान में उतारा है। 

कल्याणपुर: महेश्वर हजारी की वजह से यह हॉट सीटों में से एक है। जदयू के टिकट पर लड़ रहे महेश्वर हजारी समस्तीपुर से सांसद भी रह चुके हैं। भाकपा (माले) ने रंजीत राम को मैदान में उतारा है। 

जाले: शहरी विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जीवेश कुमार मिश्रा की वजह से यह सीट चर्चा में है। उन्हें एक बार फिर इस बार भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने ऋषि मिश्रा को मैदान में उतारा है। 

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