Nobel Prize: उम्र बस एक संख्या! कुछ ने युवावस्था में रचा इतिहास, तो कुछ ने जीवन के अंतिम पड़ाव में दी नई दिशा
Youngest Nobel Prize Winner: सृजनशीलता और नवाचार किसी उम्र के बंधन में नहीं बंधते। नोबेल पुरस्कार के लिए किसी भी उम्र की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। रिकॉर्ड बताते हैं कि कुछ ने युवावस्था में इतिहास रचा, तो कुछ ने जीवन के अंतिम पड़ाव में नई दिशा दी। आइए जानते हैं सबसे कम और सबसे अधिक उम्र में नोबेल पुरस्कार किसे मिला।
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Youngest And Oldest Nobel Prize Winners: नॉर्वेजियन नोबेल समिति की ओर से 2025 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा की जा रही है। इस कड़ी में चिकित्सा, भौतिकी, रसायन, साहित्य और शांति समेत कुल पांच श्रेणियों में पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा हो चुकी है। इस बार बहुचर्चित नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की 58 वर्षीय मारिया कोरिना मचाडो को दिया गया है।
अब तक नोबेल विजेताओं की उम्र से जुड़े रिकॉर्ड बताते हैं कि सृजनशीलता और नवाचार किसी उम्र के बंधन में नहीं बंधते। कुछ ने युवावस्था में इतिहास रचा, तो कुछ ने जीवन के अंतिम पड़ाव में नई दिशा दी। नोबेल पुरस्कार के लिए किसी भी उम्र की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। किसी व्यक्ति या संगठन को उनके उत्कृष्ट कार्य, खोज या योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है।
क्या आप जानते हैं सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाली एक 17 वर्षीय किशोरी है...? आइए जानते हैं कि नोबेल पुरस्कार सबसे कम और सबसे अधिक उम्र में किन्हें मिला है...
मलाला यूसुफजई: सबसे कम उम्र (17) की नोबेल पुरस्कार विजेता
मलाला यूसुफजई (Malala Yousafzai) को वर्ष 2014 में केवल 17 वर्ष की आयु में नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize 2014) से सम्मानित किया गया था। उन्होंने उस दौर में पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज उठाई, जब तालिबान शासन ने महिलाओं की शिक्षा पर कड़ा प्रतिबंध लगाया हुआ था।
सिर्फ 15 साल की उम्र में तालिबान के हमले का सामना करने के बाद भी मलाला ने हार नहीं मानी और शिक्षा के लिए अपने संघर्ष को और मजबूत बनाया। उनका यह पुरस्कार युवाओं की शक्ति, साहस और बदलाव की भावना का प्रतीक बन गया।
जॉन बी. गुडइनफ: सबसे अधिक उम्र (97) के नोबेल पुरस्कार विजेता
जॉन बी. गुडइनफ (John B. Goodenough) ने 2019 में 97 वर्ष की आयु में रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतकर इतिहास रचा। उन्होंने लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-ion Battery) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके शोध ने ऊर्जा भंडारण तकनीक को पूरी तरह बदल दिया, जिससे आज के स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा प्रणालियों का विकास संभव हुआ। गुडइनफ का योगदान यह साबित करता है कि नवाचार और जिज्ञासा उम्र से परे होती है।
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दूसरे नंबर पर हैं ये लोग
- विलियम लॉरेंस ब्रैग (William Lawrence Bragg) - मात्र 25 वर्ष की आयु में वर्ष 1915 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार विलियम लॉरेंस ब्रैग को "एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी" में योगदान के लिए दिया गया।
- आर्थर ऐश्किन (Arthur Ashkin) - वर्ष 2018 में 96 वर्ष की उम्र में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार आर्थर ऐश्किन को "ऑप्टिकल ट्वीज़र्स" तकनीक के लिए दिया गया।
अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार वर्ष 1895 में स्थापित यह पुरस्कार विश्वभर के उन व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है, जिन्होंने भौतिकी, रसायन विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में अद्भुत योगदान दिया हो। यह सम्मान केवल ज्ञान या अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता की भलाई के प्रति समर्पण और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयासों का प्रतीक है।
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