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प्ले स्कूल में नौनिहालों की लिखित या मौखिक परीक्षा बेहद खतरनाक: NCERT

Tue, 15 Oct 2019 04:21 AM IST
संजीव कुमार झा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 15 Oct 2019 04:21 AM IST
सार

  • खेलने-चहकने की उम्र में होमवर्क का बोझ ठीक नहीं 
  • चेकलिस्ट, पोर्टफोलियो और संवाद जैसी तकनीकों की मदद से हर बच्चे का आकलन हो 

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Written or oral exam for children in play school is very dangerous
एनसीईआरटी - फोटो : Social Media

विस्तार

प्ले स्कूल में दाखिले के लिए नौनिहालों की लिखित व मौखिक परीक्षाएं लेने की प्रक्रिया को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और परीक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने खतरनाक बताते हुए इसे तुरंत रोकने की सलाह दी है। एनसीईआरटी ने कहा इन परीक्षाओं से अभिभावकों के मन में बच्चों के लिए एक अजब सी आकांक्षाएं पैदा होती हैं जो बच्चों की उम्र के लिहाज से हानिकारक हैं और भविष्य में इन बच्चों के लिए मुसीबत बनती हैं।

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एनसीईआरटी ने कहा, नन्हे मुन्नों पर परीक्षा मूल्यांकन के जरिए पास या फेल का लेबल लगाना मनोवैज्ञानिक रूप से गलत है। ऐसा बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए, इस पर तत्काल रोक लगे। इस तरह की प्रक्रिया का असर अभिभावक और बच्चों की मनोदशा पर पड़ता है। एनसीईआरटी ने मौखिक और लिखित परीक्षाओं को बंद कर नन्हे मुन्नों के मूल्यांकन के लिए अलग दिशा निर्देश जारी किए हैं। साथ ही शिक्षकों के वेतन, योग्यता और ढांचागत सुविधाओं का पैमाना भी निर्धारित गया है।

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खेलने-चहकने की उम्र में होमवर्क का बोझ ठीक नहीं 

एनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, खेलने चहकने की उम्र में इन बच्चों पर होमवर्क और परीक्षाओं का बोझ डालना ठीक नहीं। आज देश में कई तरह के प्ले स्कूल प्रोग्राम चल रहे हैं जिनमें बेहद सुस्त और नीरस दिनचर्या से लेकर खूब सीखना सिखाना जैसी व्यवस्था है। अंग्रेजी में बच्चों को पोयम और राइम्स सिखाई जा रहीं हैं, होमवर्क दिया जा रहा है, परीक्षाएं ली जा रही हैं। ये सब इन नन्हे मुन्नों के खेलने के अधिकार को छीनने जैसा है। यह प्रक्रिया अवांछित और हानिकारक है जिसका खामियाजा बच्चों को भविष्य में उठाना पड़ता है। 

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 नन्हे मुन्नों का मूल्यांकन ऐसे हो 

  • चेकलिस्ट, पोर्टफोलियो और अन्य बच्चों से संवाद जैसी तकनीकों की मदद से हर बच्चे की प्रगति का लगातार आकलन हो 
  • बच्चों के सामाजिक संबंध, भाषा के प्रयोग, संवाद के तरीके, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आदतों पर शिक्षिकाएं नोट बनाएं 
  • हर बच्चे का फोल्डर उसके अभिभावकों को दिखाया जाये, अगली कक्षा में जाने तक यह नोट स्कूल में सुरक्षित रखे जाएं 
  • सभी अभिभावकों को साल में कम से कम दो बार अपने बच्चों की लिखित एवं मौखिक प्रगति रिपोर्ट लेनी चाहिए
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