IARI 61st Convocation: उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा- भारत का उदय नहीं रुकेगा, बनेगा तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था
IARI: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 61वें दीक्षांत समारोह को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "सितंबर 2022 में भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
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IARI 61st convocation: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कहा कि भारत का उदय अब रुकने वाला नहीं है, क्योंकि देश में लगातार विकसित होती कृषि और कृषि आधारित उद्योगों के कारण भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था के आसमान का चमकता सितारा बन रहा है। उन्होंने कहा कि दशक के अंत तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 61वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता के मौके पर धनखड़ ने कहा कि देश में अथक प्रयासों और कठिन मेहनत के बल पर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का गौरव प्राप्त किया है। इसे बनाए रखने में हम सबको अपनी अपनी भूमिका सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा, यह देश के अन्नदाता का ही कमाल है कि उसने हर कसौटी पर खुद को खरा साबित किया है।
भारत पर टिप्पणी करने वाले विदेशी विशेषज्ञों को लिया आड़े हाथों
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, आरबीआई जैसे प्रमुख पदों पर थोड़े समय के लिए काम कर चुके कुछ विदेशी विशेषज्ञों की भारत के बारे में की गई टिप्पणियों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश से आकर देश में ऊंचे पदों पर बैठकर सलाह देने वाले कार्यकाल समाप्त होने पर विस्तार न मिलने पर नकारात्मक प्रचार करते हैं। मालूम हो कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एक बयान में कहा था कि भारत भोजन संकट का सामना कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पता नहीं होगा कि सरकार 2020 से 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त अनाज दे रही है।
आर्थिक क्रांति का बड़ा मुद्दा
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से कृषि के विकास और उन्नत सुदृढ़ीकरण के लिए काम करने का आह्वान करते हुए कहा, यह आर्थिक क्रांति का बहुत बड़ा मुद्दा है। उन्होंने किसानों को खेत में ही अपने उत्पादन में गुणवत्ता बढ़ाने का सुझाव दिया। धनखड़ ने कहा कि अन्नदाता की सहायता करके ही विकास की राह को प्रशस्त किया जा सकता है। भारतीय कृषि यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और कृषि आधारित औद्योगिक विकास का मूल है। भारत अवसरों और निवेश का प्रमुख स्थल है।
संसद को ‘अखाड़ा’ नहीं बनने दिया जा सकता
विधायी बहस की खराब गुणवत्ता को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सांसदों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करने की जरूरत है। संसद को ‘अखाड़ा’ नहीं बनने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान ने सांसदों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है, लेकिन यह एक जिम्मेदारी के साथ आती है। उन्होंने कहा कि सांसदों को विशेषाधिकार प्राप्त है, क्योंकि संसद में कही गई किसी भी बात के लिए उनके खिलाफ अदालत में कोई मामला दायर नहीं किया जा सकता।
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