यूपी बोर्ड की सख्ती: 10वीं के सर्टिफिकेट में जन्मतिथि संशोधन का झंझट होगा खत्म; स्कूलों को मानने होंगे ये नियम
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विद्यार्थियों की जन्मतिथि में संशोधन से जुड़े मामलों को लेकर स्कूलों को जरूरी निर्देश दिए हैं। परिषद ने कहा है कि पहली बार विद्यालय में प्रवेश के समय निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर ही जन्मतिथि दर्ज की जाए। जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध न होने पर वैकल्पिक अभिलेखों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने हाईस्कूल अंकपत्र सह प्रमाणपत्र में जन्मतिथि संशोधन को लेकर आ रही विसंगतियों और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश के समय ही जन्मतिथि के प्रामाणिक अभिलेख दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।
क्यों जारी करने पड़े जन्मतिथि को लेकर ये निर्देश?
यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों और प्रयागराज मुख्यालय पर लगातार छात्र-छात्राओं की जन्मतिथि संशोधन से जुड़े मामले प्राप्त हो रहे थे। जांच में यह बात सामने आई कि:
- न्यूनतम आयु से कम उम्र में दाखिला: कई मामलों में देखा गया कि प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे का दाखिला शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act)- 2009 द्वारा निर्धारित न्यूनतम आयु से कम उम्र में ही कर लिया गया था।
- मूल दस्तावेज का उल्लेख न होना: टीसी जारी करते समय प्रधानाध्यापकों द्वारा उस मूल अभिलेख का उल्लेख ही नहीं किया जाता था, जिसके आधार पर बालक/बालिका की पहली बार जन्मतिथि दर्ज की गई थी।
- संदेह और फर्जीवाड़ा: मूल आधार का उल्लेख न होने से अभिलेखों की सत्यता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता था और बाद में बोर्ड परीक्षा के समय संशोधन के लिए चक्कर काटने पड़ते थे।
परिषद ने ऐसे कई मामलों का उल्लेख किया है, जिनमें प्रवेश के समय बच्चे की आयु निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में निर्धारित आयु से कम पाई गई। इसके अलावा कई मामलों में प्रधानाध्यापकों ने जन्मतिथि दर्ज करते समय उस अभिलेख का उल्लेख भी नहीं किया, जिसके आधार पर बच्चे की जन्मतिथि दर्ज की गई थी।
कक्षा एक में प्रवेश के लिए कितनी आयु जरूरी है?
निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अनुसार कक्षा एक में प्रवेश की आयु छह वर्ष निर्धारित की गई है। इसलिए विद्यालय में पहली बार प्रवेश के समय विद्यार्थी की आयु और जन्मतिथि का सही अभिलेख के आधार पर अंकन किया जाना जरूरी है।
जन्म प्रमाण पत्र नहीं है तो किन दस्तावेजों से दर्ज होगी जन्मतिथि?
अधिनियम की धारा 14 और नियमावली, 2011 के नियम 9 में जन्मतिथि के अंकन के लिए जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाने की व्यवस्था है। यदि जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, तो निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक के आधार पर बच्चे की आयु को प्रमाणित किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:
| स्वीकृत अभिलेख/दस्तावेज | विवरण |
| अस्पताल या ANM पंजी अभिलेख | अस्पताल या सहायक नर्स एवं मिडवाइफ द्वारा जारी रिकॉर्ड |
| आंगनबाड़ी का अभिलेख | बाल विकास परियोजना (ICDS) का पंजीकृत रिकॉर्ड |
| ग्राम पंजी अभिलेख | ग्राम पंचायत द्वारा संधारित जन्म एवं मृत्यु संबंधी पंजी |
| अभिभावक का शपथ-पत्र | माता-पिता या अभिभावक द्वारा बालक की आयु से संबंधित दिया गया शपथ-पत्र (Affidavit) |
पहली बार प्रवेश के समय स्कूलों को क्या करना होगा?
परिषद ने स्पष्ट किया है कि विद्यालय में विद्यार्थी के प्रथम प्रवेश के समय ऊपर बताए गए निर्धारित अभिलेखों में से किसी एक के आधार पर ही उसकी जन्मतिथि दर्ज की जानी सुनिश्चित की जाए।
इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी की जन्मतिथि का मूल अभिलेख स्पष्ट रहे और बाद में हाईस्कूल प्रमाणपत्र सह अंकपत्र में जन्मतिथि संशोधन से जुड़े मामलों में परेशानी न हो।
परिषद ने विद्यालयों से जन्मतिथि दर्ज करते समय उस अभिलेख का उल्लेख करने की अपेक्षा की है, जिसके आधार पर विद्यार्थी की जन्मतिथि दर्ज की गई है। इससे भविष्य में जन्मतिथि से जुड़े किसी भी मामले में मूल प्रमाण का सत्यापन किया जा सकेगा।
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