फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Union Public Service Commission changed so much in 40 years

40 साल में इतना बदल गया संघ लोक सेवा आयोग

Mon, 20 Aug 2018 05:54 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 20 Aug 2018 05:54 PM IST
विज्ञापन
Union Public Service Commission changed so much in 40 years

विज्ञापन
राष्ट्रवादियों ने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान राजनैतिक आन्दोलन चलाया। उनकी एक प्रमुख मांग थी कि लोक सेवा आयोग में भर्ती भारत में हो क्योंकि तब इसकी परीक्षा इंग्लैंड में हुआ करती थी। प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना अक्टूबर 1, 1926 (91 वर्ष पहले) को हुई।
आजादी के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत 26 अक्तूबर 1950 को लोक आयोग की स्थापना हुई। इसे संवैधानिक दर्जा देने के साथ स्वायत्त शासन की ताकत भी प्रदान की गई ताकि यह बिना किसी दबाव के योग्य अधिकारियों की भर्ती क़र सके। इस नव स्थापित लोक सेवा आयोग को संघ लोक सेवा आयोग नाम दिया गया। इसके द्वारा होने वाली परीक्षाएं कुछ इस प्रकार है-
विज्ञापन

परीक्षाओं की जानकारी

- संघ लोक सेवा आयोग मई में सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा आयोजित करवाता है।  
- सिविल सेवा (प्रधान) परीक्षा अक्टूबर और नवंबर में आयोजित करवाता है।
- भारतीय वन सेवा और इंजीनियरी सेवा परीक्षा जुलाई में आयोजित करवाता है।
- भू-विज्ञानी परीक्षा दिसंबर में आयोजित करवाता है।
- स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेंटिसेज़ परीक्षा अगस्त में आयोजित करवाता है।
- राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा अप्रैल और सितंबर में आयोजित करवाता है।
- सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा मई और अक्टूबर में आयोजित करवाता है।
- सम्मिलित चिकित्सा सेवा परीक्षा फरवरी में आयोजित करवाता है।
- भारतीय अर्थ सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा परीक्षा सितंबर में आयोजित करवाता है।
- अनुभाग अधिकारी और आशुलिपिक (ग्रेड ख/ग्रेड 1) सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा दिसंबर में आयोजित करवाता है।
 

यूपीएससी में हुए बदलाव

1979 में स्पेशल नॉटिफिकेशन जारी कर सिविल सर्विसिज के पैटर्न में बदलाव का एलान किया गया था। नए पैटर्न के तहत एग्जाम्स के स्ट्रक्चर और स्कीम्स के बारे में छात्रों को जानकारी दी गई।
1979 में ही जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट को तीन बार परीक्षा देने की छूट दी गई थी और साथ ही मैक्सिमम एज लिमिट बढ़ाकर 26 से 28 कर दी गई।
1990 में एक नया नोटिफिकेशन जारी कर जनरल कैटेगरी के छात्रों की परीक्षा देने की संख्या 4 कर दी गई, जबकि एज लिमिट जोकि पहले से बड़ा दी गई थी उसे 28 से 31 वर्ष कर दी गई।
1991 में फिर से एक नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया जिसमें एज लिमिट फिर से 31 वर्ष से 28 कर दी गई।
1992 में परीक्षा देने की संख्या 5 कर दी गई और एज लिमिट 28 से 33 कर दी गई लेकिन यह नोटिफिकेशन भी सिर्फ 1992 के लिए लागू किया गया।
1993 में अटेंप्ट की संख्या घटाकर 4 कर दी गई और एज लिमिट फिर से 28 कर दी गई।
1994 में यूपीएसी एग्जाम में ओबीसी रिजर्वेशन लागू किया गया ओबीसी कैंडिडेट के लिए 7 अटैंप्ट की छूट दी गई।
1995 में फिजिकल हैंडीकैंप्ड को 3 प्रतिशत रिजर्वेशन दिया गया।
1998 में जनरल कैटेगरी के लिए 4 और ओबीसी के लिए 7 परीक्षा की संख्या रखी गई, लेकिन जनरल कैटेगरी की एज लिमिट 28 से 30 साल कर दी गई।
2011 में ऑप्शनल पेपर की बजाय प्रिलिम्स में एप्टीट्यूड को इंट्रोड्यूस किया गया।
2012 तक 2013 में होने वाले बदलाव पर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया।
2013 में एज लिमिट को लेकर किसी तरह की घोषणा नहीं की गई।
2018 में जनरल कैटैगरी के लिए 32, एससी, एसटी के लिए 37, ओबीसी के लिए 35 एज लिमिट निर्धारित की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed