UGC NET Retest: नहीं घटेगी क्वालिफाइंग सीटों की संख्या, क्या कोई अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा? जानें ताजा अपडेट
UGC NET Retest 2026: यूजीसी नेट के इंग्लिश, कॉमर्स और समाजशास्त्र पेपर की दोबारा परीक्षा होगी। एनटीए सूत्रों के मुताबिक री-टेस्ट के लिए अतिरिक्त फीस नहीं लगेगी। वहीं, क्वालिफाइंग उम्मीदवारों की संख्या और विषयवार आवंटन कम नहीं होगा। प्रश्नपत्र प्रक्रिया की भी समीक्षा होगी।
विस्तार
UGC NET Retest 2026: यूजीसी नेट के इंग्लिश, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की दोबारा होने वाली परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। एनटीए के सूत्रों के मुताबिक, री-टेस्ट के लिए उम्मीदवारों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही दोबारा परीक्षा के कारण इन तीन विषयों में क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों की संख्या और विषयवार आवंटन में कटौती नहीं की जाएगी।
एएनआई को सूत्रों ने बताया कि यह दोबारा परीक्षा उम्मीदवारों के हित में सुधारात्मक कदम के तौर पर कराई जा रही है। एनटीए का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना और भविष्य में प्रश्नपत्रों में इस तरह की खामियों को रोकना है।
क्या है पूरा मामला?
यूजीसी नेट 2026 की परीक्षा जून में 87 विषयों के लिए आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद इंग्लिश, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों को लेकर एनटीए को बड़ी संख्या में शिकायतें मिली थीं। उम्मीदवारों ने प्रश्नपत्रों में कई तरह की गलतियों और सवालों से जुड़ी समस्याओं की ओर एजेंसी का ध्यान दिलाया।
शिकायतों के बाद एनटीए ने इन तीनों विषयों के प्रश्नपत्रों की जांच के लिए एक समिति गठित की। समिति ने प्रश्नपत्रों की समीक्षा की और कई तरह की खामियां सामने आने के बाद तीनों विषयों की परीक्षा दोबारा कराने की सिफारिश की।
प्रश्नपत्रों में मिलीं कई तरह की गलतियां
एनटीए के अनुसार, समिति की जांच में तीनों प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी कई गलतियां मिलीं। इनमें प्रमुख विद्वानों के नाम गलत लिखे जाने से लेकर किताबों के शीर्षकों में गड़बड़ी तक शामिल थी।
इसके अलावा कुछ प्रश्नों की भाषा में भी समस्या पाई गई। समिति ने व्याकरण से जुड़ी गलतियां, लिंग और वचन के मेल में गड़बड़ी, विराम चिह्नों की गलतियां और स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर-मानक शब्दों के इस्तेमाल जैसी खामियां भी दर्ज कीं।
जांच में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में प्रश्न पहले आयोजित की जा चुकी परीक्षाओं से दोहराए गए थे। समिति ने निष्पक्ष और त्रुटिरहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन तीनों विषयों का पेपर दोबारा कराने की सिफारिश की।
री-टेस्ट से क्वालिफाइंग उम्मीदवारों पर नहीं पड़ेगा असर
अब सबसे अहम सवाल यह है कि दोबारा परीक्षा होने पर क्या इन विषयों में क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों की संख्या कम होगी? सूत्रों ने इस पर स्थिति साफ करते हुए कहा है कि री-टेस्ट के कारण क्वालिफाइंग उम्मीदवारों की संख्या कम नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही इंग्लिश, कॉमर्स और समाजशास्त्र में विषयवार आवंटन में भी कटौती नहीं होगी। यानी दोबारा परीक्षा का आयोजन उम्मीदवारों के क्वालिफाइंग अवसरों को कम करने के लिए नहीं किया जा रहा है।
री-टेस्ट के लिए नहीं लगेगी अतिरिक्त फीस
एनटीए सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों को तीनों विषयों की दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। यानी पहले परीक्षा के लिए भुगतान कर चुके अभ्यर्थियों से री-टेस्ट के नाम पर अलग फीस नहीं ली जाएगी।
यह जानकारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब अभ्यर्थी दोबारा परीक्षा कराने के कारण होने वाले खर्च और परेशानी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए यात्रा और अन्य खर्च करना पड़ सकता है।
पेपर तैयार करने की प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी
इस पूरे मामले के बाद एनटीए अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा भी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने के अलग-अलग चरणों में सुधार किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया
- प्रश्नों की मॉडरेशन
- प्रश्नपत्र का अनुवाद
- प्रश्नपत्र की कंपोजिंग
- अंतिम स्तर पर जांच और सत्यापन
एनटीए का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रश्नपत्र में होने वाली इस तरह की गलतियां परीक्षा से पहले ही पकड़ में आ जाएं।
लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की भी तैयारी
एनटीए सिर्फ प्रक्रिया में सुधार तक सीमित नहीं रहना चाहता। सूत्रों के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी चूकों के लिए जिम्मेदारी तय करने के तरीकों पर भी काम किया जा रहा है।
एजेंसी अपने आंतरिक प्रोटोकॉल की समीक्षा कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र तैयार करने और अंतिम रूप देने के दौरान किस स्तर पर खामी रह गई। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए जरूरी सुधार लागू किए जाएंगे।
छात्रों के विरोध के बीच आया अपडेट
तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने के फैसले के बाद एनटीए को अभ्यर्थियों की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। छात्र संगठनों ने भी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। एनएसयूआई, एसएफआई और आइसा समेत छात्र संगठनों ने इस मुद्दे को उठाया है।
अभ्यर्थियों की मुख्य चिंता यह है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी में समय और मेहनत लगाई थी। इसके अलावा परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए यात्रा और रहने का खर्च भी किया था। अब री-टेस्ट की वजह से उन्हें फिर से परीक्षा की तैयारी करनी होगी और परीक्षा केंद्र तक जाना पड़ सकता है।
ऐसे में अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने और क्वालिफाइंग अवसरों में कटौती नहीं करने की जानकारी उम्मीदवारों के लिए राहत वाली है। हालांकि, यात्रा और अन्य खर्च को लेकर एनटीए की ओर से इस जानकारी में कोई अलग घोषणा नहीं की गई है।
आंसर की जारी होने के बाद बढ़ा विवाद
यूजीसी नेट 2026 की परीक्षा के बाद आंसर की जारी करने में देरी को लेकर भी एनटीए को आलोचना का सामना करना पड़ा। एजेंसी ने रविवार को आंसर की जारी की थी। इसी बीच तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने की जानकारी सामने आने से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल और तेज हो गए।
एनटीए के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे तीन विषयों की री-टेस्ट प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करना है, वहीं दूसरी तरफ प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में ऐसी खामियों को दोबारा होने से रोकना भी है।
पहले भी एनटीए की कार्यप्रणाली पर उठ चुके हैं सवाल
यूजीसी नेट से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब एनटीए पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर आलोचना का सामना कर चुका है। नीट यूजी 2026 में पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द किए जाने से देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
उस मामले के बाद एनटीए की परीक्षा प्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई जगहों पर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक बहस और तेज हुई।
अब यूजीसी नेट के तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने के फैसले ने एक बार फिर प्रश्नपत्र तैयार करने, जांच और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है।
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