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Hindi News ›   Education ›   UGC finalises draft for dual or joint degree and twinning program

UGC ने ड्यूअल डिग्री प्रदान करने वाले भारतीय और वैश्विक संस्थानों के ड्राफ्ट को दिया अंतिम रूप

Sun, 21 Feb 2021 05:18 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Sun, 21 Feb 2021 05:18 PM IST
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UGC finalises draft for dual or joint degree and twinning program
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) - फोटो : पीटीआई

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने संयुक्त/ दोहरी डिग्री (जॉइंट/ ड्यूअल डिग्री) और ट्विनिंग कार्यक्रमों के नियमों का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया है। इसे फीडबैक के लिए पब्लिक डोमेन में डाला गया है। प्रतिक्रियाओं के मूल्यांकन के पश्चात अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके तहत अब भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान जल्द ही इन कार्यक्रमों को शुरू कर पाएंगे।

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दरअसल, इस मसौदे के मुताबिक यूजीसी विनियम 2021, के तहत भारत के उच्च शिक्षण संस्थान, विदेशी शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर क्रेडिट रीकॉग्निशन व ट्रांसफर के लिए ट्विनिंग व्यवस्था कर सकते हैं। हालांकि, यह नियम, ऑनलाइन और ओपन व डिस्टेंस लर्निंग मोड वाले प्रोग्राम्स पर लागू नहीं होंगे।

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मसौदे में बताया गया है कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) द्वारा मान्यता के साथ न्यूनतम 3.01 स्कोर प्राप्त/ राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के विश्वविद्यालय श्रेणी में शीर्ष 100 में जगह बनाने वाले/ इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस का दर्जा पाने वाले कोई भी भारतीय संस्थान, टाइम्स हायर एजुकेशन या क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के टॉप 500 में जगह बनाने वाले विदेशी संस्थान के साथ स्वचालित रूप से कोलैबोरेट कर सकते हैं। वहीं अन्य भारतीय संस्थानों को कोलैबोरेट करने से पहले यूजीसी से मंजूरी लेनी होगी। 
 

यूजीसी द्वारा तैयार इस मसौदे में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोहरी डिग्री अर्थात ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को भारतीय और विदेशी संस्थानों की डिग्री संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। इसके बाद ही दोनों संस्थान अलग-अलग या संयुक्त डिग्री दे पाएंगे। साथ ही इस कोलैबोरेशन के आधार पर प्रदान की गई कोई भी डिग्री या डिप्लाेमा का दर्जा भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा प्रदान की गई डिग्री के बराबर होगा। इसके बाद किसी भी प्राधिकारी से समतुल्यता प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी।   

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