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UCMC: डीयू से अलग होगा यूसीएमसी, स्वास्थ्य विभाग की ओर से डीयू कुलसचिव को भेजा गया आदेश
Fri, 21 Mar 2025 11:11 AM IST
शाहीन परवीन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शाहीन परवीन
Updated Fri, 21 Mar 2025 11:11 AM IST
सार
Health Department: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस को दिल्ली विश्वविद्यालय से अलग करने का आदेश जारी किया है। इस संबंध में डीयू के कुलसचिव को आधिकारिक पत्र भेजा गया है। यह फैसला मेडिकल शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों के तहत लिया गया है, जिससे यूसीएमसी को स्वतंत्र रूप से संचालित किया जा सके।
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दिल्ली विश्वविद्यालय, (DU)
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
UCMS: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से संबद्ध यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस (UCMS) को अलग किए जाने का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है। दिल्ली सरकार ने यूसीएमएस को अपने अधीन लेने की तैयारी कर ली है। इस संबंध में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से डीयू कुलसचिव को एक आदेश भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि वह अपने संस्थानों की सूची से यूसीएमएस को हटाने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करें। डीयू इस मामले को डीयू की कार्यकारी परिषद में ले जाकर सुलझाए। इसके अधिग्रहण की प्रक्रिया एक अप्रैल तक करने का आदेश दिया है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के पत्र में वित्तीय विभाग से आग्रह किया गया है कि वह आपातकालीन आधार पर यूसीएमएस के लिए 100 करोड़ रुपये का फंड आवंटित करें, जिससे की संस्थान को अधीन लेने के बाद किसी प्रकार की वित्तीय समस्याएं ना आएं।
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वर्ष 2024 में कोर्ट ने इस मामले पर लगे स्टे को हटा दिया है, जिसके बाद अब दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि बिना किसी देरी के यूसीएमएस को अपने अधीन लेने का मार्ग प्रशस्त हो। इस पूरे मामले पर इंडियन नेशनल टीचर्स काग्रेंस (इंटेक) के चेयरमैन प्रो. पंकज गर्ग ने दिल्ली सरकार के इस आदेश का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि डीयू के कुलपति को यूसीएमएस को संस्थानों की सूची से हटाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।
यूसीएमएस का अधिग्रहण वहां के शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और छात्रों के हितों के लिए हानिकारक है। विश्वविद्यालय को दिल्ली सरकार के 18 मार्च को आए आदेश को सिरे से खारिज कर देना चाहिए।
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दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के पत्र में वित्तीय विभाग से आग्रह किया गया है कि वह आपातकालीन आधार पर यूसीएमएस के लिए 100 करोड़ रुपये का फंड आवंटित करें, जिससे की संस्थान को अधीन लेने के बाद किसी प्रकार की वित्तीय समस्याएं ना आएं।
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डीयू से यूसीएमएस को अलग करने पर विवाद तेज
इससे पहले 2015-16 में यूसीएमएस को दिल्ली सरकार को सौंपे जाने का मामला गरमाया था। यूसीएमएस के कर्मचारी यूनियन की ओर से इसे दिल्ली सरकार के अधीन किए जाने के विरोध में आंदोलन भी शुरू किया गया था। यह मामला उसके बाद कोर्ट में भी पहुंचा था। डीयू से यूसीएमएस को अपने अधीन लेने के लिए मामला कोर्ट गया था।
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वर्ष 2024 में कोर्ट ने इस मामले पर लगे स्टे को हटा दिया है, जिसके बाद अब दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि बिना किसी देरी के यूसीएमएस को अपने अधीन लेने का मार्ग प्रशस्त हो। इस पूरे मामले पर इंडियन नेशनल टीचर्स काग्रेंस (इंटेक) के चेयरमैन प्रो. पंकज गर्ग ने दिल्ली सरकार के इस आदेश का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि डीयू के कुलपति को यूसीएमएस को संस्थानों की सूची से हटाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों पर खतरा
यह डीयू के अध्यादेशों और विधियों का पूर्ण उल्लंघन है। संबद्धता या गैर-संबद्धता विश्वविद्यालय और संबद्ध संस्थान के बीच का मुद्दा और मामला है और दिल्ली विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आते हैं और उनकी सेवा शर्तें शिक्षा मंत्रालय के मानदंडों द्वारा शासित होती हैं।यूसीएमएस का अधिग्रहण वहां के शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और छात्रों के हितों के लिए हानिकारक है। विश्वविद्यालय को दिल्ली सरकार के 18 मार्च को आए आदेश को सिरे से खारिज कर देना चाहिए।
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