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CBSE Improvement Examination: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की मूल परिणामों में बदलाव के खिलाफ याचिका पर सुनवाई 6 दिसंबर तक टाली
Mon, 22 Nov 2021 09:16 PM IST
सुभाष कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: सुभाष कुमार
Updated Mon, 22 Nov 2021 09:16 PM IST
सार
CBSE: सीबीएसई के वकील द्वारा इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगे जाने के बाद जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने मामले को छह दिसंबर तक के लिए टाल दिया।
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छात्रों गुहार लगाई गई है कि उनके मूल रिजल्ट को रद्द नहीं किया जाए।
- फोटो : Social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इंप्रूवमेंट परीक्षा के मामले में 12वीं कक्षा के छात्रों की याचिका पर सुनवाई को टाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई दिसंबर के पहले हफ्ते में 6 तारीख को करेगा। 12वीं कक्षा के छात्रों द्वारा दायर की गई इस याचिका में सीबीएसई को निर्देश देने की गुहार लगाई गई है कि उनके मूल रिजल्ट को रद्द नहीं किया जाए। ये वे छात्र हैं जो सुधार परीक्षा में फेल हो गए हैं या उन्हें कम अंक प्राप्त हुए हैं।
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सीबीएसई के वकील द्वारा इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगे जाने के बाद जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने मामले को छह दिसंबर तक के लिए टाल दिया। सीबीएसई के वकील ने यह कहते हुए समय मांगा कि उन्हें रविवार शाम को ही याचिका की प्रति दी गई थी।
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इससे पहले शीर्ष अदालत ने छात्रों की ओर से पेश वकील ममता शर्मा को सीबीएसई और केंद्रीय एजेंसी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के वकील को याचिका की प्रति देने का निर्देश दिया था।
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छात्रों को मूल परिणाम रद्द होने का डर
11 छात्रों द्वारा दायर की गई इस याचिका में सुधार परीक्षा के परिणाम के बजाय याचिकाकर्ताओं के मूल परिणाम बनाए रखने के लिए सीबीएसई को निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि छात्रों को आशंका है कि सीबीएसई द्वारा घोषित उनका मूल परिणाम जिसमें उन्हें पास घोषित किया गया था, सीबीएसई द्वारा 17 जून, 2021 की मूल्यांकन नीति के आधार पर रद्द कर दिया जाएगा।
मूल्यांकन नीति में कहा गया था कि जो छात्र मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं होंगे उन्हें सुधार परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाएगा। इस नीति के अनुसार बाद की परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम माना जाएगा। याचिकाकर्ता छात्रों का तर्क है कि यह नीति, सीबीएसई के अपने अन्य परिपत्रों के विपरीत है।
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