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सुप्रीम कोर्ट : केंद्र और आईआईटी को निर्देश; फैकल्टी भर्ती संबंधी नियमों एवं आरक्षण का करना होगा पालन

Mon, 19 Dec 2022 05:19 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Mon, 19 Dec 2022 05:19 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों को शिक्षक संवर्ग की भर्तियों में आरक्षण अधिनियम-2019 के तहत अनुसंधान डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश और आईआईटी में संकाय सदस्यों की भर्ती के लिए आरक्षण नीति का पालन करने का निर्देश दिया है।

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Supreme Court directs Centre, IITs to follow Reservation Quota Law in Recruitment of Faculty
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों को शिक्षक संवर्ग की भर्तियों में आरक्षण अधिनियम-2019 के तहत अनुसंधान डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश और आईआईटी में संकाय सदस्यों की भर्ती के लिए आरक्षण नीति का पालन करने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने एसएन पांडे नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में केंद्र सरकार और आईआईटी को अनुसंधान कार्यक्रमों में प्रवेश और संकाय सदस्यों की भर्ती के संबंध में आरक्षण नीति का पालन करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि आईआईटी जैसे केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है।  

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मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ को बताया गया कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक संवर्ग में आरक्षण अधिनियम, 2019 इस तरह के आरक्षण को निर्धारित करता है और इसे लागू किया जा रहा है। प्रतिवादी की ओर से पेश वकील ने कहा है कि अब केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में शिक्षक संवर्ग में आरक्षण अधिनियम, 2019 के मद्देनजर, आईआईटी सहित सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में आरक्षण प्रदान किया जाता है।
 

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इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि संबंधित प्रतिवादियों को आरक्षण का पालन करने और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत प्रदान किए गए आरक्षण के अनुसार कार्य करने का निर्देश दिया जाता है। बता दें कि यह अधिनियम अनुसूचित जातियों/जनजातियों, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोगों के लिए केंद्रीय संस्थानों में शिक्षण पदों पर कोटा प्रदान करता है।

 

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अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर याचिका में पांडे ने रिसर्च छात्रों/विद्वानों द्वारा उत्पीड़न की शिकायतों को हल करने के लिए एक तंत्र बनाने और मौजूदा फैकल्टी के प्रदर्शन की समीक्षा करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने के निर्देश भी मांगे थे। उन्होंने आरक्षण नियमों के उल्लंघन और खराब प्रदर्शन करने वाले फैकल्टी की नियुक्ति को रद्द करने की मांग भी की थी। याचिका में कहा गया है कि आईआईटी आरक्षण नीतियों का पूरी तरह से उल्लंघन कर रहे हैं, जबकि यहां अनुसूचित जाति के लिए 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 17 प्रतिशत और ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का नियम है।

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