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SC: बच्चों को म्यूजिक-आर्ट्स क्लास भेजने के बजाय उनसे बात करें, सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता को क्यों दी यह सलाह

Thu, 20 Aug 2026 08:34 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Akash Kumar Updated Thu, 20 Aug 2026 08:34 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की परवरिश को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को संगीत, ताइक्वांडो और दूसरी कई कक्षाओं में भेजने के बजाय माता-पिता को उनके साथ समय बिताकर बातचीत करनी चाहिए। इससे माता-पिता और बच्चों के बीच बेहतर जुड़ाव बन सकता है।
 

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Supreme Court Asks Parents to Spend Time Talking to Children Instead of Too Many Classes
Supreme Court - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

Supreme Court On Extra Classes: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 20 अगस्त को एक बच्चे की हिरासत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान माता-पिता को बच्चों की परवरिश को लेकर अहम सलाह दी। अदालत ने कहा कि बच्चों को बहुत सारी अतिरिक्त कक्षाओं में भेजने के बजाय माता-पिता को उनके लिए समय निकालना चाहिए और उनसे बातचीत करनी चाहिए।

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न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान पीठ ने बच्चों को कई तरह की स्कूल के बाद होने वाली गतिविधियों में भेजने पर सवाल उठाया।

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क्या हर गतिविधि बच्चे के लिए फायदेमंद होती है?

माता-पिता अक्सर बच्चों को दूसरे बच्चों से आगे रखने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए संगीत, कला, ताइक्वांडो जैसी अलग-अलग कक्षाओं में भेजते हैं। सुनवाई के दौरान एक पक्ष के वकील ने भी कहा कि ऐसी कक्षाएं बच्चों के सर्वांगीण विकास में मदद करती हैं और उन्हें प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए तैयार करती हैं।

हालांकि, न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि बच्चों के लिए बहुत सारी कक्षाएं भी अच्छी नहीं होतीं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों के साथ बैठें और उनसे बात करें।

माता-पिता बच्चों को क्या सिखाएं?

अदालत ने कहा कि माता-पिता को बच्चों को अच्छे व्यवहार और शिष्टाचार सिखाने चाहिए। खासतौर पर लड़कों को यह समझाना चाहिए कि उन्हें लड़कियों और महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए।

कोर्ट के अनुसार, बच्चों की परवरिश केवल अलग-अलग कक्षाओं में भेजने से नहीं होती। माता-पिता की बातचीत और मार्गदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पीठ ने कहा कि माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताने से उनके बीच बेहतर संवाद और जुड़ाव विकसित होगा।



सुप्रीम कोर्ट की सलाह को ऐसे समझें
  • हर गतिविधि जरूरी नहीं: बच्चों को बहुत सारी अतिरिक्त कक्षाओं में भेजना जरूरी नहीं है।
  • बातचीत के लिए समय दें: माता-पिता को बच्चों के साथ बैठकर बात करनी चाहिए।
  • व्यवहार और शिष्टाचार सिखाएं: बच्चों को अच्छे तौर-तरीकों और दूसरों के प्रति सम्मान का महत्व समझाना चाहिए।
  • माता-पिता का जुड़ाव जरूरी: नियमित बातचीत से माता-पिता और बच्चों के बीच बेहतर संबंध बन सकते हैं।
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‘बच्चों के साथ खुद एक क्लास करें’

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि बच्चों को कला, संगीत, ताइक्वांडो या किसी दूसरी गतिविधि की कक्षा में भेजने के बजाय माता-पिता खुद उनके साथ समय बिताएं।

अदालत की सलाह का सार यही था कि माता-पिता बच्चों के साथ बैठें, उनसे बातचीत करें और उन्हें व्यवहार व अच्छे संस्कार सिखाएं। इससे बच्चों और माता-पिता के बीच बेहतर संबंध बन सकते हैं।

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