स्टडी इन इंडिया: एशियाई-अफ्रीकी देशों में होगी आईएनडी-सैट परीक्षा, हर जिले में बनेंगे मेडिकल कॉलेज
- भारत को उच्च शिक्षा का केंद्र बनाने की दिशा में एक और कदम
- स्टडी इन इंडिया का बजट 32 करोड़ से बढ़ाकर 45 करोड़ किया
- 1 करोड़ युवाओं को कौशल विकास योजना के तहत 2020 तक ट्रेनिंग देने का लक्ष्य
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विस्तार
भारत को विश्व में उच्च शिक्षा का पसंदीदा केंद्र बनाने के लिए ‘स्टडी इन इंडिया’ प्रोग्राम को एशियाई और अफ्रीकी देशों में बढ़ावा दिया जाएगा। इन देशों में आईएनडी-सैट परीक्षा कराई जाएगी। इसके तहत भारत में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेशी छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसकी घोषणा करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत को उच्च शिक्षा का पसंदीदा केंद्र होना चाहिए। ऐसा पहले भी था। इसके विस्तार के तहत ही यह फैसला लिया गया है।
मालूम हो कि केंद्र सरकार ने भारत को शिक्षा के श्रेष्ठ गंतव्य स्थल के तौर पर विकसित करने की पहल करते हुए 18 अप्रैल 2018 को ‘स्टडी इन इंडिया’ की शुरुआत की थी। स्टडी इन इंडिया नाम से एक वेब पोर्टल भी शुरू की गई थी। यह भारत में पढ़ने के इच्छुक छात्रों के लिए सिंगल विंडो का काम करता है। इस पोर्टल की मदद से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, सर्टिफिकेट कोर्स, पीएचडी आदि के लिए आवेदन किया जा सकता है।
इस योजना में छात्रों को इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी, आर्किटेक्चर आदि स्ट्रीम में दाखिले सहित शोध और इनोवेशन का मौका मिलेगा। तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी शुरुआत की थी। इस पहल में आईआईटी, आईआईएम समेत 160 शैक्षणिक संस्थान एवं विश्वविद्यालय शामिल किए गए हैं। इस योजना के तहत 2023 तक विदेशी छात्रों की संख्या दो लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
विदेशों में नौकरियों के मौकों के लिए कराएंगे ब्रिज कोर्स
विदेशों में शिक्षकों, नर्सों, चिकित्सा सहायक कर्मियों और देखभाल करने वालों की मांग ज्यादा है, इसलिए इन्हें हुनरमंद बनाने को मानव संसाधन और कौशल विकास मंत्रालय के साथ मिलकर ब्रिज कोर्स की शुरुआत की जाएगी। पीएम कौशल विकास योजना की शुरुआत 2015 में की गई थी। वहीं, स्टार्टअप इंडिया इनोवेटिव इन हायर एजुकेशन को इस बार सौ करोड़ मिले हैं। यह पिछले साल से 54 करोड़ रुपये अधिक है।
हर जिले में पीपीपी मॉडल पर बनेंगे मेडिकल कॉलेज
देशभर में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत मौजूदा हर जिला अस्पतालों से एक मेडिकल कॉलेज संबद्ध करने की योजना है। इसके लिए राज्यों को वित्तीय मदद दी जाएगी। साथ ही किफायती दरों पर जमीन भी मुहैया कराई जाएगी। बड़े मेडिकल काॅलेज में पीजी डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे।
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