पांचवी और आठवीं के छात्रों की होगी बोर्ड परीक्षाएं, लेकिन फेल नहीं होगा कोई भी छात्र
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उत्तराखंड बोर्ड की कक्षा पांच और आठ की पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए अब इन कक्षाओं के छात्रों की बोर्ड परीक्षाएं होंगी। यह नया प्रावधान इसी सत्र से लागू होगा। बोर्ड परीक्षा के प्रश्न-पत्र स्कूल स्तर पर तैयार नहीं किए जाएंगे।
प्रश्न-पत्र राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) तैयार करेगी। कक्षा के पाठ्यक्रम के मुताबिक छात्रों के जानकारी के स्तर (लर्निंग आउटकम) के मूल्यांकन के लिए यह बोर्ड परीक्षा कराई जाएगी। पुरानी और नई बोर्ड परीक्षा व्यवस्था में फर्क यह है कि इसमें छात्रों को फेल नहीं किया जाएगा। इससे शिक्षा के अधिकार के प्रावधानों का उल्लंघन भी नहीं होगा।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सोमवार को यह फैसला सचिवालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक में लिया। इस बदलाव के साथ एक व्यवस्था और जोड़ दी गई है कि कक्षा एक से 12 तक के छात्रों के परीक्षा परिणामों और उनकी पढ़ाई के स्तर को शिक्षकों की पदोन्नति, ट्रांसफर-पोस्टिंग आदि मामलों का आधार बना दिया गया है।
अगर किसी शिक्षक की कक्षा के छात्रों का लर्निंग आउटकम मानकों के हिसाब से नहीं है तो उसके लिए सीधे शिक्षक का करियर प्रभावित होगा। उसकी वार्षिक प्रविष्टि की प्रकृति भी इस पर निर्भर करेगी।
पहले की बोर्ड परीक्षा में फेल भी हो जाते थे छात्र
शिक्षा मंत्री ने बताया कि सभी फैसले तत्काल प्रभाव से प्रभावी कर दिए गए हैं। एससीईआरटी को कक्षा पांच और आठ के प्रश्न-पत्र तैयार करने का आदेश भी कर दिया गया है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को इन प्रश्न-पत्रों को छपवाने की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा मंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि कक्षा पांच और आठ की बोर्ड परीक्षा कराने के पीछे मंशा यह है कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो।
बच्चों की पढ़ाई मानकों के अनुरूप हो। पहले की बोर्ड परीक्षा की तरह इस व्यवस्था में छात्रों को परीक्षा देने के लिए किसी अन्य केंद्र पर नहीं जाना पड़ेगा। परीक्षा उनके अपने स्कूल में ही कराई जाएगी। इसमें प्राइमरी छात्रों को फेल न करने संबंधी शिक्षा के अधिकार का प्रावधान लागू रहेगा। उसी कक्षा में किसी छात्र को रोका नहीं जाएगा।
पहले की बोर्ड परीक्षा में फेल भी हो जाते थे छात्र
वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम आने के बाद कक्षा एक से आठ तक के छात्र को फेल न किए जाने का प्रावधान है। इससे छात्रों की परीक्षा कराने के बजाय उनकी ग्रेडिंग की जाती है। छात्रों की हर महीने परीक्षा ली जाती है। इस पर ग्रेड तय हो जाता।
अब इन कक्षाओं की वार्षिक लिखित परीक्षा होगी। इससे पूरे वर्ष के लर्निंग आउटकम का मूल्यांकन हो जाएगा। ढाई दशक पहले कक्षा पांच और आठ की जो बोर्ड परीक्षा होती रही है उसमें छात्रों को हाईस्कूल और इंटर के छात्रों की तरह दूसरे केंद्रों पर परीक्षा देने के लिए जाना होता था।
220 दिन पढ़ाई अनिवार्य, महापुरुषों की जयंती की छुट्टी खत्म
बाद में इसे खत्म कर दिया गया और परीक्षा उसी विद्यालय में की जाती रही, लेकिन छात्रों को पास-फेल किया जाता रहा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम आने के बाद छात्र को फेल करके एक ही कक्षा में रोके रखने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
220 दिन पढ़ाई अनिवार्य, महापुरुषों की जयंती की छुट्टी खत्म
राज्य के विद्यालयों में साल में 220 दिन पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है। इतने दिन हर स्कूल को बच्चों को पढ़ाना ही होगा। इसके साथ ही महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर स्कूलों में छुट्टी खत्म कर दी गई है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के मुताबिकजयंती और पुण्यतिथि पर कोई छुट्टी नहीं होगी। जिस दिन किसी महापुरुष की जयंती या पुण्यतिथि होगी, उस दिन अतिरिक्त कक्षा चलेगी। इसमें संबंधित महापुरुष के जीवन और कार्यों के संबंध में छात्र-छात्राओं को बताया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग छुट्टियों का डाटा तैयार कर रहा है। स्कूलों में छुट्टियों की संख्या अभी और कम की जाएगी। शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि शिक्षक संगठनों का चुनाव शिक्षा सत्र चालू होने के दौरान नहीं होगा। चुनाव छुट्टी के दिनों में कराए जाएंगे, जिससे स्कूलों में पढ़ाई बाधित न हो।
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