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Suicide: इस सूबे में तीन वर्षों में छात्र आत्महत्या की दर में हुई 58 प्रतिशत की वृद्धि, सीएम ने बताए आंकड़े

Mon, 02 Sep 2024 05:55 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 02 Sep 2024 05:55 PM IST
सार

Student Suicide: बीजद विधायक ध्रुबा चरण साहू के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि छात्रों में आत्महत्या के मामलों की संख्या 2021, 2022 और 2023 में लगातार बढ़ती जा रही है। आंकड़ें नीचे बताए गए हैं।
 

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Students Suicide in Odisha rises by 58pc in 3 years from 2021, CM Majhi tells legislative assembly
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

Student Suicide: सोमवार को ओडिशा की विधानसभा में राज्य में छात्र आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर एक चिंताजनक खुलासा किया गया। सोमवार को विधानसभा को सूचित किया गया कि 2023 तक तीन वर्षों में छात्रों में आत्महत्या की दर में 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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बीजद विधायक ध्रुबा चरण साहू के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि छात्रों में आत्महत्या के मामलों की संख्या 2021 में 119 से बढ़कर 2022 में 173 हो गई और फिर 2023 में 189 हो गई।
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इस अवधि के दौरान राज्य में छात्राओं के मुकाबले छात्रों में ऐसे मामले अधिक देखे गए हैं। तीन वर्षों में कुल मिलाकर 218 लड़कों ने आत्महत्या की, जबकि छात्राओं के लिए यह संख्या 263 थी।
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राज्य में 2021 से तीन वर्षों में कुल 17,778 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 में 5,649, 2022 में 6,140 और 2023 में 5,989 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए।

राष्ट्रीय स्तर पर भी आंकड़ें चिंताजनक

भारत में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं महामारी का रूप ले चुकी हैं। आलम यह है कि छात्रों की आत्महत्या की दर समग्र आत्महत्या प्रवृत्तियों की दर से भी अधिक है। हाल ही में जारी आईसी-3 सम्मेलन में एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि जहां कुल आत्महत्या की संख्या में सालाना 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं छात्र आत्महत्या के मामलों में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि छात्र आत्महत्या के मामलों की "कम रिपोर्टिंग" की संभावना है।

आईसी 3 संस्थान द्वारा संकलित रिपोर्ट में कहा गया है, "पिछले दो दशकों में, छात्रों की आत्महत्या की दर 4 प्रतिशत की खतरनाक वार्षिक दर से बढ़ी है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। 2022 में, कुल छात्र आत्महत्याओं में पुरुष छात्रों की संख्या 53 प्रतिशत थी। 2021 और 2022 के बीच, पुरुष छात्रों की आत्महत्या में 6 प्रतिशत की कमी आई, जबकि महिला छात्रों की आत्महत्या में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई।"

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